दुबई से इज़राइल जा रही फ्लाई दुबई की एक उड़ान में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब कॉकपिट में कैप्टन स्मित मच्छार पर कथित तौर पर चाकू से हमला किया जा रहा था। विमान में मौजूद ज्यादातर यात्रियों को उस वक्त तक इस घटना की जानकारी नहीं थी। लेकिन एक छोटी बच्ची की सतर्कता ने पूरे घटनाक्रम में अहम भूमिका निभाई।
इस बच्ची का नाम है नीना। नीना बाथरूम गई थी। इसी दौरान उसे कॉकपिट की तरफ से चीखने की आवाजें सुनाई दीं। उसने स्थिति को गंभीर समझा और बिना समय गंवाए अपनी मां को जगाने पहुंच गई। नीना ने अपनी मां से कॉकपिट की तरफ जाने को कहा। मां ने जब वहां पहुंचकर स्थिति देखी तो उन्होंने यात्रियों को बताया कि कैप्टन पर चाकू से हमला किया जा रहा है।
हर सेकंड था बेहद अहम
नीना की सूचना के बाद तीन लोग घायल कैप्टन की मदद के लिए आगे आए। ऐसे वक्त में जब विमान के भीतर मौजूद यात्रियों को घटना की पूरी जानकारी नहीं थी, एक बच्ची ने आवाजें सुनकर खतरे को पहचाना और अपनी मां को तुरंत इसकी जानकारी दी। नीना ने न तो स्थिति को नजरअंदाज किया और न ही डरकर चुप रही। उसने जो सुना, उसे गंभीरता से लिया और मदद पहुंचाने की दिशा में पहला कदम उठाया।
किसी विमान के कॉकपिट में पायलट पर हमला जैसी घटना बेहद गंभीर होती है। ऐसे में शुरुआती कुछ सेकंड भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। नीना की सतर्कता ने कथित तौर पर उस वक्त मदद पहुंचाने का रास्ता खोला, जब बाकी यात्रियों को घटना की जानकारी तक नहीं थी।
छोटी उम्र, बड़ा साहस
नीना की कहानी इसलिए खास है क्योंकि बहादुरी हमेशा उम्र की मोहताज नहीं होती। कभी-कभी खतरे के बीच सही बात को पहचानना और तुरंत किसी बड़े को बताना भी बहुत बड़ा साहस होता है। एक छोटी बच्ची ने सिर्फ कुछ आवाजें सुनीं, खतरे को महसूस किया और अपनी मां को जगाया। इसके बाद मदद के लिए लोग आगे आए। नीना ने कोई बड़ा भाषण नहीं दिया, कोई जोखिम भरा कदम नहीं उठाया—उसने सिर्फ सही वक्त पर सही बात बताई। और कभी-कभी किसी की जान बचाने के लिए इतना ही काफी होता है।