चुभती गर्मियों में यूरोपीय लोगों की पसंद बना चीन
कभी गर्मियों में एशिया के देशों को सैलानियों की पहली पसंद यूरोप के पर्यटन स्थल होते थे। लेकिन अब स्थितियां बदल रही हैं। कम से कम इस साल तो यह बदलाव बड़े रूप में दिख रहा है। इसकी वजह है यूरोप में इस साल पड़ी प्रचंड गर्मी। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यूरोप में वैसे भी गर्मी अपनी तासीर बदल रही है। कुछ साल पहले तक यूरोप में पारा का उस स्तर तक चढ़ना गरमी का प्रतीक होता था, वह यूरोप के लिए अब कम से कम ग्रीष्मकालीन दिनों के लिए सामान्य होता जा रहा है। कभी चेक गणराज्य की राजधानी प्राग ने 40 डिग्री सेल्सियस यनी 104 डिग्री फारेनहाइट की गर्मी नहीं झेली, इस साल जून और जुलाई में वहां का तापना ऐसा ही रहा। इसका असर चीन के पर्यटन पर पड़ रहा है। कह सकते हैं कि चीन यूरोप के सैलानियों की पहली पसंद बनकर उभर रहा है। चीन सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में दो करोड़ 91 लाख से ज्यादा विदेशी नागरिकों ने चीन की यात्रा की है। यह आंकड़ा इसी अवधि के पिछले साल के आंकड़ों की तुलना में 20.4 फीसद ज्यादा है। चीन आने वाले इन सैलानियों में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी अकेले यूरोप की रही। यूरोप के पर्यटन आयोजकों के आंकड़ों के अनुसार, इस साल चीन आने वाले लोगों ने पिछले साल की तुलना में 275 फीसद से ज्यादा रहा। साफ है कि चीन इन दिनों यूरोप के सैलानियों की पसंदीदा जगह बनकर उभरा है। इसकी वजह यहां की कूलिंग तकनीक, बस, ट्रेन, मेट्रो आदि में एयरकंडीशन की व्यवस्था और सबसे बड़ी बात यह कि यहां का तामपान यूरोप जैसा नहीं रहा।
यूरोप के मौसम पर बारीक नजर रखने वाली कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के अनुसार, बीती मई के आखिर और जून में चली लू के चलते फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम और स्पेन के कुछ हिस्सों में प्रतिदिन का औसत तापमान सामान्य से 10 डिग्री सेल्सियस यानी करीब 18 डिग्री फ़ारेनहाइट से ज़्यादा रहा। बीते जून में पश्चिमी यूरोप का औसतन तापमान 20.74 डिग्री सेल्सियस यानी 69 डिग्री फारेनहाइट रहा, जो 1991-2020 के दशक औसत से करीब 3.06 डिग्री सेल्सियस यानी करीब (5.4 डिग्री फारेनहाइट ज़्यादा रहा। वैसे तो मौसम का मिजाज पूरी दुनिया में बदल रहा है। लेकिन यूरोप में अब पहले की तुलना में गर्मियां ज़्यादा समय तक पड़ रही हैं और परंपरा से तय वक्त के पहले यानी जल्दी शुरू हो जाती हैं। इसकी वजह से पूरे यूरोप का पारिस्थितिकीय तंत्र, अर्थव्यवस्था और रोज़मर्रा की ज़िंदगी को बदल रही है। इस साल यूरोप में गर्मियों के चलते लाखों लोगों की मौत हुई है। एक आंकड़े के मुताबिक, बीती गर्मी में यूरोप में इसी अवधि के दौरान होने वाली मौतों की तुलना में 23 प्रतिशत ज्यादा रही है।
बार-बार आने वाली गर्मी की लहरों से परेशान यूरोप के लोग अब छुट्टियां मनाने के लिए भूमध्य सागर के इलाकों के बजाय ठंडे मौसम वाले उत्तरी इलाकों का रुख करना तेज कर दिया है। यूरोप में गर्मियों के दौरान तापमान के 40 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाने के चलते वहां के लोगों के लिए ठंडी जगहों पर जाना ही ‘कूल’ यानी पसंदीदा हो गया है। यूरोप के टूर एजेंटों के अनुसार, वहां से कई सैलानी चीन पहुंचे हैं। उनका साफ कहना है कि वे यूरोप के दक्षिणी हिस्सों की गर्मी से बचकर यहाँ आए हैं। चीन के पर्यटन स्थलों पर यूरोप के टूरिस्ट स्थलों की तुलना में भीड़भाड़ कम है। फिर तापमान भी तीस डिग्री सेल्सियस से नीजे हैं। समुद्र की ठंडी हवाएं हैं। इसलिए यूरोप के लोगों की छुट्टियां चीन में कहीं ज्यादा बेहतर गुजर रही हैं।
यूरोप में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की वजह से वहां बिजली का भी संकट बढ़ गया है। इसके चलते छुट्टियों का नया ट्रेंड “कूलकेशन” तेज़ी से लोकप्रिय हो रहा है। इसकी वजह से यूरोप से चीन का रुख करने वाले पर्यटकों की संख्या में तेज बढ़ोतरी हुई है। यूरोप के सैलानी चीन में न सिर्फ़ अलग-अलग तरह के नज़ारों का लुत्फ उठा रहे हैं, बल्कि इतिहास और संस्कृति का भी आनंद ले रहे हैं। इसके साथ ही चीन की एयर कंडीशनिंग की सुविधा भी उन्हें लुभा रही है। रिकॉर्डतोड़ गर्मी के चलते यूरोप में पहले से ही महंगी बिजली और महंगी हो गई है। फिर वहां बिजली कटौती भी खूब हो रही है। क्योंकि बिजली का उत्पादन मांग की तुलना में कम है। इससे यूरोप के उन इलाकों में एयर कंडीशन की सुविधा चौबीसों घंटे उपलब्ध नहीं हो पा रही है, जहां गर्मियां ज्यादा पड़ रही हैं। ऐसे लोगों के लिए चीन ठंडा और आरामदायक विकल्प के रूप में सामने आया है। हैनान प्रांत में मॉल, म्यूज़ियम, कारों और यहाँ तक कि समुद्र किनारे बने स्नैक आउटलेट्स में भी एयर कंडीशनर लगातार चलते रहते हैं। दिलचस्प यह है कि चीन के एयर कंडीशन व्यवस्था की सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा हो रही है।
चीन आए पर्यटकों का कहना है कि चीन में लगभग हर जगह एयर कंडीशनिंग की सुविधा है, जो यूरोप के देशों की तुलना में अलग है। रेस्तरां, म्यूज़ियम, सिनेमाघर, मॉल, हर जगह एसी है। इससे यूरोप के सैलानियों का चीन में रहना और घूमना-फिरना बहुत आरामदायक है। ट्रिप डॉट कॉम के आंकड़ों से भी साबित होता है कि चीन यूरोप के सैलानियों का पसंदीदा केंद्र बन रहा है। उसके अनुसार, गर्मियों में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के चीन आने की संख्या में ज़बरदस्त उछाल आया है। अगर फ्रांस की ही बात करें तो वहां सार्वजनिक परिवहन में एयर कंडीशनिंग आम बात नहीं है, और स्टेशन तो वैसे भी एसी नहीं है। इसकी वजह है कि वहां पहले इसकी जरूरत महसूस होती ही नहीं थी। लेकिन इस बार की गर्मियों ने फ्रांस को भी अब एयर कंडिशंड स्टेशन और परिवहन की चिंता करने पर मजबूर कर दिया है। यूरोप की गर्मियों के चलते चीन का हैनान प्रांत अच्छे और ठंडे सैलानी केंद्र के तौर पर उभरा है। अब तो दुनिया भर के सोशल मीडिया यूज़र्स हैनान के समुद्र तटों और जंगलों के बीच बनी आरामदायक जगहों के बारे में एक-दूसरे से जानकारी साझा कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है, “चीन की गर्मियां बहुत सुहावनी होती हैं।”
चीन में ‘कूलकेशन’ यानी ठंडी जगहों पर छुट्टियां मनाने का आकर्षण सिर्फ़ इंफ्रास्ट्रक्चर तक ही सीमित नहीं है। सब-आर्कटिक पर्माफ्रॉस्ट से लेकर ट्रॉपिकल समुद्र तटों तक, चीन में गर्मियों में घूमने-फिरने के लिए कई तरह की शानदार जगहें हैं। हैनान के पूर्वी तट पर समुद्र की हवाओं की वजह से तापमान 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है, जो दक्षिणी यूरोप में मौजूदा 40 डिग्री सेल्सियस की गर्मी की तुलना में काफी कम है। पहाड़ी इलाकों में बसे गांव और भी राहतभरे हैं, क्योंकि वहां कम ऊंचाई वाले इलाकों की भीषण गर्मी का असर कम हो जाता है।
चीन में समुद्र और पहाड़ दोनों हैं, जिससे मौसम काफी सुहावना रहता है। इसलिए हैनान में बहुत ज़्यादा गर्मी नहीं होती और विदेशी पर्यटकों के लिए यह जगह बहुत अच्छी रहती है। इसके साथ ही युन्नान प्रांत का कुनमिंग शहर भी सैलानियों के पसंदीदा केंद्र के रूप में उभरा है। यूरोप के पर्यटकों को चीन में सबसे अच्छी बात वहां की सांस्कृतिक भिन्नता लगी है। गर्मियों की गर्मी में, बहुत से चीनी लोग लंबी आस्तीन वाले कपड़े, चौड़ी किनारी वाली टोपियां और चेहरे को ढकने वाली चीज़ें पहनते हैं। यूरोप के लोगों के लिए ऐसा नज़ारा कम ही दिखता है। शायद यही वजह है कि यूरोप इन दिनों चीन की ठंडी और अपेक्षाकृत राहत भरे मौसम में झूम रहा है।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक— उमेश चतुर्वेदी)





