चीन का पारिस्थितिकी और पर्यावरण कानून संहिता 15 अगस्त को
लागू हुआ। यह चीनी नागरिक कानून संहिता के बाद दूसरा कानून है, जिसे
"संहिता" का नाम दिया गया। यह दुनिया में पहला कानून है, जिसका नाम
"पारिस्थितिकी और पर्यावरण कानून संहिता" है।
बताया जाता है कि इस 1.6 लाख से ज़्यादा शब्द वाले पारिस्थितिकी
और पर्यावरण कानून संहिता में 1,242 धाराएं हैं। इसे सामान्य प्रावधान, प्रदूषण
रोकथाम व नियंत्रण, पारिस्थितिकी संरक्षण, हरित व निम्न-कार्बन विकास,
कानूनी दायित्व और पूरक प्रावधान में विभाजित किया गया है। यह न केवल नीले
आसमान, साफ पानी और साफ जमीन की रक्षा करता है, बल्कि हर व्यक्ति के
पारिस्थितिकी और पर्यावरण अधिकार की भी रक्षा करता है।
ध्यानाकर्षक है कि पारिस्थितिकी और पर्यावरण कानून संहिता में
पहली बार पारिस्थितिक बहाली संबंधी सिद्धांत, प्रक्रिया और प्रमुख क्षेत्रों के
लिए विनियमन बनाया गया। जंगल, घास के मैदान, आर्द्रभूमि, समुद्र, नदी,
झील, और खनन क्षेत्र जैसे विशिष्ट पारिस्थितिक बहाली परिदृश्य के लिए खास
ज़रूरतें रखी गईं।
इसके अलावा, पारिस्थितिकी और पर्यावरण कानून संहिता में पहली
बार विभिन्न प्रकारों के सामाजिक शोर पर नियंत्रण की ज़िम्मेदारी की सीमा
को साफ किया गय और प्रकाश प्रदूषण की रोकथाम आदि विषय भी जोड़े
गए।
पारिस्थितिकी और पर्यावरण कानून संहिता के लागू होने से चीन में
पारिस्थितिक पर्यावरण की रक्षा की जाएगी और अर्थव्यवस्था व समाज के
व्यापक हरित परिवर्तन में योगदान दिया जाएगा।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)





