सेवा की दृष्टि, स्वस्थ समाज का संकल्प: संदीप रघुवंशी ने दिल्ली में केंद्रीय संगठन को भेंट की ‘दृष्टि है तो सृष्टि’ पुस्तिका

Vision for Service Commitment to a Healthy Society Sandeep Raghuvanshi

छिंदवाड़ा के चौरई में 76 दिवसीय निःशुल्क स्वास्थ्य एवं नेत्र परीक्षण अभियान की उपलब्धियां राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत। 76 गांवों तक सेवा पहुंचाने की पहल, जरूरतमंदों के लिए मोतियाबिंद ऑपरेशन की व्यवस्था और जनकल्याण के संकल्प को पुस्तिका में किया गया संकलित।

छिंदवाड़ा/नई दिल्ली। समाज सेवा का वास्तविक उद्देश्य केवल सहायता पहुंचाना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना भी है। इसी भावना के साथ छिंदवाड़ा जिले की चौरई विधानसभा में संचालित 76 दिवसीय निःशुल्क स्वास्थ्य, नेत्र परीक्षण एवं मोतियाबिंद ऑपरेशन शिविर की पहल अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी है। मध्यप्रदेश भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कोषाध्यक्ष संदीप रघुवंशी ने दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्रीय संगठन के समक्ष इस सेवा अभियान की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की और अभियान पर आधारित ‘दृष्टि है तो सृष्टि’ पुस्तिका भेंट की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस सेवा पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना और नेत्र संबंधी समस्याओं के उपचार के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। चौरई विधानसभा के 76 गांवों को केंद्र में रखकर चलाए जा रहे इस अभियान में निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण, आंखों की जांच और जरूरतमंद मरीजों के लिए मोतियाबिंद ऑपरेशन की व्यवस्था की गई।

सेवा अभियान की उपलब्धियों का केंद्रीय संगठन के समक्ष प्रस्तुतीकरण

दिल्ली प्रवास के दौरान संदीप रघुवंशी ने केंद्रीय संगठन के पदाधिकारियों को अभियान की रूपरेखा, जनसेवा के कार्यों और ग्रामीणों तक पहुंचाई गई स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी दी। इस अवसर पर उन्होंने ‘दृष्टि है तो सृष्टि’ पुस्तिका भेंट कर सेवा अभियान के अनुभवों और उद्देश्यों को दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत किया।

इस पहल का महत्व इसलिए भी है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच कई परिवारों के लिए चुनौती बनी रहती है। आंखों की जांच में देरी और मोतियाबिंद जैसी समस्याओं का समय पर उपचार नहीं मिलने से लोगों की दिनचर्या, कामकाज और जीवन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में निःशुल्क परीक्षण और उपचार की व्यवस्था जरूरतमंद परिवारों के लिए राहत का माध्यम बन सकती है।

76 गांव, 76 दिवसीय अभियान और जनसेवा का संकल्प

प्रधानमंत्री के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस अभियान को सेवा संकल्प की भावना से जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को गांवों तक पहुंचाना, जरूरतमंद लोगों को जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने में सहयोग करना तथा समाज में सेवा के प्रति सहभागिता बढ़ाना है।

अभियान में स्वास्थ्य परीक्षण और नेत्र जांच के साथ मोतियाबिंद ऑपरेशन की निःशुल्क व्यवस्था प्रमुख रूप से शामिल है। इस तरह की पहल का वास्तविक प्रभाव मरीजों की संख्या, जांच के परिणाम, उपचार की उपलब्धता और ऑपरेशन के बाद देखभाल जैसे मानकों से आंका जा सकता है। अभियान की उपलब्धियों का दस्तावेजीकरण भविष्य में ऐसी जनसेवा गतिविधियों के अनुभव साझा करने में भी उपयोगी हो सकता है।

केंद्रीय संगठन के पदाधिकारियों तक पहुंचा सेवा अभियान

दिल्ली में पुस्तिका भेंट करने के अवसर पर राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल, भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद तरुण चुग, राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री महेंद्र पांडे और उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन सहित अन्य पदाधिकारियों की उपस्थिति का उल्लेख किया गया है।

केंद्रीय संगठन के समक्ष अभियान का विवरण प्रस्तुत करने से चौरई विधानसभा में संचालित सेवा गतिविधियों को व्यापक स्तर पर परिचित कराने का अवसर मिला। यह पहल इस बात को भी रेखांकित करती है कि सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों को व्यवस्थित रूप से दर्ज करना और उनके अनुभव साझा करना जनसेवा की निरंतरता के लिए महत्वपूर्ण है।

स्वास्थ्य सेवा ही समाज सेवा का सार

‘दृष्टि है तो सृष्टि’ शीर्षक अपने आप में आंखों की रोशनी और बेहतर जीवन के बीच संबंध को रेखांकित करता है। दृष्टि संबंधी समस्याओं से जूझ रहे व्यक्ति के लिए समय पर जांच और उचित उपचार जीवन को अधिक सहज बना सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी सुविधाओं की उपलब्धता से स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उपचार तक पहुंच बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

संदीप रघुवंशी के नेतृत्व में संचालित इस अभियान की केंद्रीय संगठन तक पहुंच सामाजिक सरोकारों को सार्वजनिक विमर्श में स्थान देने की पहल है। हालांकि, इसकी व्यापक सफलता का आकलन इस आधार पर होगा कि कितने लोगों को जांच और उपचार का लाभ मिला, कितने मरीजों के ऑपरेशन हुए और आगे उनकी देखभाल किस प्रकार सुनिश्चित की गई।

चौरई से दिल्ली तक पहुंची ‘दृष्टि है तो सृष्टि’ पुस्तिका केवल एक सेवा अभियान का परिचय नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं और जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने के संकल्प को दर्ज करने का प्रयास है। जनसेवा की ऐसी पहलों की सार्थकता तभी पूरी होती है, जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और सेवा का यह सिलसिला लगातार आगे बढ़ता रहे।

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