चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो ने 28 अगस्त को एक बैठक की।
इसमें शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश के शिकाज़े शहर के चीलोंग जिले में हुए भारी भूस्खलन के बाद राहत
और बचाव कार्यों की समीक्षा की गई और आगे की व्यवस्था पर चर्चा हुई। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी
की केंद्रीय समिति के महासचिव और राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक की शुरुआत में शी चिनफिंग ने सभी प्रतिभागियों से खड़े होकर शीत्सांग के शिकाज़े शहर के
चीलोंग जिले में भूस्खलन आपदा में मारे गए लोगों के प्रति मौन श्रद्धांजलि अर्पित करने का
आग्रह किया।
बैठक में कहा गया कि नेपाल की ओर से आए भूस्खलन के कारण यह आपदा हुई, जिससे शीत्सांग
के शिकाज़े शहर के चीलोंग जिले में चीलोंग बंदरगाह पर बड़े पैमाने पर जनहानि हुई और कई लोग
लापता हैं। आपदा के बाद चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति ने इस पर बेहद गंभीरता से
ध्यान दिया। राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने तुरंत महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए और राहत, बचाव तथा
आपातकालीन प्रबंधन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। उनके निर्देश पर चीनी प्रधानमंत्री ली
छ्यांग ने आपदा प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर प्रभावित नागरिकों और राहत कर्मियों से मुलाकात की
तथा राहत और आपातकालीन प्रबंधन कार्यों का मार्गदर्शन किया। चीनी उप प्रधानमंत्री चांग
कुओछिंग ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर राहत कार्यों का निर्देशन किया।
पार्टी केंद्रीय समिति के मजबूत नेतृत्व और राज्य परिषद के कार्य समूह के मार्गदर्शन में शीत्सांग
स्वायत्त प्रदेश, आपातकालीन प्रबंधन मंत्रालय और संबंधित विभागों ने अग्निशमन एवं बचाव दलों
तथा चीन एनेंग आपातकालीन बचाव समूह जैसी पेशेवर टीमों के साथ तेजी से कार्रवाई की।
पीपुल्स लिबरेशन आर्मी और सशस्त्र पुलिस बलों ने आदेश मिलते ही कार्रवाई शुरू कर दी और
समय पर घटनास्थल पर पहुंचे। राहत और बचाव कार्य व्यवस्थित तरीके से जारी हैं। साथ ही,
प्रभावित नागरिकों के पुनर्वास और मृतकों के अंतिम संस्कार समेत अन्य संबंधित कार्य भी शुरू
कर दिए गए हैं।
बैठक में जोर देकर कहा गया कि यह आपदा ऊंचे पर्वतीय और ठंडे क्षेत्र में हुई है, जहां घाटियां खड़ी
हैं और मौसम तेजी से बदलता रहता है। आसपास अभी भी कई ग्लेशियर और हिमनदी झीलें हैं
तथा भूगर्भीय आपदाओं का खतरा भी बना हुआ है। ऐसे में राहत और बचाव कार्यों के सामने बड़ी
चुनौतियां हैं। सभी संबंधित पक्षों को लोगों और उनके जीवन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता
देते हुए ठोस, प्रभावी, वैज्ञानिक और कुशल तरीके से राहत कार्य आगे बढ़ाने चाहिए। खोज और
बचाव योजना वैज्ञानिक तरीके से तैयार की जानी चाहिए तथा चीन और विदेशों से लापता लोगों की
पूरी ताकत के साथ तलाश की जानी चाहिए। विभिन्न विभागों के बीच संयुक्त परामर्श को मजबूत
किया जाना चाहिए और निगरानी तथा चेतावनी व्यवस्था को बेहतर बनाया जाना चाहिए। बांध,
झील और आसपास की पहाड़ियों की स्थिरता पर कड़ी नजर रखते हुए द्वितीयक आपदाओं को
रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। घटनास्थल पर कर्मियों के प्रबंधन को मजबूत
किया जाना चाहिए और पूरे बचाव अभियान की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। प्रभावित
नागरिकों का उचित पुनर्वास किया जाना चाहिए। साथ ही, नेपाल के प्रभावित क्षेत्रों को
आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराने और अंतरराष्ट्रीय बचाव सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी
जोर दिया गया।
बैठक में कहा गया कि जोखिमों और खतरों की व्यापक जांच और सर्वेक्षण किया जाना चाहिए।
छिंगहाई-तिब्बत पठार के ग्लेशियरों और हिमनदी झीलों का तत्काल सर्वेक्षण किया जाए तथा
उनकी गतिशील निगरानी और चेतावनी व्यवस्था को मजबूत किया जाए। इसके साथ ही,
आपदाओं की श्रृंखला से जुड़े जोखिमों की पहचान करने की क्षमता में सुधार किया जाना चाहिए।
आपातकालीन प्रबंधन तंत्र को और बेहतर बनाने के साथ ऊपरी और निचली धारा वाले क्षेत्रों में
जोखिमों की निगरानी, चेतावनी और प्रतिक्रिया के बीच समन्वय मजबूत किया जाना चाहिए।
जोखिम वाले क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए स्थानांतरण मार्ग, पुनर्वास
स्थल और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं पहले से तैयार की जानी चाहिए।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)





