चीन-अमेरिका रणनीतिक स्थिरता वाले रचनात्मक सम्बंध से दोनों देशों और विश्व को अधिक लाभ होगा

शरद ऋतु के सुनहरे मौसम में, चीन और अमेरिका के राष्ट्राध्यक्षों ने
एक बार फिर प्रशांत महासागर को पार किया और हाथ मिलाया, जिसने
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का बहुत ध्यान आकर्षित किया। लोगों की राय में, यह
एक ऐतिहासिक क्षण था।

ध्यान रहे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के निमंत्रण पर, चीनी राष्ट्रपति शी
चिनफिंग ने 23 से 25 तक अमेरिका की राजकीय यात्रा की। यात्रा के
दौरान, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सम्बंधों और वैश्विक स्थिति से
सम्बंधित रणनीतिक मुद्दों पर विचारों के गहन आदान-प्रदान के माध्यम
से 8-सूत्रीय समानताएं संपन्न कीं।

इनमें से सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक सफलता यह है कि चीन-अमेरिका
सम्बंधों का विषय एक नए चरण में पहुंच गया है और रणनीतिक स्थिरता
के साथ सम्मान, निष्पक्षता और पारस्परिकता के आधार पर चीन-
अमेरिका रणनीतिक सम्बंध बनाने पर आम सहमति बन गई है, जिसने
चीन और अमेरिका को बड़े देशों के रूप में एक साथ काम करने का रास्ता
खोजने के लिए एक स्पष्ट रणनीतिक मार्गदर्शन दिया है। सम्मान का अर्थ
है एक-दूसरे की संप्रभुता, इलाके की एकता, सामाजिक व्यवस्था और
विकास के मार्ग, मुख्य हितों और महान चिंताओं का सम्मान करना।
निष्पक्षता का अर्थ है पारस्परिक-लाभ सहयोग को आगे बढ़ाना और
परामर्श के माध्यम से मतभेदों को हल करना। पारस्परिकता का मतलब
है कि दोनों देशों की संप्रभुता समान है और वे प्रभुत्ववादी कार्रवाई नहीं
करेंगे और अपनी चिंताओं को एक साथ हल करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में
संतुलित विकास करेंगे।

अमेरिकी कुहन कोष के अध्यक्ष रॉबर्ट लॉरेंस कुह्न के विचार में चीन
और अमेरिका के बीच उच्च स्तरीय आवाजाही बनाए रखना
पारस्परिक समझ और विश्वास की वृद्धि को मददगार साबित होगा।

विश्वास है कि राष्ट्रपति शी की यात्रा में प्राप्त उपलब्धियां अमेरिका-
चीन सम्बंध के स्थिर विकास के इंजन के रूप में परिवर्तित होंगी।
इस यात्रा के दौरान, दोनों पक्षों ने आर्थिक और व्यापार क्षेत्रों में पारस्परिक
रूप से लाभकारी उपलब्धियां हासिल कीं। अमेरिका-चीन व्यापार परिषद के
अध्यक्ष सीन स्टीन ने मीडिया को बताया कि चीनी प्रौद्योगिकी और चीनी
उद्यम तेजी से बढ़ रहे हैं। वैश्विक बाजार में अमेरिका-चीन सहयोग की
काफी संभावनाएं हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि इतिहास के इस नए मोड़ पर, चीन और
अमेरिका को दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच आवश्यक सहमति को पूरी
तरह से लागू करना चाहिए और चीन-अमेरिका रणनीतिक स्थिरता
रचनात्मक सम्बंधों को ठोस कदमों में बदलना चाहिए ताकि दोनों देशों के
लोगों की ज़्यादा भलाई हो और दुनिया में शांति की ज़्यादा उम्मीद जगे।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)

 

 

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