इडुक्की (केरल)। केरल के पेरियार (मुल्लापेरियार) बांध का जलस्तर 21 जुलाई 2026 को 112.75 फीट दर्ज किया गया, जो इसकी अधिकतम 152 फीट की क्षमता से काफी कम है। बांध में वर्तमान जल भंडारण 1,352 मिलियन क्यूबिक फीट (MCft) है, जबकि इसकी कुल क्षमता 10,570 MCft है। यानी जलाशय अपनी कुल क्षमता का लगभग 13 प्रतिशत ही भरा हुआ है।
- 21 जुलाई को जलस्तर 112.75 फीट दर्ज
- कुल क्षमता 10,570 MCft, भंडारण 1,352 MCft
- पिछले साल के मुकाबले जलस्तर में बड़ी गिरावट
- तमिलनाडु की सिंचाई का प्रमुख जल स्रोत
- जल बंटवारे और सुरक्षा को लेकर विवाद बरकरार
जारी आंकड़ों के अनुसार, बांध में 172 क्यूसेक पानी की आवक (Inflow) हो रही है, जबकि 256 क्यूसेक पानी छोड़ा (Outflow) जा रहा है। इससे स्पष्ट है कि फिलहाल जल निकासी, आवक से अधिक बनी हुई है।
पिछले वर्ष इसी अवधि में बांध में 4,744 MCft पानी संग्रहित था और जलस्तर 130.2 फीट दर्ज किया गया था। इस बार जलस्तर और भंडारण दोनों में उल्लेखनीय कमी देखने को मिल रही है, जिससे आने वाले दिनों में मानसूनी बारिश पर निगाहें टिकी हैं।
पेरियार बांध, जिसे मुल्लापेरियार बांध भी कहा जाता है, केरल के इडुक्की जिले में स्थित है। इसका निर्माण वर्ष 1887 से 1895 के बीच ब्रिटिश शासन के दौरान किया गया था। इस बांध का मुख्य उद्देश्य पेरियार नदी का पानी सुरंग के माध्यम से तमिलनाडु पहुंचाकर सिंचाई उपलब्ध कराना है। इसके अलावा यह जलविद्युत उत्पादन और पेयजल आपूर्ति के लिए भी महत्वपूर्ण है।
हालांकि, यह बांध वर्षों से केरल और तमिलनाडु के बीच जल बंटवारे और सुरक्षा को लेकर विवाद का केंद्र रहा है। केरल बांध की उम्र और भूकंपीय जोखिम को देखते हुए सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताता रहा है, जबकि तमिलनाडु इसे अपनी कृषि अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा मानता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते जलवायु परिदृश्य और मानसून की अनिश्चितता को देखते हुए दोनों राज्यों के लिए जल संरक्षण, सुरक्षित बांध प्रबंधन और आपसी सहयोग भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता होगी।