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Home शहर और राज्य उत्तर प्रदेश

योगी सरकार में पीएम श्री योजना का मिल रहा ये फायदा….रटंत विद्या खत्म… खेल-खेल में सीखेंगे यूपी के बच्चे

DigitalDesk by DigitalDesk
September 12, 2026
in उत्तर प्रदेश, मुख्य समाचार, राजनीति, लखनऊ
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up Yogi government
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रटंत विद्या खत्म… खेल-खेल में सीखेंगे यूपी के बच्चे

उत्तर प्रदेश के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई का तरीका अब सिर्फ किताब, कॉपी और रटने तक सीमित नहीं रहने वाला… कक्षा में बच्चे देखेंगे, समझेंगे, बनाएंगे और खेलते हुए सीखेंगे… योगी सरकार ने पीएम श्री योजना के तहत कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों के लिए 11.37 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है… इस पहल का फोकस साफ है—बच्चों पर जानकारी थोपने के बजाय उन्हें सीखने की प्रक्रिया से जोड़ना… यानी पढ़ाई अब सिर्फ परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं, बल्कि बच्चे की समझ, रचनात्मकता और सीखने की क्षमता विकसित करने का जरिया बने…

11.37 करोड़… छोटे बच्चों की बड़ी तैयारी

पीएम श्री योजना के तहत स्वीकृत 11.37 करोड़ रुपये से स्कूलों में शिक्षण-अधिगम सामग्री, स्टूडेंट लर्निंग किट और स्टूडेंट डायरी उपलब्ध कराई जाएगी… कक्षा 1 से 5 तक के हर बच्चे को लर्निंग किट मिलने की योजना है… इसमें रंगीन वर्कबुक, ड्राइंग शीट, ओरिगेमी पेपर, ऊन, रिबन और लर्निंग डाइस जैसी सामग्री शामिल होगी… सवाल यह है कि इन छोटी-छोटी चीजों से शिक्षा में क्या बड़ा बदलाव आएगा? दरअसल प्राथमिक स्तर पर बच्चे सिर्फ सुनकर नहीं, बल्कि देखकर और करके ज्यादा आसानी से सीखते हैं… अगर गणित को अबेकस से समझाया जाए… भूगोल को ग्लोब और नक्शे से दिखाया जाए… भाषा को कठपुतली और गतिविधियों के जरिए समझाया जाए… तो सीखना बच्चों के लिए बोझ के बजाय अनुभव बन सकता है…यही इस पूरी पहल का मूल विचार है…

निपुण लक्ष्य… अब खेल में छिपी पढ़ाई

यूपी सरकार की इस पहल को निपुण लक्ष्यों से भी जोड़ा गया है… स्कूलों में निपुण लक्ष्य पोस्टर, तालिका पोस्टर और साप्ताहिक आकलन ट्रैकर उपलब्ध कराने की तैयारी है… यानी बच्चे ने क्या सीखा, कहां तक सीखा और किस विषय में उसे और मदद चाहिए—इस पर लगातार नजर रखने की व्यवस्था बनाई जा रही है… यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्राथमिक शिक्षा की मजबूत नींव आगे की पूरी पढ़ाई को प्रभावित करती है… अगर बच्चा शुरुआती कक्षाओं में पढ़ना, लिखना और बुनियादी गणितीय अवधारणाएं अच्छी तरह समझ लेता है, तो आगे की शिक्षा उसके लिए ज्यादा आसान हो सकती है… इसलिए निपुण लक्ष्य सिर्फ एक शैक्षणिक लक्ष्य नहीं… बल्कि बच्चों की बुनियादी सीखने की क्षमता मजबूत करने की कोशिश है…

हर बच्चे की किट… हर बच्चे की अपनी सीख

इस योजना की एक खास बात यह है कि लर्निंग किट सिर्फ स्कूल के लिए नहीं, बल्कि हर बच्चे तक पहुंचाने पर जोर है… बच्चे को अपनी किट मिलेगी… अपनी डायरी मिलेगी… और इनका वितरण अभिभावकों की मौजूदगी में पैरेंट-टीचर बैठक के दौरान किए जाने के निर्देश हैं… इससे अभिभावकों की भूमिका भी सिर्फ बच्चे की फीस या उपस्थिति देखने तक सीमित नहीं रहेगी… वे यह भी समझ सकेंगे कि स्कूल में बच्चे को किस तरह पढ़ाया जा रहा है और उसकी सीखने की प्रगति कैसी है… यानी शिक्षा व्यवस्था में स्कूल, शिक्षक, बच्चा और अभिभावक—चारों के बीच बेहतर जुड़ाव बनाने की कोशिश दिखाई देती है…

शिक्षक भी बनेंगे… नए प्रयोगों के सूत्रधार

इस पूरी पहल में सिर्फ बच्चों पर ही फोकस नहीं है… शिक्षकों को भी नए तरीके अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है… शिक्षकों को विषय और पाठ्यक्रम के अनुरूप टीएलएम तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं… ग्लोब, नक्शे, अबेकस, कठपुतलियां, चार्ट पेपर और दूसरी सामग्री का इस्तेमाल करके शिक्षक अपनी कक्षा को ज्यादा संवादात्मक बना सकते हैं…

सबसे दिलचस्प पहल होगी ‘निपुण टीएलएम मेला उत्सव’… ब्लॉक स्तर पर आयोजित होने वाले इस मेले में शिक्षक अपने बनाए हुए नवाचारी शिक्षण मॉडल और सामग्री का प्रदर्शन करेंगे… इसका फायदा यह हो सकता है कि किसी एक शिक्षक का सफल प्रयोग सिर्फ उसके स्कूल तक सीमित न रहे… बल्कि दूसरे स्कूल भी उस मॉडल को अपनाएं…

यानी शिक्षक सिर्फ पाठ पढ़ाने वाले नहीं… बल्कि शिक्षण के नए प्रयोग करने वाले मार्गदर्शक भी बनेंगे…

31 अक्टूबर… तय समय में जमीन पर उतरेगा प्लान

सरकार ने इस पहल के क्रियान्वयन के लिए समय सीमा भी तय की है… 15 अक्टूबर 2026 तक निपुण लक्ष्य, तालिका और टीएलएम के लिए आवश्यक सामग्री की खरीद पूरी करने का निर्देश है… इसके बाद 31 अक्टूबर तक शिक्षकों को टीएलएम तैयार कर कक्षाओं में लागू करना है… इसी समय सीमा तक बच्चों को स्टूडेंट डायरी और लर्निंग किट उपलब्ध कराने के निर्देश भी हैं… यानी योजना सिर्फ बजट स्वीकृत करने तक सीमित नहीं है… खरीद से लेकर कक्षा में इस्तेमाल तक की समय सीमा तय की गई है…

निगरानी भी मजबूत… सिर्फ सामान नहीं, इस्तेमाल भी

किसी भी सरकारी योजना की असली सफलता इस बात से तय होती है कि उसका लाभ जमीन पर कितना पहुंचा… इसीलिए योजना में निगरानी की व्यवस्था भी रखी गई है… विद्यालय स्तर पर प्रधानाध्यापक और ब्लॉक स्तर पर खंड शिक्षा अधिकारी जिम्मेदारी संभालेंगे… वहीं राज्य स्तर पर प्रेरणा पोर्टल और विद्या समीक्षा केंद्र के जरिए खरीद और सामग्री के उपयोग की निगरानी की जाएगी… यानी लक्ष्य सिर्फ स्कूलों में सामग्री पहुंचाना नहीं… बल्कि यह देखना भी है कि उस सामग्री का इस्तेमाल वास्तव में बच्चों को पढ़ाने में हो रहा है या नहीं…

यूपी की शिक्षा में बदलती तस्वीर

उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा को लेकर यह पहल एक बड़े बदलाव की दिशा में कदम के तौर पर देखी जा सकती है… कभी सरकारी स्कूलों की पहचान सीमित संसाधनों और रटंत पढ़ाई से जोड़कर देखी जाती थी… लेकिन अब जोर ऐसी कक्षाओं पर है जहां बच्चा सवाल पूछे… गतिविधि में हिस्सा ले… चीजों को छुए… बनाए… गलतियां करे और उन्हीं गलतियों से सीखे… यही आधुनिक प्राथमिक शिक्षा का मूल मंत्र है… योगी सरकार की इस पहल का असली इम्तिहान भी अब स्कूल की चारदीवारी के भीतर होगा… बजट जारी होना पहला कदम है… लर्निंग किट बच्चों तक पहुंचना दूसरा… लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि इन संसाधनों से बच्चे कितना सीखते हैं और उनकी बुनियादी शिक्षा कितनी मजबूत होती है…

अगर यह बदलाव प्रभावी तरीके से जमीन पर उतरता है, तो यूपी के प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाई का अनुभव ही बदल सकता है… रटने से समझने तक… किताब से गतिविधि तक… और परीक्षा से सीखने तक—यूपी की प्राथमिक शिक्षा एक नए प्रयोग की तरफ बढ़ती दिखाई दे रही है…

Tags: #up Yogi government #approved a budget crore children #classes 1 to 5 under the PM SHRI schemeUP Yogi Government
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