अमेरिकी राजदूत का दावा- इसी सप्ताहांत हो सकता है हमला; परमाणु कार्यक्रम पर समझौते के लिए तेहरान पर बढ़ा दबाव
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए कूटनीतिक समझौते पर सहमत नहीं हुआ, तो अमेरिका एक और सैन्य अभियान शुरू कर सकता है। फ्लोरिडा में शुक्रवार को एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप ने कहा, “हम एक और छोटा-सा एपिक फ्यूरी अभियान चला सकते हैं, या फिर वे समझौते के लिए तैयार हो जाएंगे।”
ट्रंप के इस बयान ने पश्चिम एशिया में संभावित सैन्य टकराव की आशंकाओं को फिर हवा दे दी है। उन्होंने ईरान के नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर तेहरान समझदारी दिखाए, तो बातचीत के जरिए समझौता संभव है।
अमेरिकी राजदूत ने भी हमले की जताई संभावना
तुर्किये में अमेरिका के राजदूत टॉम बैरक ने शुक्रवार को कहा कि ईरान पर इसी सप्ताहांत हमला हो सकता है। एक साक्षात्कार के दौरान उनसे संभावित सैन्य कार्रवाई के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि इसकी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप कूटनीतिक समाधान के लिए तैयार हैं और समझौते के रास्ते खुले हैं।
बैरक सीरिया से जुड़े मामलों में अमेरिकी प्रतिनिधि की भूमिका निभाते हैं और ईरान नीति में उनकी सीधी भूमिका नहीं है। इसलिए उनके बयान को अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा नहीं माना जा सकता।
ट्रंप बोले- मुझे ऐसी किसी योजना की जानकारी नहीं
जब पत्रकारों ने ट्रंप से अमेरिकी राजदूत के बयान पर सवाल किया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस सप्ताहांत हमले की किसी योजना की जानकारी नहीं है। इससे संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर स्थिति और अस्पष्ट हो गई है।
ट्रंप ने अपने पिछले सैन्य अभियान का उल्लेख करते हुए दावा किया कि ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ के दौरान ईरान की यूरेनियम संवर्धन क्षमता को नष्ट कर दिया गया था। वहीं, फरवरी में अमेरिका और इजरायल ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत ईरान पर हमले किए थे। समाचार रिपोर्ट के अनुसार, उन हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हुई थी।
कूटनीति या सैन्य कार्रवाई, आगे क्या?
अमेरिका की चेतावनियों के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौते की संभावना अहम बनी हुई है। नवंबर के पहले सप्ताह में अमेरिका में मध्यावधि चुनाव भी होने हैं। ऐसे समय में ट्रंप के बयान और राजदूत की टिप्पणी पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर रखी जा रही है। फिलहाल, सप्ताहांत में हमले की संभावना का दावा सामने आया है, लेकिन ट्रंप ने किसी निश्चित सैन्य कार्रवाई की पुष्टि नहीं की है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान की ओर बढ़ते हैं या तनाव एक बार फिर सैन्य टकराव में बदलता है।