आंकड़ों में बंगाल’—15 साल का रिपोर्ट कार्ड, कहां मजबूत ममता सरकार और कहां चुनौती बरकरार?

Bengal 15 Year Report Card

आंकड़ों में बंगाल’—15 साल का रिपोर्ट कार्ड, कहां मजबूत ममता सरकार और कहां चुनौती बरकरार?

शिक्षा में ढांचा बड़ा, गुणवत्ता पर सवाल | स्वास्थ्य में खर्च बढ़ा, सिस्टम अब भी अस्थिर | रोजगार और GDP में मिश्रित तस्वीर

पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच अब सियासत सिर्फ नारों तक सीमित नहीं रही, बल्कि आंकड़ों के जरिए सरकार के कामकाज का आकलन भी तेज हो गया है। पिछले 15 सालों से सत्ता में रही ममता बनर्जी सरकार का ‘आर्थिक रिपोर्ट कार्ड’ कई ऐसे सच सामने लाता है, जो तस्वीर को पूरी तरह काला या सफेद नहीं बल्कि ‘मिश्रित’ बनाते हैं।

शिक्षा: स्कूल तो बहुत, आगे की पढ़ाई में कमी

पश्चिम बंगाल में स्कूलों की संख्या 93 हजार से ज्यादा है, जिसमें करीब 79% प्राइमरी स्कूल हैं। पहली नजर में यह आंकड़ा मजबूत लगता है, लेकिन जैसे ही सेकेंड्री और हायर सेकेंड्री स्तर पर नजर जाती है, तस्वीर कमजोर दिखती है।

सबसे बड़ी चिंता ड्रॉपआउट को लेकर है। माध्यमिक स्तर पर यह 2020-21 में 13.26% से बढ़कर 2024-25 में 20% तक पहुंच गया। साफ है कि पांचवीं के बाद शिक्षा व्यवस्था लड़खड़ा रही है।

स्वास्थ्य: खर्च बढ़ा, लेकिन सिस्टम में उतार-चढ़ाव

ममता सरकार ने स्वास्थ्य पर खर्च लगातार बढ़ाया है—

सरकारी अस्पतालों में बेड की संख्या भी 71 हजार से बढ़कर 97 हजार हो गई, जो सकारात्मक संकेत है।

लेकिन डॉक्टरों की संख्या में भारी अस्थिरता चिंता बढ़ाती है। कभी अचानक गिरावट, तो कभी उछाल—यह बताता है कि स्वास्थ्य ढांचा अभी भी संतुलित नहीं हो पाया है।

रोजगार: युवाओं के सामने चुनौती

रोजगार के मोर्चे पर तस्वीर थोड़ी मुश्किल दिखती है।

शहरी इलाकों में बेरोजगारी 13.9% तक पहुंच चुकी है।
चौंकाने वाली बात यह है कि ग्रेजुएट और डिप्लोमा धारक भी बड़ी संख्या में बेरोजगार हैं—खासकर महिलाओं में यह आंकड़ा और ज्यादा है।

GDP और निवेश: घटती हिस्सेदारी का संकेत

कभी देश की GDP में 10.5% हिस्सेदारी रखने वाला पश्चिम बंगाल अब 5.6% पर सिमट गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिकीकरण की रफ्तार धीमी होने से राज्य की आर्थिक ताकत प्रभावित हुई है।

हालांकि, गरीबी के मोर्चे पर कुछ राहत मिली है—

कुल मिलाकर तस्वीर क्या कहती है?

पश्चिम बंगाल का यह 15 साल का रिपोर्ट कार्ड साफ करता है कि—

ममता बनर्जी सरकार के 15 सालों का यह लेखा-जोखा बताता है कि बंगाल ने कई मोर्चों पर प्रगति की है, लेकिन चुनौतियां अब भी कम नहीं हैं। चुनावी माहौल में ये आंकड़े सिर्फ बहस का हिस्सा नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाले संकेत बन सकते हैं।

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