गरीब परिवार की बेटियों के लिए मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना बनी सहारा
लखनऊ। Yogi Adityanath के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं लगातार जरूरतमंद लोगों तक पहुंच रही हैं। इन्हीं योजनाओं में से एक है मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, जिसने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह को आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पिछले नौ वर्षों में इस योजना के तहत 5.54 लाख से अधिक गरीब बेटियों की शादी कराई जा चुकी है।
सभी वर्गों के जरूरतमंद परिवारों को लाभ
समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित यह योजना अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), सामान्य वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए संचालित की जा रही है। सरकार का दावा है कि योजना का लाभ जाति या धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि पात्रता के आधार पर दिया जा रहा है।
ओबीसी वर्ग के 1.80 लाख से अधिक जोड़ों का हुआ विवाह
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले नौ वर्षों में अकेले ओबीसी वर्ग के 1,80,017 जोड़ों का विवाह मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत संपन्न कराया गया है। वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 26,286 ओबीसी जोड़े इस योजना का लाभ प्राप्त कर चुके हैं।
कुल मिलाकर योगी सरकार के कार्यकाल में 5,54,202 गरीब बेटियों की शादी इस योजना के माध्यम से कराई गई है।
प्रत्येक जोड़े पर सरकार खर्च कर रही 1 लाख रुपये
योजना के तहत अब प्रत्येक जोड़े पर कुल 1 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा नवविवाहिता को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का है।
- 60,000 रुपये सीधे वधू के बैंक खाते में डीबीटी (DBT) के माध्यम से भेजे जाते हैं।
- 25,000 रुपये मूल्य का गृहस्थी का सामान और आभूषण दिए जाते हैं।
- 15,000 रुपये विवाह समारोह के आयोजन पर खर्च किए जाते हैं।
इस व्यवस्था का उद्देश्य नवविवाहित दंपती को नए जीवन की शुरुआत में आर्थिक सहयोग प्रदान करना है।
समाज कल्याण विभाग निभा रहा अहम भूमिका
योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी समाज कल्याण विभाग के पास है। विभाग लाभार्थियों का सत्यापन करने के बाद सामूहिक विवाह समारोह आयोजित करता है। विवाह समारोह में टेंट, पंडाल, सजावट, भोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं प्रशासन की ओर से की जाती हैं, जिससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ता।
आर्थिक तंगी नहीं बनेगी बेटियों की शादी में बाधा
सरकार का कहना है कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का उद्देश्य केवल विवाह संपन्न कराना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक अभाव किसी भी गरीब परिवार की बेटी के विवाह में बाधा न बने। योजना के माध्यम से सामाजिक समानता, आर्थिक सहयोग और सम्मानजनक विवाह की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
पारदर्शिता और डीबीटी पर जोर
योजना की सबसे बड़ी विशेषता प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली है। इससे लाभार्थियों के खाते में राशि सीधे पहुंचती है और बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है। सरकार का दावा है कि पारदर्शिता और जवाबदेही के कारण यह योजना गरीब परिवारों के बीच भरोसे का माध्यम बनी है।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना आज उत्तर प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में उभरकर सामने आई है, जिससे लाखों बेटियों को सम्मानपूर्वक नया जीवन शुरू करने का अवसर मिला है।





