आर्युवेद के जरिए पाएं हेल्दी एजिंग, डॉ. झा ने पेइचिंग में दिया लेक्चर

Achieve healthy aging through Ayurveda: Dr Jha

आर्युवेद के जरिए पाएं हेल्दी एजिंग, डॉ. झा ने पेइचिंग में दिया लेक्चर
आयुर्वेद के जरिए हेल्दी एजिंग पाएं विषय पर 13 अगस्त को पेइचिंग में एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। जिसमें भारत से आए जाने-माने आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. धनवंतरी झा ने वहां मौजूद चीनी और भारतीय लोगों को आयुर्वेद के महत्व, उसके प्रभाव और हेल्दी एजिंग के बारे में विस्तार से बताया। साथ ही लंबी उम्र के लिए आयुर्वेद के समग्र दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला।
भारतीय दूतावास में हुए कार्यक्रम में डॉ. झा ने आयुर्वेद के बारे में लोगों की जिज्ञासा को शांत करते हुए रसायन (कायाकल्प), पोषण, जोड़ों व दिमाग की सेहत, नींद, रोग प्रतिरोधक क्षमता, अंदरूनी सुंदरता और सूजन-रोधी जीवनशैली पर व्यापक जानकारी दी। अपने लेक्चर में उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि स्वस्थ बुढ़ापे का मतलब सिर्फ़ उम्र बढ़ाना नहीं है, बल्कि सही खान-पान, जीवनशैली, शारीरिक गतिविधि, नींद, मानसिक स्वास्थ्य और कायाकल्प करने वाली प्रक्रियाओं के ज़रिए ताकत हासिल करना है। साथ ही आत्मनिर्भरता, मानसिक स्पष्टता, जीवन-शक्ति और जीवन की गुणवत्ता को बनाए रखना है।
उन्होंने कहा कि हम लोग अपने खान-पान, रहन-सहन व मानसिक शांति से बहुत हद तक खुद को स्वस्थ रख सकते हैं। क्या एजिंग कोई बीमारी है, या एजिंग के बारे में कुछ ऐसा विशेष है कि हम उससे डरते हैं। इस पर उन्होंने कहा कि उम्र का बढ़ना सामान्य है, मसलन एक साल का छोटा बच्चा भी धीरे-धीरे बड़ा होगा। ऐसे में एजिंग एक प्रोसेस है, इसका मतलब है आप बढ़ रहे हैं, आपका शरीर विकसित हो रहा है। यह एक चरण में बढ़ता है, एक चरण में स्थिर होता है, और आखिर में उसका क्षय होने लगता है।
हालांकि एजिंग (बुढ़ापे) और उम्र बढ़ने को कोई नहीं रोक सकता है, लेकिन उसकी गति को धीमा किया जा सकता है। इसके लिए हमें अपनी जीवनशैली, खाने की आदतों और नींद आदि के समय का विशेष ध्यान रखना होगा। लेकिन अलग-अलग लोगों के शरीर की स्थिति और संरचना अलग-अलग होती है। इसलिए एजिंग की प्रोसेस भी सब में एक नहीं होती। कुछ लोग 50 साल की उम्र में भी कम उम्र के लगते हैं, जबकि कुछ लोग अपनी उम्र से अधिक के दिखते हैं।
बकौल डॉ. झा, आयुर्वेद हमें बुढ़ापे से लड़ने के लिए नहीं कहता, यह हमें बुढ़ापे को समझने, उसके अनुसार ढलने और उसके साथ सामंजस्य बिठाकर जीने की सीख देता है।
बता दें कि आयुर्वेद में बीमारी का इलाज करने से पहले हेल्थ को प्रिजर्व रखना ज्यादा जरूरी माना जाता है। स्वस्थ और अच्छे स्वास्थ्य के लिए बेहतर पाचन शक्ति, ऊतकों की संपूर्णता और सिस्टमेटिक बैलेंस बनाना अहम होता है। इसके साथ ही मजबूत मानसिक स्थिति, मनोवैज्ञानिक शांति और इंद्रियां (सेंसेज) भी एजिंग और अच्छी हेल्थ में बड़ा रोल निभाती हैं।
कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंची केतकी ठाकर ने चाइना मीडिया ग्रुप (CMG) के अधीन चाइना ग्लोबल टेलीविज़न नेटवर्क (CGTN) को बताया कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ हम लोग कई बीमारियों से घिरने लगते हैं, इनके इलाज के लिए आयुर्वेद एक अच्छा उपाय है। हमें आयुर्वेद में बतायी बातों का अनुसरण करना चाहिए।
वहीं भारतीय रेस्टोरेंट बॉलीवुड टेल्स के मालिक अजीत खान ने सीजीटीएन संवाददाता अनिल पांडेय के साथ बातचीत में भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इसके जरिए हमें अपने जीवन को स्वस्थ और संतुलित बनाने के बारे में जानकारी मिली। आज की तेज रफ्तार लाइफ में हमारे पास अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखने का समय नहीं होता। लेकिन आयुर्वेद के जरिए हेल्दी एजिंग विषय पर हुए लेक्चर से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला।
इससे पहले डा. धनवंतरी झा ने कहा कि आयुर्वेद में जीवन के तीन चरण बताए गए हैं। पहला बालपन होता है, चरकसंमहिता के मुताबिक यह अवधि जन्म से 30 वर्ष की आयु तक होती है। यह शरीर के ग्रोथ का पीरियड होता है। इस दौरान शारीरिक और मानसिक रूप से कई तरह का विकास शरीर में हो रहा होता है। जबकि तीस साल से साठ साल की उम्र के काल को मध्यमा अवस्था कहते हैं। इस अवधि में शरीर में प्राकृतिक रूप से ही पित्त दोष या अग्नि ऊर्जा हावी रहती है। इस दौरान आप अपने को समझने, स्थिर और परिपक्व बनाने में लगे रहते हैं। जबकि 60 साल के बाद की अवधि होती है, जब आपका शरीर कमज़ोर होने लगता है, आप बूढ़े होने लगते हैं, चेतना कम होने लगती है। अकसर हम इस दौर के लिए चिंतित रहते हैं। क्योंकि साठ साल तक हम अपने शरीर को बेहतर स्थिति में देखा होता है। लेकिन इसके बाद अचानक आपका दिमाग, शरीर कमजोर होने लगता है। लेकिन आयुर्वेद के जरिए स्वस्थ बुढ़ापा हासिल करना संभव है।
कहा जा सकता है कि इस कार्यक्रम के जरिए चीनी और भारतीय दर्शकों के सामने आयुर्वेद के सिद्धांतों को अच्छी तरह से पेश किया गया। साथ ही आयुर्वेद, योग व समग्र स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत-चीन के बीच बढ़ते आदान-प्रदान को और मज़बूत करने का अवसर प्रदान किया गया।
(प्रस्तुति- अनिल पांडेय, चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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