नागौद राजघराने में गोलीकांड: रिश्तों, संपत्ति और सत्ता संघर्ष की परतें, आखिर कैसे खूनी विवाद तक पहुंचा मामला?

Shooting incident in the Nagod royal family

पांच दशक से राजनीति का बड़ा नाम रहा नागौद राजघराना

मध्यप्रदेश के सतना जिले का नागौद राजघराना एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह कोई राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि परिवार के भीतर का ऐसा विवाद है, जिसने हिंसक रूप ले लिया। परसमनिया गढ़ी में हुई फायरिंग की घटना में राजपरिवार की बहू योगिता सिंह घायल हो गईं, जिसके बाद पूरे विंध्य क्षेत्र में इस मामले की चर्चा तेज हो गई है। यह विवाद केवल पारिवारिक रिश्तों तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके पीछे संपत्ति, अधिकार और प्रभाव की लड़ाई भी बताई जा रही है।

कौन हैं नागेंद्र सिंह जूदेव, जिनका विंध्य में रहा दबदबा

नागौद राजघराने के अंतिम राजा महेंद्र सिंह के बड़े पुत्र नागेंद्र सिंह जूदेव विंध्य क्षेत्र की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं। उनका राजनीतिक सफर लगभग पांच दशक लंबा रहा है। वे पहली बार वर्ष 1977 में विधायक चुने गए थे और इसके बाद कुल छह बार विधानसभा पहुंचे।

नागेंद्र सिंह ने मध्यप्रदेश सरकार में गृह, जनसंपर्क, तकनीकी शिक्षा, लोक निर्माण और नर्मदा घाटी विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2014 में उन्होंने खजुराहो लोकसभा सीट से जीत दर्ज कर संसद तक का सफर तय किया। क्षेत्र में आज भी उन्हें प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तित्व के रूप में देखा जाता है।

भतीजे रूपेंद्र सिंह उर्फ बाबा राजा की अलग पहचान

इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में नागेंद्र सिंह के भतीजे रूपेंद्र सिंह उर्फ बाबा राजा हैं। परसमनिया गढ़ी से जुड़े बाबा राजा लंबे समय से राजपरिवार की संपत्तियों और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।

वर्ष 2000 में उनका विवाह राजस्थान के उदयपुर राजघराने से जुड़ी योगिता सिंह से हुआ था। दोनों का एक पुत्र प्रथूदेव सिंह है, जिसे परिवार का इकलौता वारिस माना जाता है। हालांकि बीते कुछ वर्षों से पति-पत्नी के संबंधों में तनाव और अलगाव की खबरें लगातार सामने आती रही हैं।

सुनीता सिंह की एंट्री और बढ़ता गया विवाद

विवाद का दूसरा प्रमुख चेहरा सुनीता सिंह हैं, जो सतना जिले के उमरी गांव की रहने वाली बताई जाती हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि वह सामाजिक कार्यों और एक एनजीओ से जुड़ी थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात बाबा राजा से हुई और बाद में दोनों कई व्यावसायिक गतिविधियों में साथ काम करने लगे।

समय के साथ सुनीता सिंह का परसमनिया गढ़ी में रहना शुरू हुआ। इसके बाद परिवार के भीतर अधिकार, संपत्ति और व्यक्तिगत संबंधों को लेकर मतभेद गहराने लगे। हालांकि इन सभी बातों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह विवाद लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ था।

संपत्ति, पेट्रोल पंप और परसमनिया गढ़ी पर भी टकराव

जानकारों के मुताबिक विवाद केवल पारिवारिक रिश्तों तक सीमित नहीं था। पेट्रोल पंप, पैतृक संपत्तियों और परसमनिया गढ़ी के स्वामित्व को लेकर भी लंबे समय से मतभेद बताए जाते रहे हैं।

कुछ दावों के अनुसार गढ़ी को पर्यटन या रिसॉर्ट परियोजना के रूप में विकसित करने की योजनाओं को लेकर भी अलग-अलग पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पा रही थी। यही कारण है कि इस पूरे मामले को केवल घरेलू विवाद नहीं, बल्कि प्रभाव, विरासत और संपत्ति के संघर्ष के रूप में भी देखा जा रहा है। हालांकि इन दावों की जांच अभी जारी है और पुलिस ने किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की पड़ताल शुरू कर दी है।

कैसे हुआ गोलीकांड और अब आगे क्या?

गुरुवार को परसमनिया गढ़ी में विवाद अचानक हिंसक हो गया। जानकारी के अनुसार योगिता सिंह अपनी मां, भाई और अन्य परिजनों के साथ गढ़ी पहुंची थीं। बताया जाता है कि वे अपना सामान लेने और कुछ लंबित मामलों पर बातचीत करने आई थीं।

इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया। पुलिस के अनुसार सुनीता सिंह ने अपनी लाइसेंसी .22 बोर बंदूक से कई राउंड फायरिंग की। फायरिंग के दौरान एक गोली योगिता Singh के पेट में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार किया गया। घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सुनीता सिंह को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और सभी संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। नागौद राजघराने का यह विवाद अब केवल एक आपराधिक मामले तक सीमित नहीं रह गया है। इस घटना ने विंध्य क्षेत्र की राजनीति, सामाजिक प्रभाव और राजपरिवार के भीतर चल रहे संघर्ष को सार्वजनिक कर दिया है। फिलहाल सभी की निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं, क्योंकि इस गोलीकांड के पीछे छिपी पूरी सच्चाई और कई अनसुलझे सवालों के जवाब अभी सामने आना बाकी हैं।

Exit mobile version