मध्य प्रदेश में कृषक कल्याण वर्ष के तहत खेती को पारंपरिक तरीके से आगे बढ़ाकर तकनीक, सिंचाई और खाद्य प्रसंस्करण से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उमरिया के बलराम कृषि महोत्सव को वर्चुअली संबोधित करते हुए किसानों की आय बढ़ाने के लिए नई कृषि तकनीक अपनाने की जरूरत बताई।
खेत से बाजार तक बदलेगी तस्वीर
उमरिया जैसे कृषि प्रधान जिले में किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ उत्पादन नहीं, बल्कि उपज का बेहतर मूल्य हासिल करना भी है। सरकार खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देकर खेती को बाजार से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने जिले में जल्द बड़ी फूड प्रोसेसिंग यूनिट शुरू होने की जानकारी दी। इससे स्थानीय उपज के प्रसंस्करण के साथ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।
सिंचाई और बिजली पर फोकस
मुख्यमंत्री ने हर गांव और हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचाने के संकल्प को दोहराया। साथ ही किसानों को धान और श्रीअन्न के उपार्जन के लिए समय पर पंजीयन कराने की अपील की, ताकि उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके। इसी सीजन से किसानों को दिन में 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की बात भी कही गई है।
किसान बनेगा सिर्फ उत्पादक नहीं, उद्यमी
गोपालन, दुग्ध उत्पादन, उद्यानिकी, खाद्य प्रसंस्करण और जैविक-प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का मकसद खेती को अतिरिक्त आय से जोड़ना है। कस्टम हायरिंग सेंटर, सोलर पंप और दुग्ध समितियां किसानों को आधुनिक कृषि व्यवस्था से जोड़ सकती हैं।
स्वामित्व से आर्थिक ताकत
सेवा संकल्प अभियान के तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में संपत्ति की नि:शुल्क रजिस्ट्री का लाभ देने की बात भी सामने आई है। संपत्ति का वैध दस्तावेज मिलने से पात्र हितग्राही बैंक ऋण जैसी सुविधाओं के लिए उसका इस्तेमाल कर सकेंगे। यानी सरकार का फोकस सिर्फ खेत में उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि किसान की उपज से लेकर बाजार और प्रसंस्करण तक पूरी श्रृंखला मजबूत करने पर है। उमरिया में प्रस्तावित फूड प्रोसेसिंग यूनिट इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।