पी​डीए के आका अखिलेश को क्यों याद आ रहे हैं महाराणा प्रताप…जानें क्या है इसकी वजह

PDA boss Akhilesh

पी​डीए के आका अखिलेश को क्यों याद आ रहे हैं महाराणा प्रताप…जानें क्या है इसकी वजह

अकेले पीडीए के भरोसे चुनावी नैया नहीं होगी पार…

समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव ने एक बड़ा ऐलान किया है। अखिलेश यादव ने कहा है कि अगर उत्तरप्रदेश में उनकी सरकार बनती है तो वो महाराणा प्रताप की जयंती पर दो दिन की छुट्टी रखेंगे।
हांलाकि योगी सरकार महाराणा प्रताप की मूर्ति चेतक के साथ गोमती रिवर फ्रंट पर लगा रही है। इस बीच अखिलेश यादव ने ये ऐलान बंगाल में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात के बाद किया।

क्या है राजनीतिक मायने

पश्चिम बंगाल में टीएमसी की हार के बाद सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुलाकात। दोनों की मुलाकात में क्या बात हुई ये सार्वजनिक नहीं हुई लेकिन इसके तुंरत बाद अखिलेश यादव ने लखनऊ आकर ये अप्रत्याशित ऐलान कर दिया। अंदरखाने की खबर है कि अखिलेश यादव पश्चिम बंगाल के नतीजों के बाद से अपनी राजनी​तिक जमीन को लेकर अभी से सियासी तौर पर सर्तक नजर आ रहे हैं। अभी तक वो पीडीए मतलब कि पिछड़ा दलित और अल्पसंख्यकों की राजनीति करते रहे हैं। पूरे उत्तप्रदेश में पीडीए के वोट पर अपना अधिकार जताते रहे हैं लेकिन पश्चिम बंगाल के अप्रत्याशित नतीजों ने उन्हें पीडीए को लेकर सोचने पर मजबूर कर दिया है।

अब अखिलेश पर इंडिया गठबंधन की नजरें

उत्तरप्रदेश में एक साल बाद चुनाव होने हैं लेकिन पूर्वातर और पूर्वांचल दोनों ही इलाकों में बीजेपी का बढ़ता जनाधार देख अखिलेश की चिंता बढ़ गई है। इसीलिए माना जा रहा है कि वो अब केवल पीडीए के भरोसे चुनावी नैया पार नहीं लगा सकते। इस बीच इंडिया गठबंधन में देखें तो लगभग सभी राजनैतिक दल एक के बाद एक करके चुनावी मैदान पर हार का सामना कर रहे हैं। अब इंडिया गठबंधन में सबकी नजरें और उम्मीदें अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी पर जा टिकी है क्योंकि अगले साल 2027 में उत्तरप्रदेश में विधानसभा चुनाव हैं।

बिहार और बंगाल में गठबंधन की करारी हार

पिछले तीन चार विधानसभा चुनावों में इंडिया गठबंधन के घटक दलों को करारी हार का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी हार हरियाणा बिहार और फिर बंगाल के विधानसभा चुनावों में हुई। इसके बाद से अब उत्तरप्रदेश के चुनावों के पहले शायद अखिलेश यादव सहित गठबंधन के दल किसी साफ्ट रास्ते की तलाश में हैं। जिससे पीडीए भी नाराज ने हो और बहुसंख्यकों का साथ भी मिल सके। अब गौर करने की बात ये है कि सालों साल तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगने के बाद क्या ये दल इतनी आसानी से साफ्ट रास्ते को अपना सकेंगे, क्या जनता इन पर आसानी से भरोसा जता पाएगा और क्या इस तरीके से वो तेजी से खत्म होती अपनी राजनैतिक जमीन को वापस पा सकेंगे।

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