उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई ऊंचाई देने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के प्रमुख तीर्थ, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के विकास के लिए 8 जिलों में 33 परियोजनाओं पर 79.18 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का दावा है कि यह केवल पर्यटन विकास की योजना नहीं, बल्कि ‘आस्था के साथ विकास’ की व्यापक रणनीति है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं को भी मजबूती देगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक पर्यटन का राष्ट्रीय केंद्र बनकर उभरा है। अयोध्या, काशी और मथुरा के बाद अब सरकार प्रदेश के अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों को भी विश्वस्तरीय सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
आस्था को विकास का आधार बना रही सरकार
योगी सरकार की नीति केवल धार्मिक स्थलों का सौंदर्यीकरण करने तक सीमित नहीं है। सरकार का उद्देश्य इन स्थलों को आर्थिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित करना भी है। पर्यटन एवं संस्कृति विभाग का मानना है कि धार्मिक पर्यटन के विस्तार से होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय बाजार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यही कारण है कि सरकार ‘टेंपल इकोनॉमी’ को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है, ताकि तीर्थस्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों का सीधा लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचे।
8 जिलों में 33 विकास परियोजनाएं
सरकार ने जिन जिलों को इस योजना में शामिल किया है, उनमें सीतापुर, लखनऊ, मिर्जापुर, चित्रकूट, बांदा, महोबा, सोनभद्र, हमीरपुर और भदोही प्रमुख हैं। परियोजनाओं के तहत मंदिर परिसरों का विकास, पर्यटक सुविधाओं का विस्तार, सड़क संपर्क बेहतर करना, पार्किंग, प्रकाश व्यवस्था, विश्राम स्थल, पेयजल और स्वच्छता जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। सरकार का मानना है कि बेहतर सुविधाएं मिलने से देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होगी।
नैमिषारण्य और चित्रकूट पर विशेष फोकस
सीतापुर स्थित नैमिषारण्य देश के सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में माना जाता है। यहां बेदारण्यम की स्थापना और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार के लिए विशेष बजट स्वीकृत किया गया है। वहीं भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट में छह बड़ी परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाएंगे। चित्रकूट को धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए सड़क, घाट, प्रकाश व्यवस्था और पर्यटक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। सरकार का मानना है कि चित्रकूट के विकास से बुंदेलखंड क्षेत्र में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
बुंदेलखंड को मिलेगा पर्यटन विकास का नया इंजन
लंबे समय से विकास की चुनौतियों का सामना कर रहे बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए यह योजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बांदा, चित्रकूट, महोबा और हमीरपुर में कई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के विस्तार से इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में आय के नए साधन मिल सकेंगे। इससे पलायन जैसी समस्याओं में भी कमी आ सकती है।
योगी सरकार का लक्ष्य: यूपी बने वैश्विक धार्मिक पर्यटन हब
पिछले कुछ वर्षों में अयोध्या में राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर और मथुरा-वृंदावन विकास परियोजनाओं ने उत्तर प्रदेश की पर्यटन छवि को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत किया है। अब सरकार दूसरे धार्मिक स्थलों को भी उसी मॉडल पर विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विजन उत्तर प्रदेश को देश ही नहीं बल्कि दुनिया के प्रमुख आध्यात्मिक और धार्मिक पर्यटन केंद्रों में शामिल करना है।
तेजी से चल रही टेंडर प्रक्रिया
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार अधिकांश परियोजनाओं के लिए निविदा प्रक्रिया तेज गति से चल रही है। संबंधित एजेंसियों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निर्माण के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने मार्च 2026 तक सभी परियोजनाएं पूरी करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए नियमित मॉनिटरिंग और प्रगति समीक्षा भी की जा रही है।
पर्यटन से रोजगार, रोजगार से विकास
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये परियोजनाएं तय समय पर पूरी हो जाती हैं तो उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन का नया अध्याय शुरू हो सकता है। इससे न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि लाखों लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। योगी सरकार की यह पहल इस बात का संकेत है कि उत्तर प्रदेश अब केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि आस्था आधारित आर्थिक विकास का भी मॉडल बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।





