यूं ही नहीं हुई शारदीय नवरात्र की शुरुआत महिषासुर वध से लेकर श्रीराम की शक्ति पूजा तक, जानिए नवरात्र की पूरी पौराणिक कथा

commencement of Shardiya Navratri holds deep significance From the slaying of Mahishasura to Lord Rama worship of Shakti

यूं ही नहीं हुई शारदीय नवरात्र की शुरुआत

महिषासुर वध से लेकर श्रीराम की शक्ति पूजा तक, जानिए नवरात्र की पूरी पौराणिक कथा

शारदीय नवरात्र सिर्फ नौ दिनों तक चलने वाला धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह शक्ति की उपासना, अधर्म पर धर्म और बुराई प र अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होने वाले नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में मां भगवती की आराधना करने से भक्तों को शक्ति, ज्ञान, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।  साल में चार बार नवरात्र आते हैं। इनमें चैत्र और शारदीय नवरात्र को प्रमुख माना जाता है, जबकि माघ और आषाढ़ के नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है।

2026 में कब से शुरू होंगे नवरात्र?

वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होकर 19 अक्टूबर तक चलेंगे। इसके अगले दिन यानी 20 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा। नवरात्र के पहले दिन विधि-विधान से घटस्थापना की जाती है और नौ दिनों तक मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होती है।

महिषासुर के आतंक से जुड़ी है पहली कथा

शारदीय नवरात्र से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध पौराणिक कथा महिषासुर से जुड़ी है। मान्यता के अनुसार महिषासुर ने कठोर तपस्या कर ब्रह्माजी को प्रसन्न किया और वरदान प्राप्त किया कि कोई देवता, दानव या पुरुष उसका वध नहीं कर सकेगा। वरदान मिलते ही महिषासुर का आतंक बढ़ गया। उसने तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया और देवताओं को भी परेशान कर दिया। तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश सहित सभी देवताओं की शक्तियां एकत्र हुईं और इसी दिव्य शक्ति से मां दुर्गा का प्राकट्य हुआ। मां दुर्गा और महिषासुर के बीच नौ दिनों तक भीषण युद्ध हुआ। दसवें दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर दिया। इसी विजय को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है और दसवें दिन विजयादशमी मनाई जाती है।

श्रीराम ने भी की थी शक्ति की आराधना

नवरात्र से जुड़ी दूसरी प्रमुख कथा भगवान श्रीराम से संबंधित है। मान्यता है कि लंका पर चढ़ाई से पहले भगवान श्रीराम ने मां भगवती की आराधना की थी। उन्होंने विजय की कामना से शक्ति की उपासना की। मां भगवती की आराधना से उन्हें विजय का आशीर्वाद मिला और युद्ध में भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया। इसी परंपरा को शक्ति उपासना और विजयादशमी से जोड़कर देखा जाता है।

नौ दिन, मां के नौ स्वरूप

नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होती है।

पहला दिन — मां शैलपुत्री
शक्ति और स्थिरता का स्वरूप माना जाता है।

दूसरा दिन — मां ब्रह्मचारिणी
तप, संयम और साधना का प्रतीक।

तीसरा दिन — मां चंद्रघंटा
साहस और शांति का स्वरूप।

चौथा दिन — मां कूष्मांडा
सृष्टि की ऊर्जा और शक्ति से जुड़ा स्वरूप।

पांचवां दिन — मां स्कंदमाता
ममता और मातृत्व का प्रतीक।

छठा दिन — मां कात्यायनी
शक्ति और विजय का स्वरूप।

सातवां दिन — मां कालरात्रि
भय और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाली देवी।

आठवां दिन — मां महागौरी
पवित्रता, शांति और सौम्यता का स्वरूप।

नौवां दिन — मां सिद्धिदात्री
सिद्धि और पूर्णता प्रदान करने वाली देवी।

नवरात्र में ऋतु परिवर्तन का भी महत्व

शारदीय नवरात्र ऐसे समय आते हैं जब वर्षा ऋतु समाप्त होकर शरद ऋतु की शुरुआत होती है। प्रकृति में बदलाव के इस समय को भारतीय परंपरा में साधना, संयम और आत्मशुद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। यानी नवरात्र सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि शरीर, मन और विचारों को अनुशासित करने की परंपरा से भी जुड़े हैं।

क्यों खास है शारदीय नवरात्र?

नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा के पीछे शक्ति के अलग-अलग रूपों को समझने की परंपरा है। कहीं मां को साहस का स्वरूप माना जाता है, कहीं ज्ञान का, कहीं मातृत्व का तो कहीं नकारात्मक शक्तियों के विनाश का। यही वजह है कि नौ दिनों का यह पर्व सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहता। यह संदेश देता है कि असत्य और अहंकार कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में सत्य और धर्म की विजय होती है।

नवरात्र से दशहरा तक विजय का संदेश

नवरात्र के नौ दिन शक्ति की आराधना के माने जाते हैं और दसवां दिन विजय का। महिषासुर पर मां दुर्गा की विजय हो या भगवान श्रीराम की रावण पर विजय, दोनों कथाओं का मूल संदेश एक ही है। बुराई कितनी भी बड़ी क्यों न हो, धर्म और सत्य की शक्ति के सामने उसका अंत निश्चित है। इसी विश्वास के साथ हर साल करोड़ों श्रद्धालु नवरात्र में मां भगवती की आराधना करते हैं और विजयादशमी के दिन अच्छाई की जीत का उत्सव मनाते हैं।

2026 के नवरात्र का पूरा क्रम

11 अक्टूबर — प्रतिपदा, मां शैलपुत्री
12 अक्टूबर — द्वितीया, मां ब्रह्मचारिणी
13 अक्टूबर — तृतीया, मां चंद्रघंटा
14 अक्टूबर — चतुर्थी, मां कूष्मांडा
15 अक्टूबर — पंचमी, मां स्कंदमाता
16 अक्टूबर — षष्ठी, मां कात्यायनी
17 अक्टूबर — सप्तमी, मां कालरात्रि
18 अक्टूबर — अष्टमी, मां महागौरी
19 अक्टूबर — नवमी, मां सिद्धिदात्री
20 अक्टूबर — विजयादशमी, दशहरा

शारदीय नवरात्र की परंपरा में आस्था के साथ एक गहरा संदेश भी छिपा है। शक्ति का अर्थ केवल सामर्थ्य नहीं, बल्कि धर्म की रक्षा और अधर्म के खिलाफ खड़े होने का संकल्प भी है। महिषासुर वध से लेकर श्रीराम की शक्ति आराधना तक, नवरात्र की पौराणिक कथाएं यही संदेश देती हैं कि जब शक्ति, सत्य और धर्म एक साथ खड़े होते हैं तो बुराई का अंत निश्चित होता है। यही वजह है कि शारदीय नवरात्र आज भी करोड़ों लोगों के लिए आस्था, साधना और नई ऊर्जा का पर्व बना हुआ है।

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