एमपी में द्वारका नगरी योजना: शहरों का कायाकल्प…5000 करोड़ से मिलेगा विकास को बल

Dwarka Nagari Yojana

द्वारका नगरी से शहरों का कायाकल्प…5000 करोड़ से मिलेगा विकास को बल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने द्वारका नगरी योजना को शहरी विकास की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह योजना शहरों को सुनियोजित, आधुनिक और सुविधासंपन्न बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। योजना के तहत आवास, सड़कों की मरम्मत, साफ-सफाई और बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को समयबद्ध और पारदर्शी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। तीन वर्षों की इस योजना में 5000 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे, जिससे नगरीय निकायों को आर्थिक मजबूती मिलेगी और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

द्वारका नगरी योजना से बदलेगा शहरों का स्वरूप

5000 करोड़ से शहरी विकास को रफ्तार
आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होंगे शहर

भोपाल: मध्यप्रदेश में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और नागरिकों की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने “द्वारका नगरी योजना” के माध्यम से शहरों के विकास की नई रूपरेखा तैयार की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस योजना को प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों के लिए गेमचेंजर बताते हुए कहा कि यह योजना शहरों को सुनियोजित, आधुनिक और सुविधासंपन्न बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।मंत्रालय में आयोजित बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने द्वारका नगरी योजना के नियमों और प्रक्रियाओं पर विभागीय प्रस्तुतीकरण का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना के क्रियान्वयन में समयबद्धता, पारदर्शिता और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि आम नागरिकों को इसका अधिकतम लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के हर नागरिक को बेहतर आवास, मजबूत आधारभूत संरचना और गुणवत्तापूर्ण जीवन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से द्वारका नगरी योजना को लागू किया जा रहा है, जिससे नगरीय क्षेत्रों का समग्र विकास सुनिश्चित होगा।

इस योजना के तहत शहरों में आवास निर्माण, प्रमुख सड़कों का विकास एवं मरम्मत, साफ-सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ करना और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। साथ ही गौशाला और मुक्तिधाम जैसे आवश्यक निर्माण कार्यों को भी प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि शहरों में संतुलित और समावेशी विकास हो सके।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि नगरीय निकायों से प्राप्त प्रस्तावों में स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि शहरों की मास्टर प्लान सड़कों का विकास पीपीपी मोड पर भी किया जा सकता है, जिससे निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी और विकास कार्यों में तेजी आएगी।

द्वारका नगरी योजना वित्त वर्ष 2026-27 से लेकर 2028-29 तक तीन वर्षों के लिए लागू की जाएगी। इस योजना के लिए कुल 5000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसमें 2201.20 करोड़ रुपए राज्य सरकार द्वारा शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण के रूप में दिए जाएंगे, जबकि 2798.80 करोड़ रुपए वित्तीय संस्थाओं से ऋण के रूप में प्राप्त किए जाएंगे।

इस योजना की खास बात यह है कि राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले ऋण की अदायगी 25 वर्ष बाद शुरू होगी और इसे पांच समान वार्षिक किश्तों में चुकाया जाएगा। वहीं नगरीय निकायों द्वारा लिए गए ऋण और उस पर लगने वाले ब्याज का भुगतान 20 वर्षों में किया जाएगा, जो राज्य के मुद्रांक शुल्क से प्राप्त राशि से संभव होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहरों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि मेट्रोपॉलिटन रीजन को ध्यान में रखते हुए भी विकास कार्य किए जाएंगे, जिससे बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे और मध्यम शहरों का भी संतुलित विकास हो सके।

इसके अलावा केंद्र सरकार की प्रोत्साहन आधारित योजना “अर्बन चैलेंज फंड” की गैप फंडिंग भी द्वारका नगरी योजना के माध्यम से की जा सकेगी। इससे राज्य को अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिलेगी और विकास कार्यों को और गति मिलेगी।

बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास संजय दुबे, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) नीरज मंडलोई, वित्त सचिव लोकेश जाटव, आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास संकेत भोंडवे सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अपने सुझाव भी प्रस्तुत किए।

विशेषज्ञों का मानना है कि द्वारका नगरी योजना के माध्यम से मध्यप्रदेश के शहरों में न केवल आधारभूत ढांचे में सुधार होगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। निर्माण कार्यों में तेजी आने से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। कुल मिलाकर, द्वारका नगरी योजना मध्यप्रदेश के शहरी विकास को नई दिशा देने वाली एक महत्वाकांक्षी पहल है। यदि इसका प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन किया जाता है, तो आने वाले वर्षों में प्रदेश के शहर आधुनिक, स्वच्छ और सुविधासंपन्न बनकर एक नई पहचान स्थापित कर सकते हैं।

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