कौन हैं अमृता राय, जो दिग्विजय सिंह के साथ उज्जैन से अयोध्या तक कर रहीं हैं पदयात्रा?

Amrita Rai who is undertaking a padyatra from Ujjain to Ayodhya alongside Digvijaya Singh

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मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता राय पत्रकार रह चुकी हैं। इन दिनों वह दिग्विजय सिंह के साथ उज्जैन से अयोध्या तक निकाली जा रही ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ में पैदल चल रही हैं। यह यात्रा 20 अक्टूबर 2026 को उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से शुरू हुई है। इसका प्रस्तावित मार्ग ओरछा के रामराजा सरकार मंदिर से होते हुए अयोध्या के श्रीराम मंदिर तक है।
अमृता राय का परिचय
  • पेशा: अमृता राय एक वरिष्ठ टेलीविजन पत्रकार और समाचार प्रस्तोता रही हैं।

  • पत्रकारिता का सफर: उन्होंने बैग फिल्म्स से अपना करियर शुरू किया। इसके बाद स्टार न्यूज, एनडीटीवी और राज्यसभा टेलीविजन से जुड़ीं। राज्यसभा टेलीविजन पर उन्होंने ‘सरोकार’ कार्यक्रम की मेजबानी की और कार्यकारी निर्माता की जिम्मेदारी भी संभाली।1
  • दिग्विजय सिंह से विवाह: दोनों ने अगस्त 2015 में चेन्नई में विवाह किया था। अमृता राय ने सितंबर 2015 में सार्वजनिक रूप से विवाह की पुष्टि की थी।

पदयात्रा में अमृता राय की भूमिका क्या है?

वर्तमान यात्रा में अमृता राय केवल दिग्विजय सिंह की पत्नी के रूप में ही नहीं, बल्कि यात्रा में सक्रिय भागीदार के रूप में भी नजर आ रही हैं। समाचार रिपोर्टों के मुताबिक, वह ग्रामीणों से संवाद कर रही हैं और किसानों की समस्याओं पर भी अपनी बात रख रही हैं। उन्होंने सनातन धर्म को गौरव और स्वाभिमान का प्रतीक बताया है।

इस यात्रा का घोषित उद्देश्य धार्मिक स्थलों से जुड़े चंदे और चढ़ावे में पारदर्शिता तथा मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाना है। दिग्विजय सिंह ने इसे लगभग 950 किलोमीटर की यात्रा बताया है, जिसे करीब 70 दिनों में पूरा करने की योजना है।

खास बात: अमृता राय पहले भी दिग्विजय सिंह के साथ लंबी धार्मिक यात्रा कर चुकी हैं। वर्ष 2017 में दोनों ने नर्मदा परिक्रमा शुरू की थी, जो लगभग छह महीने चली। उज्जैन से अयोध्या की मौजूदा यात्रा में भी उनकी भागीदारी इसी पृष्ठभूमि में चर्चा में है। संक्षेप में: अमृता राय पत्रकारिता की पृष्ठभूमि वाली सार्वजनिक हस्ती हैं, जिन्होंने 2015 में दिग्विजय सिंह से विवाह किया। फिलहाल वह उनके साथ सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा में पैदल चल रही हैं और यात्रा के दौरान अपने विचार भी रख रही हैं।

अमृता राय की मौजूदा चर्चा क्यों हो रही है?

24 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, यात्रा के दौरान अमृता राय राजगढ़ जिले के सिंदूरिया गांव में एक बुजुर्ग महिला से मिलीं और उन्हें गले लगाया। इसके अलावा, वह खेतों में काम कर रही महिला किसानों से बातचीत करती और प्याज की बुवाई में हाथ बंटाती भी नजर आईं।

यात्रा में उनकी भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह धार्मिक आस्था, मंदिरों में पारदर्शिता और सामाजिक मुद्दों पर अपनी बात रख रही हैं। उनके अनुसार, सनातन धर्म सत्य, गौरव और स्वाभिमान का प्रतीक है। एक नजर में: अमृता राय पत्रकारिता से राजनीति के सार्वजनिक विमर्श तक पहुंची हैं। दिग्विजय सिंह के साथ उनकी मौजूदा पदयात्रा में ग्रामीणों और महिला किसानों से संवाद उनकी सक्रिय भागीदारी को सामने ला रहा है।

पैदल पूरी की थी 3,300 किमी की नर्मदा परिक्रमा

अमृता राय की मौजूदा पदयात्रा को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। वर्ष 2017-18 में भी उन्होंने दिग्विजय सिंह के साथ करीब 3,300 किलोमीटर की नर्मदा परिक्रमा पैदल पूरी की थी। यह यात्रा लगभग छह महीने चली और 9 अप्रैल 2018 को पूरी हुई।उस दौरान अमृता राय ने केवल जीवनसाथी के रूप में साथ नहीं निभाया, बल्कि यात्रा की कठिन दिनचर्या, पैदल सफर और ग्रामीणों से संवाद में भी भागीदारी की। उस समय की मीडिया रिपोर्टों में उनकी इस भूमिका का उल्लेख हुआ था।

अब उज्जैन से अयोध्या तक की ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ में उनकी मौजूदगी एक बार फिर चर्चा में है। दोनों यात्राओं के उद्देश्य अलग हैं—नर्मदा परिक्रमा को आध्यात्मिक संकल्प बताया गया था, जबकि मौजूदा यात्रा में धार्मिक आस्था के साथ मंदिरों के चढ़ावे में पारदर्शिता और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे भी उठाए जा रहे हैं। मानवीय पहलू यही है: लंबी धार्मिक यात्राओं में साथ चलना केवल शारीरिक मेहनत नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और निरंतर भागीदारी भी मांगता है। नर्मदा परिक्रमा से लेकर अयोध्या की पदयात्रा तक, अमृता राय की सहभागिता इसी निरंतरता को सामने लाती है।
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