मुरासु का चक्रवाती खतरा: दक्षिण भारत से छत्तीसगढ़ तक बदलेगा मौसम, जानिए तूफानों के नामकरण का पूरा गणित
बंगाल की खाड़ी में सक्रिय गंभीर चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ को लेकर मौसम विभाग ने दक्षिण आंध्र प्रदेश और आसपास के तटीय इलाकों के लिए चेतावनी जारी की है। 2 नवंबर 2026 को जारी भारतीय मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक, तूफान आंध्र प्रदेश के नेल्लोर से करीब 160 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में था। इसके 2 नवंबर की आधी रात से 3 नवंबर की सुबह के बीच नेल्लोर और नरसापुर के बीच, ओंगोल के दक्षिण में तट पार करने का अनुमान है। उस समय हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंकों की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।
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अर्नब के बाद मुरासु का तूफानी खतरा
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समंदर में उठा मुरासु, कहां-कहां असर?
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तूफानों के नाम कौन रखता है? पूरा गणित
यह सिर्फ समुद्र तट तक सीमित रहने वाला मौसमी घटनाक्रम नहीं है। तूफान के आगे बढ़ने के साथ आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, दक्षिण ओडिशा और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में बारिश, तेज हवाओं और गरज-चमक का असर हो सकता है। हालांकि पूरे देश में एक जैसी तबाही या बारिश का अनुमान लगाना सही नहीं होगा। असर तूफान के रास्ते, उसकी ताकत और आगे बनने वाली मौसम प्रणालियों पर निर्भर करेगा।
अर्नब के बाद मुरासु का नाम चर्चा में, आंध्र से छत्तीसगढ़ तक मौसम पर असर
बंगाल की खाड़ी में एक के बाद एक चक्रवाती तूफानों की सक्रियता ने तटीय राज्यों की चिंता बढ़ा दी है। अर्नब के बाद अब मुरासु तूफान चर्चा में है। लेकिन सवाल सिर्फ यह नहीं कि मुरासु कितना ताकतवर है, बल्कि यह भी है कि इसका असर किन राज्यों तक पहुंचेगा, क्या यह पूरे देश का मौसम बदल देगा और आखिर इन तूफानों के नाम रखता कौन है?
मुरासु की ताकत और संभावित रास्ता
भारतीय मौसम विभाग के 2 नवंबर के बुलेटिन के अनुसार, मुरासु पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में गंभीर चक्रवाती तूफान के रूप में सक्रिय है। यह पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट को नेल्लोर और नरसापुर के बीच, ओंगोल के दक्षिण में पार करने की संभावना जताई गई है।
तट से टकराते समय इसकी हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंकों की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। समुद्र में ऊंची लहरें उठने और तटीय निचले इलाकों में पानी भरने का खतरा है। मौसम विभाग ने दक्षिण आंध्र प्रदेश के कुछ निचले इलाकों में समुद्री ज्वार से करीब एक से डेढ़ मीटर तक अतिरिक्त जलस्तर बढ़ने की आशंका भी जताई है।
किन राज्यों में दिखेगा असर?
मुरासु का सबसे सीधा और गंभीर असर आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में पड़ने की आशंका है। तेज हवाएं, भारी से बहुत भारी बारिश, समुद्र में ऊंची लहरें और निचले इलाकों में जलभराव बड़ी चुनौती बन सकते हैं।
तमिलनाडु के उत्तरी तटीय इलाकों में भी बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है। तेलंगाना में भी बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। दक्षिण ओडिशा में मौसम प्रभावित हो सकता है। तूफान के आगे बढ़ने और कमजोर पड़ने के साथ इसका असर आंतरिक इलाकों तक पहुंच सकता है।
छत्तीसगढ़ के दक्षिणी हिस्सों के लिए भी मौसम विभाग ने बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई है। 3 और 4 नवंबर को कुछ इलाकों में तेज हवा के साथ बारिश हो सकती है। रायपुर सहित दूसरे क्षेत्रों में बादल छाने और बूंदाबांदी की स्थिति बन सकती है। हालांकि छत्तीसगढ़ में इसका प्रभाव तटीय आंध्र प्रदेश जैसा नहीं होगा।
किसानों के लिए क्यों बढ़ सकती है चिंता?
छत्तीसगढ़ में इस समय धान की कटाई और फसल को सुरक्षित रखने का काम चल रहा है। ऐसे में बारिश और तेज हवाएं किसानों की परेशानी बढ़ा सकती हैं। खेतों में खड़ी फसल गिरने, कटी हुई धान की फसल भीगने और उपज में नमी बढ़ने का खतरा है। जिन किसानों ने धान काटकर खुले में रखा है, उन्हें विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के तटीय क्षेत्रों में भी तेज बारिश का असर खेती, सड़क परिवहन, बिजली आपूर्ति और मछुआरों की आजीविका पर पड़ सकता है। समुद्र में ऊंची लहरों को देखते हुए मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना जरूरी है।
क्या पूरे देश का मौसम बदल देगा मुरासु?
यह समझना जरूरी है कि चक्रवाती तूफान का असर पूरे देश पर एक जैसा नहीं पड़ता। मुरासु का मुख्य प्रभाव बंगाल की खाड़ी से लगे दक्षिण और पूर्वी राज्यों में रहने की संभावना है। उत्तर भारत, पश्चिम भारत और मध्य भारत के बड़े हिस्सों में इसका सीधा प्रभाव होने का अनुमान नहीं है।
हालांकि किसी चक्रवात के कारण नमी का प्रवाह, हवाओं की दिशा और आसपास की मौसम प्रणालियों में बदलाव हो सकता है। इसलिए कुछ दूरस्थ इलाकों में बादल या हल्की बारिश जैसी गतिविधियां संभव हैं। लेकिन केवल मुरासु के आधार पर पूरे देश में बारिश, ठंड या मौसम में बड़े बदलाव की भविष्यवाणी करना उचित नहीं होगा।
अब समझिए तूफानों के नामकरण का पूरा गणित
चक्रवाती तूफानों के नाम मनमाने तरीके से नहीं रखे जाते। इसके लिए विश्व मौसम विज्ञान संगठन और संयुक्त राष्ट्र के एशिया-प्रशांत आर्थिक एवं सामाजिक आयोग के तहत क्षेत्रीय व्यवस्था बनाई गई है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाले चक्रवातों का नामकरण भारत मौसम विज्ञान विभाग के नई दिल्ली स्थित क्षेत्रीय विशेषीकृत मौसम विज्ञान केंद्र की जिम्मेदारी है।
इस व्यवस्था में 13 देश शामिल हैं। इनमें भारत, बांग्लादेश, ईरान, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और यमन शामिल हैं।
हर देश की ओर से 13-13 नाम दिए गए हैं। इस तरह कुल 169 नामों की सूची तैयार की गई है। इन नामों को पहले से तय क्रम में इस्तेमाल किया जाता है। यानी तूफान जिस देश की ओर बढ़ रहा है, नाम उस देश के आधार पर नहीं रखा जाता, बल्कि सूची में अगला नाम इस्तेमाल होता है।
अर्नब के बाद मुरासु ही क्यों?
यही वजह है कि अर्नब के बाद मुरासु नाम सामने आया। अर्नब बांग्लादेश की ओर से दिया गया नाम था, जबकि मुरासु भारत की ओर से प्रस्तावित नाम है। सूची में दोनों नाम एक के बाद एक आते हैं। इसके बाद अगला नाम ईरान की ओर से दिया गया अकवान है।
मुरासु तमिल भाषा का शब्द है। इसका अर्थ एक बड़े नगाड़े या ढोल से जुड़ा है, जिसका इस्तेमाल परंपरागत रूप से संदेश देने, लोगों को सचेत करने और विशेष अवसरों पर किया जाता रहा है। लेकिन ध्यान रहे, किसी तूफान का नाम उसकी ताकत या विनाशकारी क्षमता नहीं बताता। मुरासु नाम होने का मतलब यह नहीं कि तूफान ज्यादा खतरनाक है।
कब मिलता है किसी तूफान को नाम?
समुद्र में कम दबाव का क्षेत्र बनने के साथ ही उसे चक्रवाती तूफान का नाम नहीं दिया जाता। पहले मौसम प्रणाली मजबूत होती है। जब उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में किसी चक्रवाती प्रणाली की अधिकतम निरंतर सतही हवा की गति कम से कम 34 समुद्री मील यानी लगभग 62 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच जाती है, तब उसे चक्रवाती तूफान की श्रेणी में रखकर नाम दिया जाता है।
नामकरण के लिए कुछ नियम भी हैं। नाम छोटा, सरल और आसानी से बोला जाने वाला होना चाहिए। उसकी लंबाई अधिकतम आठ अक्षरों की हो सकती है। नाम किसी धर्म, राजनीति, संस्कृति या लिंग के प्रति आपत्तिजनक नहीं होना चाहिए। एक बार इस्तेमाल हो चुका नाम दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जाता।
नाम नहीं, चेतावनी महत्वपूर्ण
मुरासु ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि समुद्र में बनने वाली मौसमी प्रणालियां किस तरह कई राज्यों की जिंदगी को प्रभावित कर सकती हैं। नामकरण का उद्देश्य तूफान की पहचान आसान करना और चेतावनी को तेजी से लोगों तक पहुंचाना है। असली खतरा उसकी हवा की रफ्तार, बारिश, समुद्री लहरों और तट से टकराने के रास्ते से तय होता है।
इसलिए आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के प्रभावित इलाकों में लोगों को मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों पर ध्यान देना चाहिए। तेज हवा और बिजली चमकने के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहना जरूरी है। किसानों को कटी हुई फसल सुरक्षित रखने और मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह का पालन करना चाहिए।