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CG Naxlite Attack:इस हमले ने साफ कर दिया था कांग्रेस के पूरे नेतृत्व को, इस नेता को मारी गईं 100से अधिक गोलियां

DigitalDesk by DigitalDesk
December 21, 2022
in छत्तीसगढ, रायपुर, स्पेशल
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CG Naxlite Attack:इस हमले ने साफ कर दिया था कांग्रेस के पूरे नेतृत्व को, इस नेता को मारी गईं 100से अधिक गोलियां
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हम बात कर रहे है ऐसे एक नेता की जिसने अपने समाज को बचाने के लिए समाज के युवाओं को नई राह दिखाने के लिए एक संगठन तैयार किया औऱ बदले में मिली उसको दर्दनाक मौत।

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बात मई 2013 की है । धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ की जहां एक हमले ने राज्य कांग्रेस को ही साफ कर दिया। इस दर्दनाक मौत के शिकार हुए थे कांग्रेस नेता महेन्द्र  कर्मा। आइए बताते हैं आपके कि किस तरह से हुआ ये हमला औऱ क्यों महेन्द्र कर्मा को टारगेट किया गया।

कैसे और कब हुई वारदात

मई 2013 में कांग्रेस छत्तीसगढ़ में कांग्रेस विधानसभा चुनावों की तैयारियों में लगी थी । परिवर्तन यात्रा पूरे प्रदेश में निकाली जा रही थी। उस दिन परिवर्तन यात्रा के  दौरान सभा के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला सुकमा से जगदलपुर की ओर आ रहा था।

रास्ते में झीरम घाटी पड़ी। घाटी पर मोबाइल नेटवर्क नहीं मिल रहा था। शाम के तकरीबन 4 से साढ़े चार का वक्त था। काफिले की गाड़ियॉ  बढ़ रहीं थी लेकिन अचानक एक गाड़ी के नीचे ब्लास्ट हुआ। नेताओं और उनके सुऱक्षाकर्मियो को समझते देर नहीं लगी कि वो किसी बड़ी नक्सली साजिश का शिकार हो गए हैं। जैसे ही फायरिंग शुरू हुई नक्सलियों पर भी सुरक्षा गार्डों ने पलटकर फायरिंग की। दोनों तरफ से फायरिंग जारी थी।  सुरक्षा गार्डों की गोलियां खत्म हो गईं लेकिन नक्सलियों की गोलियां खत्म नहीं हुई।

Mahendra Karma

महेन्द्र कर्मा को किया टारगेट

फायरिंग रोककर नक्सलियों ने ऐलान किया कि –“महेन्द्र कर्मा जिस गाड़ी में हो बाहर आए।“ ऐलान सुनते ही महेन्द्र कर्मा गाड़ी से बाहर निकले। बाहर निकलते वक्त महेन्द्र कर्मा को शायद उम्मीद होगी कि खुद बच नहीं सकेंगे लेकिन उनके बाहर आने के बाद उनके साथी बच सकते हैं। महेन्द्र कर्मा के बाहर निकलते ही नक्सलियों ने उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया। तकरीबन सौ गोलियां उसके शरीर पर दागी गईं। नक्सलियों ने इतने के बाद भी कर्मा को नहीं छोड़ा कर्मा के निष्प्राण शरीर को वो अपने साथ ले गए और उस पर बंदूक की नोंक से कई वार किए।  उनके शरीर में एक दो नहीं ब्लकि पूरे 78 बार वार किए गए। पोस्मार्टम की रिपोर्ट में जब खुलासा हुआ तो सभी के होश उड़ गए।नक्सली बाकी नेताओं को अगवा कर ले गए और उस घाटी से कुछ ही लोग बचकर आए।

कौन थे महेन्द्र कर्मा और क्या थी नक्सलियों से दुश्मनी

 

महेन्द्र कर्मा देतंवाडा के एक छोटे से गांव में पैदा हुए थे। दंतेवाडा और बस्तर में नक्सलियों का प्रभाव बढ़ रहा था तब कर्मा ने हजारों की संख्या में नक्सलियो को सरेंडर करवाया।

कर्मा ने नक्सलियों के खिलाफ आदिवासियों में 1991 में जन जागरण अभियान शुरू किया था।

बस्तर दंतेवाडा इलाके में जन जागरण करते हुए महेन्द्र कर्मा की लोकप्रियता इतनी बढ गई कि वो निर्दलीय ही चुनाव जीतकर संसद तक पंहुचे और फिर उन्होनें कांग्रेस ज्वाइन कर ली।

छत्तीसगढ़ राज्य अलग होने के बाद जब पहली सरकार बनी तो कर्मा उसमें मंत्री बने। फिर बीजेपी के राज में पहले नेता प्रतिपक्ष बनने का मौका भी उनको ही मिला।

महेन्द्र कर्मा के सलवा जुडूम से नाराज़ थे नक्सली

सलवा जुड़ूम  आदिवासी युवाओं का दस्ता था जो नक्सलियों के खिलाफ जन जागरण करता था। सलवा जुड़ूम एक आदिवासी शब्द है जिसका मतलब होता है शांति का कांरवा। ये 2005 में बनाया गया था । उस वक्त छत्तीसगढ़ में डॉक्टर रमन सिंह की सरकार थी। रमन सरकार को सलवा जुड़ूम इतना पंसद आया कि सरकार भी सलवा जुडूम की मदद करने लगी। माना जा सकता है कि सलवा जुडूम कांग्रेस और बीजेपी दोनो का मिला जुला अभियान था ।

सलवा जुडूम का असर भी दिखा और गावंवालो ने माओवादियों की मदद कम कर  दी।

माओवादियों के ठिकानों पर पुलिस ने जाकर उनका सरेंडर कराना शुरू किया।

सलवा जुडुम से परेशान नक्सलियों ने पंचायत में गावं वालो को मुखबिरी के शक में मारना शुरू कर दिया।

वही दूसरी तरफ सलवा जुडुम को लेकर भी शिकायतें शुरू हो गई।

सलवा जुडूम का मामला सर्वोच्च अदालत तक गया 2011 में सलवा जुडुम पर रोक लगाने के आदेश हुए

न राज्य सरकार ने न ही महेन्द्र कर्मा ने सलवा जुडूम पर रोक लगाई ।

सलवा जुडूम ऐसा ही चलता रहा।

 

सलवा जुडूम का बदला लिया नक्सलियों ने ?

नक्सलियों ने महेन्द्र कर्मा को बार बार टारगेट किया लेकिन हर बार वो नक्सली हमले से बचते रहे। वही उनके परिवार के तरकीबन 15 लोगों को खोने के बाद राज्य सरकार ने उनको जेड प्लस की सुरक्षा दी। लेकिन झीरम घाटी में वो सुरक्षा भी महेन्द्र कर्मा को नहीं बचा सकी।  झीरम घाटी में उस वक्त की मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक महेन्द्र कर्मा की मौत के बाद नक्सलियों  जश्न भी मनाया था।

इस हमले में कांग्रेस के  तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल की भी हत्या कर दी। हमले में घायल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी सी शुक्ल का कुछ दिनों बाद निधन हो गया।

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