हर साल 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य
पर्यटन के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व के प्रति वैश्विक
जागरूकता बढ़ाना है। पर्यटन केवल किसी नई जगह को देखने का माध्यम नहीं
है, बल्कि यह अलग-अलग समाजों, संस्कृतियों और लोगों को एक-दूसरे को
समझने का अवसर भी देता है।
इसी संदर्भ में चीन की बदलती वीजा नीति अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के लिए एक
महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में सामने आई है। अगस्त 2026 तक चीन ने 50 देशों के
नागरिकों के लिए एकतरफा वीजा-मुक्त प्रवेश व्यवस्था लागू की है। इसके
अलावा, 57 देशों के नागरिकों के लिए 240 घंटे यानी 10 दिनों तक वीजा-मुक्त
ट्रांजिट की सुविधा है। इस सूची में अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया,
न्यूजीलैंड, जापान और दक्षिण कोरिया सहित कई देश शामिल हैं।
240 घंटे की ट्रांजिट व्यवस्था के तहत पात्र यात्री तीसरे देश या क्षेत्र की ओर यात्रा
करते समय चीन के निर्धारित 65 प्रवेश बंदरगाहों के जरिए प्रवेश कर सकते हैं
और निर्धारित क्षेत्रों में 10 दिनों तक पर्यटन, व्यापार, मुलाकात और अन्य
अनुमत गतिविधियां कर सकते हैं। हालांकि, काम, अध्ययन और समाचार
रिपोर्टिंग जैसी गतिविधियों के लिए संबंधित अनुमति और उचित वीजा की
आवश्यकता बनी रहती है।
इन व्यवस्थाओं ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए चीन की यात्रा को पहले की
तुलना में अधिक सुविधाजनक बनाया है। चीन के अधिकारियों के अनुसार, 2026
की पहली छमाही में 2.29 करोड़ विदेशी यात्रियों ने चीन का दौरा किया, जो पिछले
साल की समान अवधि से 20.4 प्रतिशत अधिक था; इनमें लगभग 78 प्रतिशत
यात्रियों ने वीजा-मुक्त व्यवस्था का इस्तेमाल किया।
मेरी पहली चीन यात्रा: किताबों और खबरों से आगे का अनुभव
मेरे लिए चीन को समझने का सबसे महत्वपूर्ण अनुभव अप्रैल 2026 में मेरी पहली
चीन यात्रा थी। एक पत्रकार के तौर पर मैंने चीन के बारे में वर्षों तक खबरों,
तस्वीरों और वीडियो के माध्यम से देखा-सुना था, लेकिन जमीन पर पहुंचकर
किसी देश को देखना बिल्कुल अलग अनुभव होता है।
इस यात्रा के दौरान मुझे चीन के अलग-अलग पहलुओं को करीब से देखने का
अवसर मिला। मैंने BYD की कार फैक्ट्री देखी, जहां नई ऊर्जा वाहनों के निर्माण की
प्रक्रिया को समझने का मौका मिला। इसके बाद आइसक्रीम फैक्ट्री की यात्रा ने
औद्योगिक उत्पादन के एक अलग पहलू से परिचित कराया।
नेशनल म्यूजियम ऑफ चाइना की यात्रा ने चीन के लंबे इतिहास और सभ्यता को
समझने का अवसर दिया। वहीं भविष्य की तकनीक को करीब से देखने के लिए
फ्लाइंग कार फैक्ट्री का दौरा मेरे लिए खास अनुभव रहा।
मेरी यात्रा केवल आधुनिक चीन तक सीमित नहीं थी। व्हाइट हॉर्स टेंपल, प्राचीन
बौद्ध गुफाओं में बनी बुद्ध की प्रतिमाएं और ऐतिहासिक विरासत ने चीन के
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक इतिहास की एक अलग तस्वीर सामने रखी।
और फिर आया हाई-स्पीड ट्रेन का सफर। तेज रफ्तार रेल नेटवर्क, आधुनिक
स्टेशन और शहरों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी ने चीन के बुनियादी ढांचे की एक
झलक दिखाई। ग्रेट वॉल ऑफ चाइना पर खड़े होकर इतिहास और आधुनिकता के
इस मेल को महसूस करना मेरी यात्रा के सबसे यादगार पलों में रहा।
इस यात्रा में एक और चीज जिसने मुझे विशेष रूप से प्रभावित किया, वह थी
रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। मैंने रोबोटिक्स से जुड़े ऐसे प्रदर्शन
देखे जिनमें रोबोट पॉपकॉर्न बनाने से लेकर बुजुर्गों और मरीजों की सहायता तक
के काम करते दिखाई दिए। इससे यह समझने का अवसर मिला कि चीन में
तकनीक को केवल फैक्ट्री या प्रयोगशाला तक सीमित रखने के बजाय रोजमर्रा
की जिंदगी से जोड़ने पर भी काम हो रहा है। मैं बार-बार चीन जाना चाहता हूँ ताकि
मुझे यहाँ की संस्कृति, सभ्यता, परम्परा और भविष्य के प्रति अपनी सोच को
समझने में सहायता मिल सके और मैं भी यहाँ से कुछ सीख सकूँ और अपने
जीवन में भी कुछ नया करने की कोशिश करूँ। किसी देश की असली तस्वीर
केवल उसके प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों से नहीं मिलती। स्थानीय बाजारों में घूमना,
लोगों को देखना, स्थानीय भोजन का स्वाद लेना, सार्वजनिक परिवहन का
इस्तेमाल करना और रोजमर्रा की जिंदगी को करीब से देखना भी यात्रा का
महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यही वजह है कि आसान वीजा व्यवस्था केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने तक
सीमित नहीं रहती। इससे स्वतंत्र यात्राओं, छोटे शहरों की यात्राओं और स्थानीय
संस्कृति को करीब से अनुभव करने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। चीन की ओर
विदेशी पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही के साथ यह बदलाव पर्यटन व्यवसाय,
स्थानीय उपभोग और लोगों के बीच संवाद को भी प्रभावित कर रहा है।
मेरी अप्रैल 2026 की चीन यात्रा ने मेरे लिए एक महत्वपूर्ण बात स्पष्ट की—किसी
देश को समझने के लिए उसे दूर से देखने के बजाय वहां जाना, लोगों के बीच
समय बिताना और अपनी आंखों से देखना ज्यादा प्रभावी होता है।
विश्व पर्यटन दिवस पर चीन की आसान होती यात्रा व्यवस्था और मेरी पहली चीन
यात्रा को याद करते हुए यही कहा जा सकता है कि पर्यटन सिर्फ एक स्थान से
दूसरे स्थान तक जाने का नाम नहीं है। यह अनुभवों, संस्कृतियों और लोगों के
बीच दूरी कम करने का माध्यम भी है।
और जब यात्रा के रास्ते आसान होते हैं, तो दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के
लोगों के लिए एक-दूसरे को सीधे देखने, समझने और अनुभव करने के अवसर भी
बढ़ते हैं। पर्यटन सिर्फ घूमना नहीं, समझना भी है यही पर्यटन की सबसे बड़ी
ताकत है।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक—देवेंद्र सिंह)