ग्लोबल मंच पर उत्तर प्रदेश का दम
एक समय बीमारू राज्यों की सूची में गिना जाने वाला उत्तर प्रदेश आज वैश्विक आर्थिक मंच पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहा है। आगरा में आयोजित ‘ब्रिक्स-इंडिया 2026’ एमएसएमई फोरम में प्रदेश को देश की ‘एमएसएमई राजधानी’ के रूप में प्रस्तुत किया गया। यह केवल एक उपाधि नहीं, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य के औद्योगिक और उद्यमी विकास की कहानी को बयां करती है।
- MSME सेक्टर में यूपी ने रचा नया इतिहास
- BRICS मंच पर चमका योगी सरकार का मॉडल
- 96 लाख इकाइयों ने बदली प्रदेश की तस्वीर
- 1.65 करोड़ लोगों को मिला रोजगार
- ODOP से लोकल उत्पादों को मिली ग्लोबल पहचान
- 5.36 बिलियन डॉलर के निर्यात से बढ़ी साख
- युवा उद्यमियों के लिए खुल रहे नए अवसर
यूपी बना देश की MSME राजधानी
96 लाख इकाइयों से 1.65 करोड़ लोगों को रोजगार
BRICS मंच पर गूंजा उत्तर प्रदेश मॉडल
ताज एंड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय ब्रिक्स एमएसएमई फोरम में उत्तर प्रदेश ने अपने आर्थिक बदलाव और रोजगार सृजन की उपलब्धियों का ऐसा खाका पेश किया, जिसने देश और दुनिया के प्रतिनिधियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
96 लाख इकाइयां, 1.65 करोड़ रोजगार
प्रदेश के एमएसएमई मंत्री Bhupendra Singh Chaudhary ने बताया कि मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां संचालित हो रही हैं। इन इकाइयों ने करीब 1.65 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराया है। यह आंकड़ा कई राज्यों की कुल आबादी से भी अधिक है और बताता है कि एमएसएमई सेक्टर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है।
BRICS देशों के साथ 5.36 बिलियन डॉलर का कारोबार
उत्तर प्रदेश ने वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर भी अपनी ओर से उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में उत्तरप्रदेश की ओर से ब्रिक्स देशों के साथ करीब 5.36 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निर्यात किया है। यूपी से तैयार होने वाले मशीनरी उत्पाद, परिधान, चमड़ा उद्योग, कालीन, हस्तशिल्प और बहुमूल्य पत्थरों की मांग लगातार बढ़ रही है। इससे प्रदेश के छोटे और मध्यम उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिली है।
ODOP ने बदली हजारों परिवारों की किस्मत
उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी ‘एक जनपद एक उत्पाद’ (ODOP) योजना आज राज्य के आर्थिक परिवर्तन की सबसे बड़ी पहचान बन चुकी है।
इस योजना के तहत अब तक:
- 20 हजार से अधिक लाभार्थियों को सहायता
- लगभग 897 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी वितरित
- 3.16 लाख नए रोजगार सृजित
ODOP ने कारीगरों, बुनकरों, शिल्पकारों और छोटे उद्यमियों को स्थानीय बाजार से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का काम किया है।
विश्वकर्मा योजना से बढ़ा पारंपरिक हुनर का सम्मान
पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए चलाई जा रही विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना भी बड़ी सफलता के रूप में सामने आई है।
योजना के अंतर्गत:
- 4.41 लाख से अधिक शिल्पकारों को प्रशिक्षण
- आधुनिक टूलकिट उपलब्ध कराई गई
- स्वरोजगार और आय में वृद्धि हुई
इस पहल ने पारंपरिक व्यवसायों को नई तकनीक और नई बाजार व्यवस्था से जोड़ा है।
युवाओं को उद्यमी बनाने की तैयारी
योगी सरकार अब रोजगार मांगने वालों को रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में काम कर रही है।
- बिना गारंटी ऋण की सुविधा
- ब्याज मुक्त वित्तीय सहायता
- अगले 10 वर्षों में 10 लाख नई सूक्ष्म इकाइयों का लक्ष्य
यह योजना युवाओं को नौकरी खोजने के बजाय उद्योग स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
12 जिलों में बनेंगे आधुनिक MSME पार्क
उद्योगों के लिए बेहतर आधारभूत ढांचा तैयार करने के उद्देश्य से PLEDGE योजना के तहत प्रदेश के 12 जिलों में आधुनिक एमएसएमई पार्क विकसित किए जा रहे हैं।
इन पार्कों से:
- निवेश आकर्षित होगा
- रोजगार के नए अवसर बनेंगे
- उत्पादन क्षमता बढ़ेगी
- निर्यात को मजबूती मिलेगी
योगी मॉडल की राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान
ब्रिक्स फोरम में उत्तर प्रदेश का प्रस्तुतीकरण केवल उपलब्धियों का विवरण नहीं था, बल्कि यह उस विकास मॉडल की झलक भी थी, जिसमें पारंपरिक कारीगर, ग्रामीण उद्यमी, युवा स्टार्टअप, महिला उद्यमिता और वैश्विक व्यापार सभी को साथ लेकर चलने का प्रयास किया गया है। प्रदेश सरकार का दावा है कि एमएसएमई सेक्टर को मजबूत बनाकर उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
सियासी मायने
- योगी सरकार एमएसएमई को अपनी सबसे बड़ी आर्थिक उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है।
- रोजगार और स्वरोजगार के आंकड़ों के जरिए सरकार विकास का संदेश देने की कोशिश कर रही है।
- अगले साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले उत्तरप्रदेश में उद्योग के साथ बढ़ता निवेश और बढ़ता रोजगार योगी सरकार के प्रमुख राजनीतिक मुद्दे बन सकते हैं।
- BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर यूपी की मौजूदगी सरकार को राष्ट्रीय स्तर पर विकास मॉडल के रूप में स्थापित करने का अवसर दे रही है।
बड़ी बात
उत्तर प्रदेश अब केवल कृषि प्रधान राज्य की पहचान तक सीमित नहीं रहना चाहता। 96 लाख एमएसएमई इकाइयों, 1.65 करोड़ रोजगार और अरबों डॉलर के निर्यात के आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि प्रदेश खुद को देश की औद्योगिक और उद्यमी राजधानी के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।