अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर H1-B वीजा, टैरिफ और चिप निर्माण को लेकर सख्त रुख अपनाया है। वॉशिंगटन डीसी में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पिछले कई दशकों में अपनी इंडस्ट्री और तकनीकी बढ़त दूसरों के हाथों गंवा दी, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। ट्रंप ने दावा किया कि आने वाले समय में चिप उत्पादन का बड़ा हिस्सा अमेरिका में ही होगा और जिन देशों ने अमेरिकी लाभ उठाया, उन्हें अब इसका फायदा नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि पुरानी सरकारें टैरिफ की ताकत नहीं समझ सकीं, जिसकी वजह से देश आर्थिक रूप से कमजोर हुआ, लेकिन उनकी नीतियों से अब पूरा माहौल बदल रहा है।
H1-B वीजा पर ट्रंप का संकेत—“पहले कौशल सीखें, फिर मौके मिलेंगे”
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका में अब चिप निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है, इसलिए पहले अमेरिकी युवाओं को उसी क्षेत्र में प्रशिक्षित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि H1-B नीति में बदलाव का उद्देश्य, अमेरिकी नौकरियों को सुरक्षित करना है।
ट्रंप बोले कि वर्षों तक अमेरिका ने विदेशी कौशल पर निर्भर होकर गलत फैसला किया।
अब लक्ष्य है कि चिप जैसी महत्वपूर्ण तकनीकें अमेरिका में ही विकसित हों।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अब उन गलतियों की भरपाई कर रहा है जो पिछली सरकारों ने की थीं।
चिप एक्ट देश के लिए नुकसानदेह साबित हुआ” — ट्रंप
ट्रंप ने अपने भाषण में चिप एक्ट को अमेरिका के लिए “बड़ी गलती” बताया।
उनके अनुसार, अरबों डॉलर बाहरी देशों को देकर अमेरिका ने अपना उद्योग कमजोर किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरे देशों ने केवल अमेरिका की कमाई लूटी।
ट्रंप बोले कि नई टैरिफ पॉलिसी के कारण चिप निर्माता कंपनियां दोबारा अमेरिका लौट रही हैं।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि बहुत कम समय में वैश्विक चिप उत्पादन का बड़ा हिस्सा अमेरिका के नियंत्रण में होगा।
पुरानी सरकारों पर हमला—“टैरिफ का सही उपयोग ही नहीं करना आता था”
ट्रंप ने कहा कि पहले की सरकारें टैरिफ लगाने की क्षमता और उसके असर को समझ नहीं पाईं।
उनके मुताबिक, अगर टैरिफ का सही इस्तेमाल होता तो उद्योग और नौकरियां बाहर नहीं जातीं।
उन्होंने कहा कि आज भी बड़ी मात्रा में चिप ताइवान में बनती हैं, लेकिन यह स्थिति जल्द बदलेगी।
ट्रंप ने संकेत दिया कि उनकी नीति का मकसद आर्थिक स्वतंत्रता और उद्योगिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है।
आर्थिक दबाव और राजनीतिक चुनौती—अमेरिका में तनाव बरकरार
भले ही ट्रंप टैरिफ नीति को अमेरिका के लिए फायदेमंद बता रहे हों, लेकिन देश की आर्थिक स्थिति अभी भी चुनौतियों से घिरी है।
शटडाउन के प्रभाव से अमेरिका पूरी तरह नहीं उबर पाया है।
महंगाई के कारण डेमोक्रेट्स के हमलों ने रिपब्लिकन पार्टी की स्थिति कमजोर की है।
इसी दबाव में ट्रंप ने टैरिफ से होने वाली कमाई का हिस्सा नागरिकों को $2,000 की राहत राशि के रूप में देने की बात भी कही है।
ट्रंप का यह ऐलान उनके समर्थन आधार को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।





