जानें कभी खुद को पीएम का हनुमान बताने वाले चिराग क्यों कर रहे विपक्ष के मुद्दों का समर्थन…!

Union Minister Bihar Hajipur Lok Sabha seat MP Chirag Paswan

केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री और बिहार की हाजीपुर लोकसभा सीट से सांसद चिराग पासवान को फिर से लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया है। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक में उन्हें दोबारा यह पद संभालने का अवसर मिला है। यह बैठक झारखंड की राजधानी रांची में हुई थी। वैसे लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान के एक-एक कदम को गौर से देखें तो यह साफ हो जाता है कि चिराग ने केंद्र की सत्ता में आने के बाद पीछे चलने के बजाए फ्रंट फुट पर रहकर खेलने का फैसला किया है। लेकिन यह फैसला किसके खिलाफ है? इस पर गौर करना होगा।
दरअसल राजनीति में हैं और खेल में हैं तो किसी ना किसी पोजिशन में खेलना तो है ही, लेकिन इस दौरान यह सवाल भी खड़ा होता है कि किसके खिलाफ खेल खेला जा रहा है। वैसे राजनीति का खेल अपने आप में अनोखा होता है। इसमें खिलाड़ी कई बार जिस टीम में होता है वह अपनी ही टीम के खिलाफ ही गोल करते नजर आता है।

आखिर क्या है चिराग पासवान के मन में ?

केन्द्रीय मंत्री चिराग पासवान उनकी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और चिराग के समर्थक यह कह सकते हैं कि ऊपर के सभी मुद्दों पर उनका स्वतंत्र पक्ष है। इन बयानों के पीछे किसी की भी प्रेरणा काम नहीं कर रही है। उनके समर्थकों का यह दावा भी बिल्कुल सही हो सकता है। लेकिन जब एक के बाद एक लगातार ऐसे कई मुद्दों पर सत्ताधारी गठबंधन में शामिल घटक दल का स्टैंड विपक्षी रणनीति में यदि फिट हो जाए तो सियासत में सवाल तो खड़े होंगे ही। सवाल यही है कि चिराग पासवान आखिर किधर से और किस टीम की ओर से खेल रहे हैं। वे किसके खिलाफ खेल रहे हैं?

चिराग हो गए वोकल फॉर लोकल

ऐसा लगता है केंद्रीय मंत्री का पद मिलने के बाद चिराग पासवान राजनीति में अपने कद पर खास ध्यान दे रहे हैं। जब तक वे एनडीए गठबंधन से दूर रहे तब तक वे खुद को पीएम नरेंद्र मोदी का हनुमान बताते रहे। लेकिन वे जैसे ही एनडीए गठबंधन वाली सरकार में स्थान मिला है वे ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे हो गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी का दिया यह मंत्र चिराग पासवान ने अपना लिया है। अपनी लोकल कंस्टिट्यूएंसी के लिए वे इतने वोकल हो गए कि अब यह नारा देने वाले ही सांसत में फंसते नजर आ रहे हैं।

चिराग मिला रहे है विपक्ष के सुर में सुर !

एससी-एसटी की जातियों में उपवर्गीकरण के साथ ही वक्फ संशोधन विधेयक हो या लेटरल एंट्री से केंद्रीय सचिवालय में भर्तियों के खिलाफ आवाज बुलंद करने का मामला और अब जाति जनगणना के पक्ष में बैटिंग करते​ चिराग पासवान लगता है विपक्ष के सुर में सुर मिला रहे हैं। उन्होंने यू तो वक्फ संशोधन विधेयक का पुरजोर विरोध नहीं किया, लेकिन संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी के पास विधेयक को भेजने की मांग करने वाले वे मोदी सरकार के अकेले मंत्री जरूर हैं। विपक्ष ने जिस तरह वक्फ विधेयक को जेपीसी में भेजने की मांग की थी। उसी तरह से उसने एससी-एसटी में उपवर्गीकरण के साथ ही लेटरल एंट्री एंट्री से सरकारी भर्तियों का विरोध भी विपक्ष ने ही किया। इन सब मुद्दों के अगुआ खासकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी नजर आए। अब चिराग पासवान ने भी इन सभी मुद्दों पर राहुल गांधी वाली लाइन पकड़ ली है। अब जब राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चुनौती देते हुए कहा कि वे देशव्यापी जाति जनगणना करवाकर रहेंगे। तो चिराग पासवान ने भी यहां राहुल के सुर में सुर मिला दिया।

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