ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लॉर्ड्स में मिली 6 विकेट की हार के साथ भारतीय महिला क्रिकेट टीम का टी20 वर्ल्ड कप 2026 अभियान समाप्त हो गया। सेमीफाइनल में जगह बनाने की उम्मीदों के साथ उतरी टीम इंडिया निर्णायक मुकाबले में जीत हासिल नहीं कर सकी और टूर्नामेंट से बाहर हो गई। इस हार के बाद अब टीम की रणनीति, कप्तानी और भविष्य को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। भारतीय टीम की पूर्व कप्तान डायना एडुल्जी ने भी टीम के नेतृत्व और ढांचे में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया है।
टी20 टीम को नए नेतृत्व की जरूरत बताई, बदलाव का दिया स्पष्ट संदेश
पूर्व भारतीय कप्तान डायना एडुल्जी का मानना है कि अब महिला क्रिकेट में भी नेतृत्व को नए नजरिए से देखने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि टी20 प्रारूप के लिए अलग कप्तान नियुक्त करने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, लगातार एक ही खिलाड़ी पर सभी प्रारूपों की जिम्मेदारी डालना लंबे समय में टीम के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है। उनका मानना है कि अलग प्रारूपों के लिए अलग नेतृत्व टीम को बेहतर परिणाम दिला सकता है।
हर खिलाड़ी तीनों फॉर्मेट नहीं संभाल सकता, फिटनेस पर पड़ रहा असर
एडुल्जी ने खिलाड़ियों की फिटनेस और फील्डिंग को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि लगातार तीनों प्रारूप खेलने से खिलाड़ियों पर अतिरिक्त दबाव बनता है, जिसका असर मैदान पर साफ दिखाई देता है। उन्होंने सुझाव दिया कि वनडे और टी20 टीम के लिए अलग कप्तान ही नहीं, बल्कि अलग कोचिंग संरचना पर भी विचार होना चाहिए। इससे खिलाड़ियों को बेहतर तैयारी और कार्यभार प्रबंधन में मदद मिलेगी।
धोनी की तरह साहसिक फैसला लेने का दिया उदाहरण
पूर्व कप्तान ने वर्ष 2007 का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह भारतीय क्रिकेट ने उस समय युवा खिलाड़ी को नेतृत्व सौंपकर बड़ा बदलाव किया था, उसी तरह महिला क्रिकेट में भी भविष्य को ध्यान में रखते हुए नए चेहरे को अवसर देना चाहिए। उनका मानना है कि समय पर लिए गए साहसिक फैसले टीम के प्रदर्शन और मानसिकता दोनों में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
घरेलू क्रिकेट और युवा खिलाड़ियों को मजबूत करने पर दिया जोर
डायना एडुल्जी ने कहा कि बीसीसीआई को टी20 प्रारूप के लिए आक्रामक बल्लेबाजों और तेज गेंदबाजों को तैयार करने की विशेष योजना बनानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएं और राष्ट्रीय टीम की खिलाड़ियों के लिए घरेलू क्रिकेट खेलना भी अनिवार्य किया जाए। उनका मानना है कि इससे भविष्य में बेहतर तेज गेंदबाज, विकेटकीपर और मैच विनर खिलाड़ी तैयार होंगे, जिससे भारतीय महिला क्रिकेट की बेंच स्ट्रेंथ और मजबूत होगी