क्या बसपा इस बार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगी
अगले साल 2027 में उत्तरप्रदेश में विधानसभा के चुनाव है। सभी दल तैयारी जुट गए है लेकिन अकेली बहुजन समाजवादी पार्टी में कोई चुनावी तैयारियां देखने को नहीं मिल रही। पिछळे कुछ महीनों ब्लकि पिछले एक दो सालों से देखें तो मायावती केवल पार्टी को मैनेज करती दिखाई दे रही हैं वो भी पारिवारिक ड्रामे के जरिए।
आकाश आनंद को लेकर हमेशा बदल रहा फैसला
मायावती ने 3 सितंबर को आकाश आनंद को पार्टी के राष्ट्रीयसह संयोजक पद से हटा दिया।इसके बाद आकाश आनंद ने अपने ट्वीटर हैंडिल सहित सोशल मीडिया के सभी प्लेटफार्म पर अपना बायो बदल दिया। मायावती ने हवाला दिया कि आकाश आनंद अभी इतनी बड़ी जिम्मेदारी के लिए परिवक्त नहीं है। उनको अभी इतने बड़े पद पर रहकर पार्टी के कामकाज का कोई अनुभव भी नहीं है। मजेदार बात ये है कि -मायावती ने जब सबसे पहले आकाश आनंद को ये जिम्मेदारी दी थी तब भी एक बार यही कहकर उको पद से हटाया था। इसके बाद फिर वापसनेशल कोआर्डिनेटर बना दिया।
ईशान आनंद को दी बड़ी जिम्मेदारी
मायवाती ने आकाश आनंद के भाई ईशान को पार्टी से जुड़े बड़े काम दिए। लखनऊ में पार्टी की बैठक में ईशान मायावती के साथ बैठे नजर आए जहां पहले कभी आकाश आनंद की जगह हुआ करती थी। मायावती ने इशान को मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाकर कई सारे राज्यों की जिम्मेदारी सौंप दी है। मायावती के इस फैसले के बाद माना जा रहा है कि मायावती ने अपना उत्ताराधिकारी बदल दिया है।
आकाश को लेकर बार बार बदले फैसले
बसपा सुप्रीमो मायावती ने आकाश को लेकर बार बार फैसले बदले हैं। मायवाती कभी आकाश को पद दे देती है तो कभी वापस ले लेती है। जब भी आकाश से पद वापस लेती है हर बार यही कहती है कि उनके पास फिलहाल किसी तरह का अनुभव नहीं इस तरह किसी
ड्रामे की तरह मायावती एक फैसला लेती है और उनकी स्क्रिप्ट सबके सामने सुनाती हैं। बहराहल अब बसपा के सामने सबसे ब़ड़ा सवाल है कि क्या वो उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनावों को लड़ेगी ।
क्या सच में बसपा उत्तरप्रदेश में विधानसभा चुनाव लड़ना चाहती है
दरअसल ये सवाल और ये बात इसलिए है कि बसपा जिस तरह से राजनीति कर रही है उससे तो लगता है कि वो चुनाव शुरू होने तक कुछ राजनैतकि रणनीति बना ही नहीं पाएगी। पहले ही सुप्रीमो मायावती किसी भी तरह से मैदान में नहीं हैं। उस पर से उनका फैमिली ड्रामा लगातार पार्टी में फैसलों को बदल रहा है।मायावती और उनकेर, परिवार के सदस्य जिसमें उनके भाई आनंद कुमार उनके भतीजे और आनंद कुमार के दोनो बेटे आकाश और ईशान इसके साथ साथ आकाश के ससुर सिद्दार्थ इन्ही के बीच पार्टी के फैसले लगातार चलते हैं। कभी किसी को जिम्मेदारी दी जाती है कभी ले ली जाती है कभी किसी को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है तो कभी वापसी कर ली जाती है।
अब ऐसे में जब सारे दल चुनावी रणनीति बनाने में जुट गए हैं ऐसे समय में भी बसपा का फैमिली ड्रामा लगातार चल रहा है। मजेदार बात ये है कि बसपा में ये सब उस वक्त चल रहा है जब पार्टी अपनी सबसे कमजोर राजनैतिक स्थिति में है।
मायावती के वोट बैंक पर है सबकी नजर
2022 के विधानसभा चुनावों में बसपा के केवल एक सीट मिली थी। हांलाकि कई सारी सीटों पर बीएसपी ने कांग्रेस और बीजेपी का खेल बिगाड़ा था। वो चुनावों में हार जीत के समीकरणों पर खासा असर डाला। वही 2024 के लोकसभा चुनावों में बीएसपी उत्तरप्रदेश में खाता ही नहीं खोल सकी।
राजनैतिक दल बना रहे रणनीति
बसपा के वोट बैंक को अपने पक्ष में करने के लिए समाजवादी पार्टी ने अब पार्टी के ड्रेसकोड को बदलकर नीला रंग करने की तैयारी कर ली है। नगीना सांसद चंद्रशेखर लगातार खुद को दलितों को मसीहा बताने में लगे हैं ऐसे में बहुजन समाजवादी पार्टी सुप्रीमो का ये रवैया तो यही सवाल खड़े करता है कि क्या इस बार बीएसपी उत्तरप्रदेश में विधानसभा का चुनाव नहीं ल़ड़ेगी।