1986 में नीरजा, 2026 में स्मित मच्छार …जब इंसानियत…खतरे में हो तो भारतीय ही आगे आता है
30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाई दुबई की फ्लाइट FZ1073 में 180 यात्रियों की जान पर बन आई। फ्लाइट 34 हजार फीट पर थी, तभी ओमानी को-पायलट ने कॉकपिट में ही भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार
पर चाकू से हमला कर दिया और प्लेन को इजरायल में क्रैश कराने की कोशिश की। हमले में विमान 30 सेकेंड में 14,000 फीट नीचे गिर गया, उसने 7700 (इमरजेंसी) और 7500 (हाईजैक) कोड भी भेजा।खून से लथपथ होने के बाद भी कैप्टन स्मित ने हिम्मत नहीं हारी, कॉकपिट का दरवाजा खोला ताकि यात्री और क्रू अंदर आ सकें। यात्रियों ने हेडफोन के तार से हमलावर को बांधा और प्लेन को सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंड कराया गया।
कौन हैं कैप्टन स्मित मच्छार ?
गुजरात के रहने वाले, मुंबई से हैं SpiceJet में 11 साल काम किया, 9500 घंटे से ज्यादा उड़ान, सीनियर कमांडर और लाइन ट्रेनिंग कैप्टन रहेजून 2022 से Fly Dubai में डायरेक्ट एंट्री कैप्टन, Boeing 737-800 और MAX पर 9750 घंटे का अनुभव से कनेक्शन क्यों जोड़ा जा रहा है?
1986: नीरजा भनोट
पैन एम फ्लाइट 73, कराची में हाइजैक हुई, नीरजा ने 360 यात्रियों को बचाने के लिए जान दे दी।
2026: स्मित मच्छार
भारत ने हमेशा किया आतंकवाद का विरोध
ठीक 40 साल बाद एक और भारतीय ने कॉकपिट में चाकू खाकर भी 180 जानें बचा लीं।इसीलिए सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल है – “जब इंसानियत खतरे में होती है, तो भारतीय आगे आते हैं। भारतीय मूल के पायलट स्मित मच्छार की बहादुरी की चर्चा इन दिनों देश-दुनिया में हो रही है। मुश्किल हालात में जिस साहस, सूझबूझ और जिम्मेदारी का परिचय उन्होंने दिया, उसने एक बार फिर भारतीय जांबाजों की काबिलियत को सामने रखा है। स्मित की कहानी सिर्फ एक पायलट की बहादुरी तक सीमित नहीं है। यह उस सोच को भी सामने रखती है, जिसके तहत भारत लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग और कड़ी कार्रवाई की वकालत करता रहा है। भारत का आतंकवाद के खिलाफ रुख लगातार स्पष्ट रहा है।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद को किसी भी रूप में स्वीकार न करने और आतंक के नेटवर्क के खिलाफ देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है। ऐसे में स्मित मच्छार का साहस भारतीयों के लिए गर्व का विषय बन गया है। उनके हौसले ने यह संदेश दिया कि चुनौती कितनी भी बड़ी हो, साहस, कर्तव्य और देश के प्रति जिम्मेदारी सबसे ऊपर होती है। स्मित की बहादुरी ने यह भी दिखाया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सरकारों या सुरक्षा एजेंसियों की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है। भारत आतंकवाद के खिलाफ कल भी खड़ा था, आज भी खड़ा है और आगे भी मजबूती से खड़ा रहेगा।