UPSC के 100 साल, अब नई परीक्षा भविष्य की!…

100 years of UPSC now a new exam for the future

देश की सबसे महत्वपूर्ण भर्ती संस्थाओं में शामिल संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC आज 100 साल का हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में शताब्दी समारोह में शामिल हुए। सभा को संबोधित किया। इस मौके पर स्मारक सिक्का, डाक टिकट और UPSC से जुड़े 100 ऐतिहासिक फैसलों पर आधारित पुस्तक जारी की।

1926 से 2026 तक सफर

UPSC की शुरुआत 1 अक्टूबर 1926 को पब्लिक सर्विस कमीशन के रूप में हुई थी। आजादी के बाद इसकी भूमिका और बढ़ी और संविधान के अनुच्छेद 320 के तहत संघ की सेवाओं में भर्ती के लिए परीक्षाएं आयोजित करना इसका प्रमुख दायित्व बना। यानी IAS, IPS और केंद्र की दूसरी महत्वपूर्ण सेवाओं में जाने वाले लाखों युवाओं के लिए UPSC सिर्फ एक परीक्षा कराने वाली संस्था नहीं, बल्कि देश की प्रशासनिक व्यवस्था में प्रतिभा चुनने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

अब अगली चुनौती पर मंथन

शताब्दी समारोह का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सिर्फ 100 साल पूरे करना नहीं, बल्कि अगले 100 साल की तैयारी है। 30 सितंबर को शुरू हुए दो दिवसीय कार्यक्रम में प्रशासन में बदलाव, तकनीक और भविष्य की सिविल सेवाओं जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। UPSC अध्यक्ष ने अगले दौर के लिए विश्वास, पारदर्शिता और तकनीक को महत्वपूर्ण आधार बताया।

युवाओं के सपनों से जुड़ी संस्था

हर साल देशभर के लाखों युवा UPSC की परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में आयोग के सामने चुनौती है कि बदलते भारत की जरूरतों के मुताबिक चयन प्रक्रिया को और पारदर्शी, आधुनिक और प्रभावी बनाया जाए। 100 साल की विरासत अब 100 साल के भविष्य की जिम्मेदारी में बदल रही है—जहां सवाल सिर्फ अधिकारी चुनने का नहीं, बल्कि बदलते भारत के लिए सही नेतृत्व तैयार करने का भी है।

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