पाकिस्तान में आतंकवाद को लेकर नया विवाद… मरियम नवाज ने पड़ोसी देशों से ज्यादा पड़ोसी प्रांतों को बताया खतरा… खैबर पख्तूनख्वा ने पलटवार कर पंजाब की राजनीति और पाकिस्तान की आतंक नीति पर उठाए सवाल
पाकिस्तान में आतंकवाद का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक भूचाल का कारण बन गया है। इस बार निशाने पर कोई पड़ोसी देश नहीं, बल्कि पाकिस्तान के अपने ही प्रांत हैं। पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज के एक बयान ने पाकिस्तान के भीतर पंजाब बनाम खैबर पख्तूनख्वा की पुरानी राजनीतिक और सुरक्षा खाई को फिर सामने ला दिया है। लाहौर में एक AI टेक्नोलॉजी कार्यक्रम के दौरान मरियम नवाज ने कहा कि पंजाब को पड़ोसी देशों की तुलना में अपने पड़ोसी प्रांतों से ज्यादा आतंकवादी खतरा है। उनका इशारा साफ तौर पर पाकिस्तान के उन इलाकों की तरफ माना गया, जहां से आतंकवादी गतिविधियों और घुसपैठ की चुनौती लंबे समय से जुड़ी रही है। लेकिन इस बयान की सबसे बड़ी राजनीतिक कीमत यह है कि पाकिस्तान में इसे भारत और अफगानिस्तान को लेकर इस्लामाबाद की पारंपरिक सुरक्षा लाइन से अलग बयान के तौर पर देखा जा रहा है।
मरियम के बयान ने क्या कहा?
मरियम नवाज ने कहा कि 13 करोड़ की आबादी वाले पंजाब को अपने पड़ोसी देशों की तुलना में पड़ोसी प्रांतों से ज्यादा खतरा है। उनके मुताबिक आतंकवाद पंजाब में वहीं से प्रवेश करता है और पंजाब को अपने सभी प्रांतीय सीमाओं से आने वाले खतरों का सामना करना पड़ता है। यानी मरियम ने आतंकवाद का फोकस सीमा पार से हटाकर पाकिस्तान के भीतर मौजूद सुरक्षा चुनौती पर कर दिया। यही बात अब विवाद का सबसे बड़ा कारण बन गई है।
खैबर पख्तूनख्वा क्यों भड़का?
मरियम नवाज के बयान को खैबर पख्तूनख्वा की सरकार और वहां के नेताओं ने अपने प्रांत को आतंकवाद का स्रोत बताने की कोशिश के तौर पर लिया है। खैबर पख्तूनख्वा लंबे समय से आतंकवाद की मार झेलता आया है। अफगानिस्तान से लगती सीमा और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान जैसे आतंकी संगठनों की सक्रियता के कारण यह इलाका पाकिस्तान की सबसे संवेदनशील सुरक्षा पट्टियों में शामिल है। लेकिन यहां राजनीतिक समीकरण भी बेहद अहम है। प्रांत में इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ का प्रभाव है, जबकि पंजाब में सत्ता मरियम नवाज के हाथों में है। ऐसे में यह बयान सिर्फ आतंकवाद पर टिप्पणी नहीं रह गया। यह सीधे-सीधे पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति का मुद्दा बन गया।
पीटीआई ने खोला मोर्चा
नेशनल असेंबली के स्पीकर और पीटीआई नेता असद कैसर ने मरियम नवाज पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस तरह का बयान खैबर पख्तूनख्वा के लोगों और सुरक्षा बलों की कुर्बानियों का अपमान है। वहीं नेशनल डेमोक्रेटिक मूवमेंट के नेता मोहसिन दावर ने इससे भी तीखा पलटवार किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस आतंकवाद को आज पंजाब के लिए खतरा बताया जा रहा है, उसकी जड़ें आखिर पाकिस्तान की अपनी राजनीति में कहां रही हैं।यानी बहस अब इस सवाल पर पहुंच गई है— आतंकवाद बाहर से आ रहा है या पाकिस्तान की अपनी नीतियों का नतीजा है?
सबसे बड़ा सवाल—भारत का नाम क्यों नहीं?
मरियम नवाज के बयान की अंतरराष्ट्रीय अहमियत यहीं से शुरू होती है। पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवादी घटनाओं के लिए भारत पर आरोप लगाता रहा है। अफगानिस्तान पर भी सीमा पार आतंकवाद को लेकर आरोप लगाए जाते रहे हैं। लेकिन मरियम नवाज ने अपने बयान में यह संकेत दिया कि पंजाब के सामने वास्तविक खतरा पड़ोसी देशों से कम और पाकिस्तान के पड़ोसी प्रांतों से ज्यादा है। इसी वजह से पाकिस्तान के कुछ सैन्य विशेषज्ञों ने इस बयान को भारत और अफगानिस्तान को अप्रत्यक्ष क्लीनचिट की तरह देखा। हालांकि यह कहना कि मरियम ने औपचारिक रूप से भारत को क्लीनचिट दे दी, राजनीतिक व्याख्या होगी। उन्होंने भारत का नाम लेकर ऐसा कोई बयान नहीं दिया। लेकिन उनके बयान ने पाकिस्तान की उस स्थापित राजनीतिक भाषा पर जरूर सवाल खड़ा किया है, जिसमें आतंकवाद के लिए बाहरी ताकतों को जिम्मेदार ठहराना आम रहा है।
असली लड़ाई आतंकवाद से ज्यादा सत्ता की?
इस पूरे विवाद का एक दूसरा पहलू भी है। पाकिस्तान में इन दिनों नए प्रांतों और प्रशासनिक पुनर्गठन को लेकर चर्चा तेज है। सेना समर्थित प्रस्तावों में प्रशासनिक सीमाओं के पुनर्गठन की बात सामने आई है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी नए प्रांतों की जरूरत पर जोर दे चुके हैं। उनका तर्क है कि मौजूदा प्रशासनिक ढांचा दशकों बाद भी शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं करा पाया है। यानी एक तरफ पाकिस्तान में नए प्रांतों की बहस है और दूसरी तरफ मौजूदा प्रांतों के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ रहा है। ऐसे में मरियम नवाज का बयान सिर्फ आतंकवाद की बहस नहीं बल्कि पाकिस्तान के संघीय ढांचे और सत्ता के संतुलन से भी जुड़ता दिखाई देता है।
पंजाब बनाम खैबर पख्तूनख्वा—नई दरार?
पाकिस्तान की राजनीति में पंजाब सबसे प्रभावशाली प्रांत माना जाता है। आबादी, अर्थव्यवस्था और राजनीतिक प्रभाव के लिहाज से पंजाब का वजन बाकी प्रांतों पर भारी है। दूसरी ओर खैबर पख्तूनख्वा लंबे समय से सुरक्षा संकट, आतंकवाद और राजनीतिक अस्थिरता से जूझता रहा है। अगर पंजाब की मुख्यमंत्री ही यह कहती हैं कि पंजाब को सबसे बड़ा खतरा पड़ोसी देशों से नहीं बल्कि पड़ोसी प्रांतों से है, तो यह बयान पाकिस्तान के संघीय रिश्तों में नई बहस को जन्म दे सकता है। और यही इस विवाद की सबसे बड़ी कहानी है। पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में बाहर दुश्मन तलाशता रहा है, लेकिन मरियम नवाज ने उंगली अपने ही देश की सीमाओं के भीतर उठा दी है। अब सवाल यह है कि यह सिर्फ एक बयान है या पाकिस्तान की सत्ता की राजनीति में बदलते नैरेटिव का संकेत? अगर यह बयान आगे भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बना, तो आने वाले दिनों में इसका असर सिर्फ पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा तक सीमित नहीं रहेगा।
क्योंकि सवाल आतंकवाद का है… सवाल पाकिस्तान की संघीय राजनीति का है… और सबसे बड़ा सवाल—क्या पाकिस्तान पहली बार आतंकवाद के लिए बाहर देखने के बजाय अपने भीतर देखने को मजबूर हो रहा है?