चमत्कारिक बाबा या जमीन का खेल?…22 एकड़ सरकारी जमीन पर थी बाबा की नजर…जानें कैसे खुली पोल

Baba Ajay Pal

चमत्कारिक बाबा या जमीन का खेल?

छतरपुर के कथित चमत्कारिक बाबा अजयपार बाबा उर्फ करण कुशवाहा को लेकर सामने आए कथित स्टिंग ऑपरेशन ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्टिंग में हुई बातचीत को आधार बनाकर दावा किया जा रहा है कि बाबा की नजर हाईवे से लगी 22 एकड़ सरकारी जमीन पर थी और दरबार बढ़ने के साथ उस जमीन पर धीरे-धीरे कब्जा करने की योजना बनाई जा रही थी।

22 एकड़ जमीन पर नजर?

स्टिंग में कथित तौर पर बाबा से जुड़ी बातचीत में हाईवे के पास मौजूद सरकारी जमीन का जिक्र है। आरोप है कि दरबार के विस्तार के साथ वहां गोशाला बनाने और धीरे-धीरे जमीन अपने कब्जे में लेने की योजना की बात कही गई। अगर स्टिंग में सामने आई बातचीत की पुष्टि होती है, तो मामला सिर्फ किसी बाबा के दावे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी जमीन की सुरक्षा और प्रशासनिक कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल खड़े होंगे।

चमत्कार पर भी सवाल

बाबा को लेकर एक और दावा सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्टिंग के दौरान कथित बातचीत में उनकी धार्मिक और आध्यात्मिक जानकारी को लेकर सवाल उठे। दावा है कि वे मंत्र, राम स्तुति और हनुमान चालीसा से जुड़े सामान्य धार्मिक पाठ तक ठीक से नहीं बता सके। यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस शख्स की पहचान चमत्कारिक बाबा के तौर पर बनाई गई, क्या उसके दावों की कोई स्वतंत्र और तथ्यात्मक पुष्टि हुई है?

अफसरों पर प्रभाव का दावा

स्टिंग में बाबा द्वारा कथित तौर पर एसपी, कलेक्टर और आईजी स्तर के अधिकारियों पर प्रभाव होने की बात कहे जाने का भी दावा किया गया है। यदि ऐसा बयान वास्तव में रिकॉर्डिंग में मौजूद है, तो प्रशासन के लिए इसकी स्वतंत्र जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि, स्टिंग में कही गई बातों को अपने आप में आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं माना जा सकता। संबंधित अधिकारियों, राजस्व रिकॉर्ड और जमीन की वास्तविक स्थिति की आधिकारिक जांच से ही तस्वीर साफ होगी।

बाबा, जमीन और रसूख का कनेक्शन?

इस पूरे मामले में तीन कड़ियां सबसे ज्यादा चर्चा में हैं—आध्यात्मिक दावों की विश्वसनीयता, सरकारी जमीन और प्रशासनिक पहुंच का कथित दावा। अब जांच का असली सवाल यह होगा कि 22 एकड़ जमीन की मौजूदा स्थिति क्या है, उसका स्वामित्व किस विभाग के पास है, वहां कोई निर्माण या कब्जा हुआ है या नहीं और बाबा के खिलाफ सामने आए आरोपों में कितनी सच्चाई है। क्योंकि आस्था व्यक्तिगत विश्वास का विषय हो सकती है, लेकिन सरकारी जमीन पर अधिकार का फैसला सिर्फ कानून और राजस्व रिकॉर्ड से होता है।

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