तमिलनाडु की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव के बाद अब सबसे बड़ी चर्चा नई सरकार के चुनावी वादों और राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर हो रही है। Vijay के नेतृत्व वाली Tamilaga Vettri Kazhagam सरकार के सत्ता संभालते ही राज्य में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद विजय ने तीन बड़े फैसलों का ऐलान किया, लेकिन उनके “खाली ख़ज़ाने” वाले बयान ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया है।
मुख्यमंत्री बनते ही मुफ्त बिजली ड्रग्स कंट्रोल और महिला सुरक्षा पर बड़े फैसले कर्ज़ और खाली ख़ज़ाने वाले बयान पर स्टालिन और विपक्ष ने घेरा
10 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद विजय ने अपने पहले आदेशों में दो महीने में 500 यूनिट से कम बिजली इस्तेमाल करने वाले परिवारों के लिए 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा की। इसके अलावा हर जिले में ड्रग्स पर नियंत्रण के लिए विशेष बल बनाने और महिलाओं की सुरक्षा के लिए “लायन वुमन टास्क फोर्स” गठित करने का भी ऐलान किया गया। इन घोषणाओं को टीवीके सरकार की आक्रामक शुरुआत माना जा रहा है। हालांकि शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री विजय का वह बयान ज्यादा चर्चा में आ गया, जिसमें उन्होंने कहा कि पिछली सरकार राज्य का ख़ज़ाना खाली करके गई है और नई सरकार को भारी आर्थिक बोझ के बीच काम शुरू करना पड़ रहा है।
“ख़ज़ाना खाली” बयान पर सियासी संग्राम
मुख्यमंत्री विजय ने अपने पहले संबोधन में कहा, “पिछली सरकार ऐसा बोझ छोड़ गई है, जिसे संभालना आसान नहीं है। वास्तविक स्थिति समझने के बाद ही साफ होगा कि क्या है और क्या नहीं। मेरा मानना है कि राज्य की वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र जारी होना चाहिए।” इस बयान के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और Dravida Munnetra Kazhagam नेता M. K. Stalin ने तीखी प्रतिक्रिया दी। स्टालिन ने कहा कि सत्ता में आते ही यह कहना शुरू न कर दिया जाए कि सरकार के पास पैसा नहीं है। उन्होंने दावा किया कि डीएमके सरकार ने कोविड, बाढ़ और केंद्र सरकार से जुड़े आर्थिक दबावों के बावजूद कई कल्याणकारी योजनाएं सफलतापूर्वक लागू की थीं। स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि फरवरी में पेश किए गए बजट में राज्य की वित्तीय स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी गई थी। उन्होंने विजय से सवाल पूछा कि अगर उन्हें राज्य की आर्थिक स्थिति का पता था, तो फिर इतने बड़े चुनावी वादे क्यों किए गए।
विपक्ष भी सरकार पर हमलावर
केवल डीएमके ही नहीं, बल्कि अन्य विपक्षी दलों ने भी विजय सरकार के बयानों और वादों पर सवाल उठाए हैं। Thol. Thirumavalavan ने कहा कि केवल यह कहना कि तमिलनाडु पर 10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज़ है, लोगों के बीच भ्रम पैदा करेगा। उनका कहना है कि राज्य की वित्तीय स्थिति को राजनीतिक बयानबाजी के बजाय तथ्यात्मक तरीके से प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय ने जनता के बीच बदलाव की उम्मीद पैदा करके सत्ता हासिल की है, लेकिन अब उन्हें उन वादों को जमीन पर उतारने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा। मुफ्त बिजली, महिला सुरक्षा और ड्रग्स कंट्रोल जैसे फैसले लोकप्रिय तो हैं, लेकिन इनके लिए बड़े वित्तीय संसाधनों की जरूरत होगी।
क्या सच में आर्थिक संकट में है तमिलनाडु?
अर्थशास्त्रियों के अनुसार तमिलनाडु की आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन इसे “खाली ख़ज़ाना” कहना अतिशयोक्ति हो सकती है। अर्थशास्त्री कृष्णमूर्ति प्रभाकरण का कहना है कि राज्य की वित्तीय हालत उतनी खराब नहीं है, जितनी पेश की जा रही है। उनके मुताबिक तमिलनाडु का कर्ज़ अब भी सकल राज्य घरेलू उत्पाद यानी जीएसडीपी की निर्धारित सीमा के भीतर है। हालांकि लगातार बढ़ता ब्याज भुगतान, बिजली बोर्ड का घाटा, वेतन-पेंशन का खर्च और कल्याणकारी योजनाओं का दबाव सरकार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि तमिलनाडु लंबे समय से कल्याणकारी राजनीति का केंद्र रहा है। यहां मुफ्त योजनाओं और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों की मजबूत परंपरा रही है। लेकिन नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह लोकप्रिय घोषणाओं और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन कैसे बनाए।
विजय के सामने सबसे बड़ी परीक्षा
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि अभिनेता से नेता बने विजय के लिए अब असली परीक्षा शुरू हो चुकी है। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने भ्रष्टाचार मुक्त शासन, युवाओं को रोजगार, महिला सुरक्षा और आर्थिक सुधारों का वादा किया था। जनता ने उन्हें बड़ी उम्मीदों के साथ सत्ता सौंपी है। लेकिन अब सरकार को यह साबित करना होगा कि वह केवल बड़े वादे करने वाली सरकार नहीं, बल्कि उन्हें लागू करने में सक्षम प्रशासन भी है। खासतौर पर मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं का असर राज्य के राजस्व और बिजली वितरण कंपनियों पर पड़ सकता है।
नई राजनीति या बढ़ता जोखिम?
तमिलनाडु की राजनीति में पिछले छह दशकों से दो बड़े दलों का दबदबा रहा है। ऐसे में टीवीके का सत्ता तक पहुंचना अपने आप में बड़ा राजनीतिक बदलाव माना जा रहा है। विजय ने युवाओं और शहरी मतदाताओं के बीच बड़ी लोकप्रियता हासिल की, लेकिन अब उन्हें प्रशासनिक अनुभव की कमी और आर्थिक चुनौतियों जैसी वास्तविक समस्याओं से जूझना होगा। फिलहाल राज्य की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विजय सरकार अपने बड़े चुनावी वादों को पूरा कर पाएगी, या फिर आर्थिक दबाव और राजनीतिक विरोध उसकी राह मुश्किल बना देंगे। आने वाले महीनों में तमिलनाडु की आर्थिक नीतियां और सरकार के फैसले इस सवाल का जवाब तय करेंगे।