नर्मदा के पानी से बदलेगी मालवा-निमाड़ की खेती, 260 गांवों को मिलेगा सिंचाई का सहारा

Narmada water to transform
2,387.60 करोड़ रुपये की परियोजना से 57,422 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा देने का लक्ष्य। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरदारपुर में करेंगे लोकार्पण। आधुनिक भूमिगत पाइप प्रणाली से खेतों तक पहुंचेगा दबावयुक्त पानी।
मध्य प्रदेश में खेती को बारिश की अनिश्चितता से राहत दिलाने और सिंचाई का दायरा बढ़ाने की दिशा में नर्मदा-झाबुआ-पेटलावद-थांदला-सरदारपुर माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना को अहम कदम माना जा रहा है। 2,387.60 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना का लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 24 अक्टूबर को धार जिले के सरदारपुर स्थित खेल परिसर में करेंगे। परियोजना का लक्ष्य धार और झाबुआ जिलों के 260 गांवों की 57,422 हेक्टेयर कृषि भूमि तक सिंचाई सुविधा पहुंचाना है।
सवाल सिर्फ पानी पहुंचाने का नहीं, खेती की तस्वीर बदलने का है।
मालवा-निमाड़ और झाबुआ क्षेत्र में किसानों के लिए सिंचाई की उपलब्धता कृषि उत्पादन और आय की संभावनाओं से सीधे जुड़ी है। परियोजना के तहत धार जिले की सरदारपुर तहसील के 66 गांवों की 25,422 हेक्टेयर भूमि को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है। वहीं, झाबुआ जिले के 194 गांवों की 32 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा से जोड़ा जाएगा। झाबुआ, पेटलावद, मेघनगर, थांदला, रामा और राणापुर तहसीलों के गांव इस योजना के दायरे में आएंगे।
इसका संभावित असर खेती की लागत, फसल चयन और उत्पादन की स्थिरता पर पड़ सकता है। जिन किसानों को पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पाता, उनके लिए सिंचाई की नई व्यवस्था खेती के विकल्प बढ़ा सकती है। हालांकि, वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि परियोजना की सुविधाएं खेतों तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुंचती हैं और किसान उनका कितना उपयोग कर पाते हैं।
भूमिगत पाइप प्रणाली है परियोजना की बड़ी खासियत
इस परियोजना की प्रमुख विशेषता भूमिगत पाइप नहर प्रणाली है। इसके माध्यम से 2.5 हेक्टेयर के चक तक 20 मीटर दबावयुक्त जल उपलब्ध कराने की व्यवस्था प्रस्तावित है। किसान इस पानी का उपयोग ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई पद्धतियों के जरिए कर सकेंगे।
इस तकनीक का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि पारंपरिक सिंचाई व्यवस्था में पानी खेतों तक पहुंचाने और उसका समान वितरण करने में कई तरह की चुनौतियां आती हैं। भूमिगत पाइप प्रणाली से पानी के अधिक उपयोगी इस्तेमाल की संभावना बढ़ती है। साथ ही, इस पद्धति में सिंचाई के लिए खेतों को समतल करने की आवश्यकता भी नहीं होगी। इससे किसानों को खेती के आधुनिक तरीकों को अपनाने का अवसर मिल सकता है।
नर्मदा का पानी, 102.30 मेगावाट बिजली की जरूरत
परियोजना के तहत धार जिले की कुक्षी तहसील के चंदनखेड़ी गांव में नर्मदा नदी से 186.62 मिलियन घन मीटर पानी के उद्वहन का प्रस्ताव है। परियोजना के संचालन के लिए 102.30 मेगावाट विद्युत की आवश्यकता निर्धारित की गई है। यानी किसानों तक पानी पहुंचाने के लिए मजबूत विद्युत व्यवस्था और संचालन की निरंतरता भी महत्वपूर्ण होगी।
यहीं परियोजना की असली परीक्षा होगी। इतने बड़े स्तर पर पानी को उठाकर दूरस्थ कृषि क्षेत्रों तक पहुंचाने में ऊर्जा की खपत, रखरखाव और वितरण व्यवस्था की दक्षता पर लगातार ध्यान देना होगा। जल उपलब्धता के साथ बिजली की लागत और व्यवस्था का प्रभावी संचालन भी परियोजना की दीर्घकालिक सफलता के लिए अहम रहेगा।
लोकार्पण के बाद निगाहें खेतों तक पहुंचने वाले पानी पर
2,387.60 करोड़ रुपये का निवेश और 260 गांवों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य परियोजना के बड़े दायरे को दर्शाता है। लेकिन किसानों के लिए इसकी सफलता समारोह से नहीं, बल्कि खेतों तक नियमित और पर्याप्त पानी पहुंचने से तय होगी। समय पर जल वितरण, पाइप प्रणाली का रखरखाव, बिजली की उपलब्धता और किसानों को ड्रिप-स्प्रिंकलर अपनाने में सहयोग जैसे पहलू निर्णायक होंगे।
कुल मिलाकर, नर्मदा-झाबुआ-पेटलावद-थांदला-सरदारपुर माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना धार और झाबुआ के कृषि क्षेत्रों के लिए नई संभावनाएं खोल सकती है। अब सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि नर्मदा का पानी किसानों की जमीन तक पहुंचे, सिंचाई की निर्भरता केवल बारिश पर न रहे और कृषि उत्पादन बढ़ाने की संभावनाएं वास्तविक लाभ में बदलें।
Exit mobile version