उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में सामने आए एक हाई-प्रोफाइल ठगी प्रकरण ने रियल एस्टेट कारोबार और बड़े वित्तीय लेनदेन की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला भोपाल में डिप्टी कमिश्नर पद पर तैनात आईपीएस अधिकारी आदर्शकांत शुक्ल के पिता राधाकांत शुक्ल से जुड़ा है, जिन्होंने आरोप लगाया है कि जमीन खरीद के नाम पर उनसे 2 करोड़ 27 लाख रुपये की बड़ी रकम ली गई, लेकिन न तो जमीन का स्वामित्व मिला और न ही उनकी राशि वापस की गई।

IPS अधिकारी के पिता से 2.27 करोड़ की कथित ठगी! जमीन सौदे से दुबई निवेश तक, बाराबंकी में हाई-प्रोफाइल मामला

जमीन खरीद का सौदा बना विवाद की वजह

सवा दो करोड़ रुपये के लेनदेन पर उठे सवाल

चेक बाउंस होने के बाद बढ़ा मामला

दुबई निवेश और ज्वेलरी खरीद के आरोप

पुलिस जांच में जुटी, कई पहलुओं की पड़ताल

इस मामले में एक प्रतिष्ठित बिल्डर परिवार के सदस्यों समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि जमीन का सौदा तय होने के बाद रकम प्राप्त कर ली गई, लेकिन बाद में संबंधित भूमि किसी अन्य व्यक्ति को बेच दी गई। शिकायत सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और पूरे मामले को आर्थिक अपराध के दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है।

जमीन खरीद का सौदा बना विवाद की वजह

जानकारी के अनुसार बाराबंकी शहर की मयूर विहार कॉलोनी निवासी राधाकांत शुक्ल ने क्षेत्र में स्थित लगभग 13,150 वर्गफीट भूमि खरीदने का सौदा किया था। बताया गया है कि यह जमीन एक प्रमुख बिल्डर परिवार से जुड़ी थी। शिकायत के मुताबिक वर्ष 2024 तक अलग-अलग किस्तों में कुल 2 करोड़ 27 लाख रुपये का भुगतान किया गया।

पीड़ित का कहना है कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद भूमि उनके नाम हस्तांतरित कर दी जाएगी। लेकिन समय बीतने के बावजूद न तो रजिस्ट्री हुई और न ही जमीन का स्वामित्व उन्हें प्राप्त हुआ। इसके बाद जब उन्होंने मामले की जानकारी जुटाई तो पता चला कि संबंधित भूमि किसी अन्य खरीदार को बेच दी गई है।

यहीं से विवाद ने गंभीर रूप ले लिया और मामला पुलिस तक पहुंच गया।

सवा दो करोड़ रुपये के लेनदेन पर उठे सवाल

इतनी बड़ी राशि के भुगतान के बावजूद सौदा पूरा न होने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भूमि का आश्वासन देकर रकम ली गई और बाद में सौदे की शर्तों का पालन नहीं किया गया।

राधाकांत शुक्ल ने अपनी शिकायत में कहा है कि उन्होंने भुगतान से जुड़े दस्तावेज, बैंक ट्रांजेक्शन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड पुलिस को उपलब्ध कराए हैं। उनका दावा है कि लेनदेन पूरी तरह दस्तावेजी आधार पर हुआ था और रकम का भुगतान विभिन्न चरणों में किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित होते हैं। यही कारण है कि पुलिस बैंकिंग दस्तावेजों और भुगतान से जुड़े सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है।

चेक बाउंस होने के बाद बढ़ा मामला

शिकायत के अनुसार जब जमीन नहीं मिली तो राधाकांत शुक्ल ने अपनी राशि वापस मांगी। आरोप है कि संबंधित पक्ष लगातार समय मांगता रहा और मामले को टालता रहा।

बताया जाता है कि अप्रैल महीने में दोनों पक्षों के बीच एक बैठक भी हुई थी, जिसमें रकम लौटाने का आश्वासन दिया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार लिखित रूप से यह भरोसा दिया गया था कि 15 दिनों के भीतर पूरी राशि वापस कर दी जाएगी।

हालांकि निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी भुगतान नहीं हुआ। इसके बाद आरोपियों द्वारा दिए गए कुछ चेक बैंक में लगाए गए, लेकिन वे पर्याप्त धनराशि न होने के कारण बाउंस हो गए।

चेक बाउंस होने के बाद मामला और गंभीर हो गया तथा शिकायतकर्ता ने इसे सुनियोजित धोखाधड़ी बताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की।

दुबई निवेश और ज्वेलरी खरीद के आरोप

मामले का सबसे चर्चित पहलू वह आरोप है जिसमें कहा गया है कि कथित तौर पर ठगी से प्राप्त राशि का उपयोग विदेश में निवेश और महंगे आभूषण खरीदने में किया गया।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि रकम का एक हिस्सा दुबई स्थित कारोबारी गतिविधियों में लगाया गया, जबकि कुछ राशि से महंगे आभूषण खरीदे गए। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। यदि जांच में ऐसे वित्तीय लेनदेन सामने आते हैं तो मामला केवल धोखाधड़ी तक सीमित न रहकर आर्थिक अपराध और धन के उपयोग के अन्य पहलुओं तक भी पहुंच सकता है। यही वजह है कि जांच एजेंसियां बैंक खातों, लेनदेन के स्रोत और धन के उपयोग की दिशा की भी पड़ताल कर रही हैं।

पुलिस जांच में जुटी, कई पहलुओं की पड़ताल

बाराबंकी पुलिस ने शिकायत के आधार पर चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले से जुड़े दस्तावेजों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी गई है।

जांच के दौरान यह पता लगाया जा रहा है कि जमीन का वास्तविक स्वामित्व किसके पास था, भुगतान किन खातों में हुआ, बाद में भूमि किसे बेची गई और रकम के उपयोग का वास्तविक स्वरूप क्या रहा। इसके अलावा चेक बाउंस होने और भुगतान वापसी के दावों की भी जांच की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। चूंकि मामला करोड़ों रुपये के लेनदेन से जुड़ा है, इसलिए जांच को विशेष गंभीरता से लिया जा रहा है। यह प्रकरण एक बार फिर यह संकेत देता है कि बड़े संपत्ति सौदों में कानूनी सत्यापन, दस्तावेजी जांच और वित्तीय सुरक्षा उपायों का पालन कितना आवश्यक है। फिलहाल पूरे मामले पर सबकी नजर पुलिस जांच पर टिकी है। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि यह विवादित व्यावसायिक लेनदेन है या फिर सुनियोजित धोखाधड़ी का मामला।