मध्यप्रदेश में बनेगी वीर भारत फैलोशिप, बैतूल में खुलेगा जनजातीय इतिहास का नया अध्याय
उज्जैन के कोठी महल में बनेगा वीर भारत संग्रहालय, हर साल दो शोधार्थियों को मिलेंगे 12-12 लाख रुपये
भोपाल। मध्यप्रदेश में भारत के गौरवशाली इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय पराक्रम को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई वीर भारत न्यास की कार्यसमिति की बैठक में प्रदेश में ‘वीर भारत फैलोशिप’ शुरू करने, बैतूल में आरण्यक युगयुगीन जनजातीय संग्रहालय स्थापित करने और उज्जैन के ऐतिहासिक कोठी महल में वीर भारत संग्रहालय के निर्माण को मंजूरी दी गई।
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इतिहास को नई पहचान, मध्यप्रदेश में वीर भारत फैलोशिप।
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बैतूल में जनजातीय गौरव का संग्रहालय।
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उज्जैन के कोठी महल में दिखेगा भारत का वैभव।
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शोधार्थियों को हर साल मिलेंगे 12 लाख रुपये।
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योद्धाओं से लेकर ऋषियों तक, वीर भारत की गाथा।
इस पहल के तहत इतिहास, संस्कृति, साहित्य, कला, विज्ञान और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाली विभूतियों पर शोध को प्रोत्साहित किया जाएगा। वीर भारत फैलोशिप के अंतर्गत हर साल दो अध्येताओं का चयन होगा। प्रत्येक अध्येता को एक वर्ष के लिए 12 लाख रुपये की फैलोशिप दी जाएगी। यानी इस योजना के माध्यम से प्रतिवर्ष 24 लाख रुपये शोध कार्यों पर खर्च किए जाएंगे।
बैतूल बनेगा जनजातीय इतिहास और गौरव का नया केंद्र
बैठक का एक बड़ा निर्णय बैतूल में आरण्यक युगयुगीन जनजातीय संग्रहालय की स्थापना को लेकर रहा। केंद्र सरकार के सहयोग से बनने वाले इस संग्रहालय में जनजातीय इतिहास गैलरी, जनजातीय स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी सामग्री, जनजातीय शोध केंद्र और डिजिटल अभिलेखागार विकसित किए जाएंगे।
इसका उद्देश्य जनजातीय समाज के इतिहास, संघर्ष, संस्कृति और स्वतंत्रता आंदोलन में उसके योगदान को संरक्षित करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। खासतौर पर उन जनजातीय नायकों और आंदोलनों को पहचान देने का प्रयास होगा, जिनका योगदान भारतीय इतिहास के व्यापक विमर्श में अपेक्षाकृत कम सामने आया है।
उज्जैन के कोठी महल में दिखेगा भारत का वैभवशाली अतीत
वीर भारत न्यास की बैठक में उज्जैन के कोठी महल में वीर भारत संग्रहालय के निर्माण को भी स्वीकृति दी गई। यह संग्रहालय भारतीय इतिहास, संस्कृति और गौरवशाली विरासत को प्रदर्शित करेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत की वीरता को केवल युद्धों और योद्धाओं की कहानियों तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। भारत की वास्तविक शक्ति उसकी विचारधारा, एकजुटता, प्रश्न करने की परंपरा, त्याग, रक्षा और सृजन की क्षमता में भी निहित है।
संग्रहालय में योद्धाओं के साथ ऋषियों, शिक्षकों, गणितज्ञों, समाज सुधारकों, विधि निर्माताओं और तीर्थ यात्रियों के योगदान को भी स्थान दिया जाएगा।
2024 से जारी हैं वीर भारत न्यास की गतिविधियां
बैठक में न्यास की वर्ष 2024 से संचालित गतिविधियों की जानकारी भी प्रस्तुत की गई। इसके अंतर्गत भोपाल में सदानीरा समागम, महाभारत समागम और उज्जैन में श्री महाकालेश्वर महोत्सव जैसे आयोजन किए गए हैं। इसके अलावा फिल्म समारोह, सांगीतिक प्रस्तुतियों और सामाजिक माध्यमों के जरिए सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय चेतना से जुड़ी गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं।
बैठक में संस्कृति राज्य मंत्री धर्मेंद्र भावसिंह लोधी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। कुल मिलाकर मध्यप्रदेश में वीर भारत न्यास की ये पहल तीन स्तरों पर काम करेगी। पहला, शोध और अध्ययन के माध्यम से भारत के इतिहास को नए सिरे से समझने का अवसर मिलेगा। दूसरा, बैतूल में जनजातीय समाज के इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम के योगदान को संरक्षित करने का मंच तैयार होगा। तीसरा, उज्जैन का वीर भारत संग्रहालय देश की सांस्कृतिक और वैचारिक विरासत को एक व्यापक स्वरूप में प्रस्तुत करेगा।