यूक्रेन के ड्रोन हमलों से रूस में ईंधन संकट! अब भारत से पेट्रोल खरीदने की तैयारी? 

Fuel crisis in Russia
नई दिल्ली/मॉस्को। दुनिया की ऊर्जा राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जो रूस वर्षों से दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातकों में शामिल रहा, अब वही देश कथित तौर पर भारत से पेट्रोल आयात करने लगा है। इसकी प्रमुख वजह यूक्रेन की ओर से रूसी तेल रिफाइनरियों पर लगातार किए जा रहे ड्रोन हमले बताए जा रहे हैं, जिनसे ईंधन उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित हुई है।
  • रूसी रिफाइनरियों पर हमलों के बाद ईंधन आपूर्ति पर असर
  • रिपोर्ट: भारत से पेट्रोल लेकर रूस ने शुरू किया आयात, कई टैंकर रवाना
  • रूस में पेट्रोल की मांग बढ़ी, कई क्षेत्रों में आपूर्ति पर दबाव
  • भारत अब भी रूस से रिकॉर्ड मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है
  • ऊर्जा बाजार में बदला समीकरण, कच्चा तेल रूस से और पेट्रोल भारत से!

यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो यह वैश्विक ऊर्जा व्यापार के बदलते स्वरूप का एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है—जहां रूस भारत को कच्चा तेल बेच रहा है और भारत उसी कच्चे तेल को रिफाइन कर पेट्रोल के रूप में रूस को निर्यात कर रहा है।

यूक्रेनी हमलों से रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित

रिपोर्टों के अनुसार, पिछले कई महीनों में यूक्रेन ने रूस की कई तेल रिफाइनरियों पर ड्रोन हमले किए हैं। इन हमलों से कुछ प्रमुख रिफाइनिंग इकाइयों को नुकसान पहुंचा, जिससे घरेलू स्तर पर पेट्रोल और अन्य ईंधनों की उपलब्धता प्रभावित हुई। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी मंत्रियों के साथ बैठक में स्वीकार किया कि कुछ रिफाइनरियों को नुकसान पहुंचा है, हालांकि उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार स्थिति पर नियंत्रण पाने के प्रयास कर रही है।

भारत से रवाना हुए पेट्रोल के टैंकर

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, भारत से समुद्री मार्ग के जरिए रूस को पेट्रोल भेजा जाना शुरू हो गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि—

  • लगभग 60,000 मीट्रिक टन पेट्रोल रूस के लिए रवाना किया जा चुका है।
  • 30,000 से 40,000 टन क्षमता वाले दो अलग-अलग टैंकर भारत से भेजे गए हैं।
  • हालांकि, यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है कि भारत की किस रिफाइनरी या कंपनी ने यह आपूर्ति की है।

रूस की मासिक आयात योजना

सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस की योजना हर महीने विभिन्न देशों से करीब 4 लाख टन पेट्रोल आयात करने की है। इस आपूर्ति में भारत के अलावा बेलारूस भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

बेलारूस भी बना संकटमोचक

रूस के सहयोगी देश बेलारूस ने भी ईंधन संकट के दौरान अपनी आपूर्ति बढ़ा दी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार— जून के पहले पखवाड़े में…रेलवे के जरिए…70 हजार टन से अधिक पेट्रोल…रूस भेजा गया, जो मई की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक बताया जा रहा है।

रूस में क्यों बढ़ी पेट्रोल की मांग?

गर्मियों के मौसम में रूस में पेट्रोल की मांग सामान्य रूप से बढ़ जाती है।

बताया जा रहा है कि— प्रतिदिन करीब 1.10 लाख टन पेट्रोल की खपत होती है। रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित होने से कई क्षेत्रों में आपूर्ति पर दबाव बना। कुछ इलाकों में लंबी कतारों और ईंधन उपलब्धता को लेकर चिंता की खबरें भी सामने आई हैं।

भारत और रूस के बीच ऊर्जा व्यापार मजबूत

दिलचस्प बात यह है कि इसी दौरान भारत रूस से रिकॉर्ड मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है। उपलब्ध शिपिंग आंकड़ों के अनुसार—

  • जून में भारत ने प्रतिदिन लगभग 27 लाख बैरल रूसी कच्चे तेल का आयात किया।
  • भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक रही।
  • मई में यह हिस्सा करीब 36.5 प्रतिशत था।

इससे स्पष्ट है कि भारत और रूस के बीच ऊर्जा व्यापार लगातार मजबूत बना हुआ है।

कैसे बदल रहा है ऊर्जा का गणित?

विशेषज्ञों के अनुसार भारत के पास अत्याधुनिक रिफाइनिंग क्षमता है। इसका मतलब है—

  • भारत रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदता है।
  • उसे अपनी रिफाइनरियों में प्रोसेस करता है।
  • फिर पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के रूप में घरेलू जरूरत पूरी करने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात भी करता है। यदि रूस भारत से पेट्रोल खरीद रहा है, तो यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में एक नया और दिलचस्प बदलाव माना जा सकता है।

भारत के लिए क्या हैं मायने?

यदि भारत का परिष्कृत ईंधन निर्यात बढ़ता है, तो—

  • रिफाइनिंग उद्योग को लाभ मिल सकता है।
  • विदेशी मुद्रा आय बढ़ सकती है।
  • भारत की ऊर्जा निर्यात क्षमता और मजबूत हो सकती है।
  • वैश्विक ईंधन बाजार में भारत की भूमिका और प्रभाव बढ़ सकता है।

हालांकि यह भी ध्यान रखना होगा कि ऊर्जा बाजार भू-राजनीतिक परिस्थितियों से अत्यधिक प्रभावित होता है और स्थिति तेजी से बदल सकती है। दुनिया की ऊर्जा राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। जो रूस भारत को कच्चा तेल बेच रहा था, अब वही रूस कथित तौर पर भारत से पेट्रोल खरीदने लगा है। यूक्रेन के ड्रोन हमलों से रूसी रिफाइनरियों को नुकसान पहुंचने के बाद ईंधन संकट गहराने की खबरें हैं। क्या बदल रहा है वैश्विक तेल बाजार का समीकरण और भारत के लिए इसका क्या मतलब है?

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