भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए 18 जुलाई को दोपहर 12:05 बजे निजी स्पेस सेक्टर की सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल की। श्रीहरिकोटा से स्काईरूट एयरोस्पेस के पहले ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल विक्रम-1 ने सफल उड़ान भरते ही देश को एक नई पहचान दी। यह पहली बार है जब किसी भारतीय निजी कंपनी ने अपने विकसित रॉकेट के जरिए ऑर्बिटल मिशन की शुरुआत की है। इस मिशन को ‘मिशन आगमन’ नाम दिया गया है, जिसे भारत के स्पेस सेक्टर में सरकारी एजेंसियों के साथ निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका का प्रतीक माना जा रहा है। यह लॉन्च केवल एक रॉकेट की उड़ान नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की वैज्ञानिक क्षमता, आधुनिक तकनीक और नवाचार का प्रदर्शन भी है।
भारत के निजी स्पेस सेक्टर को नई ऊंचाई देने वाला पहला ऑर्बिटल मिशन बना विक्रम-1
विक्रम-1 भारत का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है, जिसे छोटे और मध्यम आकार के उपग्रहों को अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसके साथ स्काईरूट एयरोस्पेस भारत की पहली निजी स्पेस कंपनी बन गई जिसने ऑर्बिटल मिशन का प्रयास किया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस उपलब्धि से देश में स्पेस स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर खुलेंगे और भविष्य में निजी क्षेत्र की भागीदारी और मजबूत होगी।
कार्बन-कंपोजिट संरचना और 100% 3D प्रिंटेड इंजन ने बनाया तकनीकी रूप से बेहद खास
विक्रम-1 की सबसे बड़ी तकनीकी विशेषता इसका पूरी तरह कार्बन-कंपोजिट ढांचा है, जिससे रॉकेट हल्का होने के साथ अधिक मजबूत भी बना है। इसके ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल में भारत का पहला 100 प्रतिशत 3D प्रिंटेड लिक्विड इंजन लगाया गया है। इसके अलावा पहले चरण में देश का सबसे लंबा मोनोलिथिक कार्बन-कंपोजिट रॉकेट स्टेज और अल्ट्रा-लो-शॉक न्यूमैटिक सेपरेशन सिस्टम जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है, जो भविष्य के भारतीय लॉन्च वाहनों के लिए नई दिशा तय कर सकती हैं।
स्पेस मलबा हटाने की तकनीक से लेकर वैज्ञानिकों को अनोखी श्रद्धांजलि तक कई खास पेलोड शामिल
‘मिशन आगमन’ केवल तकनीकी परीक्षण तक सीमित नहीं है। इस मिशन के साथ EMBRACE नामक पेलोड भी भेजा गया है, जिसमें भविष्य में अंतरिक्ष मलबा हटाने के लिए विकसित की जा रही रोबोटिक आर्म तकनीक का परीक्षण किया जाएगा। इसके अलावा मिशन में डॉ. विक्रम साराभाई, सर सी.वी. रमन और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की सूक्ष्म स्वर्ण प्रतिमाओं वाला विशेष माइक्रो आर्ट भी शामिल किया गया है। इसके साथ ‘कॉस्मिक ब्लूम’ नाम का लैब में तैयार किया गया हीरा भी एक सांस्कृतिक और रचनात्मक पेलोड के रूप में अंतरिक्ष की यात्रा पर भेजा गया है।
प्रधानमंत्री का संदेश भी पहुंचा अंतरिक्ष, नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बना ‘मिशन आगमन’
इस ऐतिहासिक मिशन के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुभकामनाओं और ‘वंदे मातरम्’ संदेश वाला विशेष कार्ड भी अंतरिक्ष की ओर भेजा गया है। इसके साथ देश और दुनिया के लोगों की सैकड़ों शुभकामनाएं भी प्रतीकात्मक रूप से शामिल की गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि विक्रम-1 की यह उड़ान भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए मील का पत्थर साबित होगी और आने वाले वर्षों में देश वैश्विक स्पेस लॉन्च बाजार में और मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकेगा।