Thursday, October 22, 2026
  • Contact
India News
  • मुख्य समाचार
  • राजनीति
  • संपादक की पसंद
  • शहर और राज्य
    • उत्तर प्रदेश
      • आगरा
      • कानपुर
      • लखनऊ
      • मेरठ
    • छत्तीसगढ
      • जगदलपुर
      • बिलासपुर
      • भिलाई
      • रायपुर
    • दिल्ली
    • बिहार
      • पटना
    • मध्य प्रदेश
      • इंदौर
      • ग्वालियर
      • जबलपुर
      • भोपाल
    • महाराष्ट्र
      • नागपुर
      • नासिको
      • पुणे
      • मुंबई
    • राजस्थान
      • अजमेर
      • कोटा
      • जयपुर
      • जैसलमेर
      • जोधपुर
  • स्टार्टअप
  • कृषि
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • धर्म
  • ऑटो
  • सरकारी नौकरी
  • वीडियो
No Result
View All Result
India News
Home स्पेशल

क्या स्विट्जरलैंड सच में है ‘डिप्रेसिंग’? 10 दिन रही अमेरिकी महिला, जो देखा उसने बदल दी पूरी सोच

DigitalDesk by DigitalDesk
August 30, 2026
in स्पेशल
0
Switzerland really depressing An American woman spent 10 days
0
SHARES
0
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterWhatsapp

दुनिया के सबसे खूबसूरत देशों में शुमार स्विट्जरलैंड को देखकर अक्सर लोग उसकी बर्फीली चोटियों, हरे-भरे मैदानों, साफ झीलों और खूबसूरत शहरों की तस्वीरों में खो जाते हैं। लेकिन क्या इतनी खूबसूरती के बीच जिंदगी वास्तव में खुशहाल भी है? क्या स्विट्जरलैंड की शांत, अनुशासित और व्यवस्थित जीवनशैली कहीं न कहीं लोगों को अकेला या उदास तो नहीं बनाती? इसी सवाल से जुड़ा एक अनुभव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Quora पर साझा किया गया, जिसने स्विट्जरलैंड की जिंदगी को एक अलग नजरिए से देखने का मौका दिया।

अच्छे घर, अच्छी कार और छुट्टियां… कम वेतन वाली नौकरी करने वाले दंपती भी खुशहाल

अस्पताल का बिल और कॉलेज फीस नहीं बनती जिंदगी की सबसे बड़ी चिंता

साफ सड़कें, शांत रविवार और डिनर के बाद लंबी सैर—क्यों बोली महिला, “यह डिप्रेसिंग नहीं, सभ्य देश है”

अमेरिकी लेखिका Valentina Winslow ने बताया कि वह 10 दिनों तक स्विट्जरलैंड में एक स्थानीय दंपती के साथ रहीं। इस दौरान उन्होंने जिस जीवनशैली को करीब से देखा, वह उनके लिए किसी पर्यटक अनुभव से कहीं ज्यादा थी। उनका सबसे बड़ा सवाल था—अगर इस दंपती की नौकरियां अमेरिका में कम वेतन वाली मानी जाएंगी, तो फिर वे इतनी आरामदायक जिंदगी कैसे जी रहे हैं?

Related posts

Daler Mehndi show Uttarakhand

उत्तराखंड के कुंजापुरी मेले में दलेर मेहंदी का शो… धामी के मंत्री ने मंच पर लगाई दलेर मेहंदी को फटकार

October 21, 2026
story of Deepu Kanwar Barmer

शादी, बेटी की परवरिश और जिम्मेदारियां… फिर भी जज बनने का सपना पूरा…बाड़मेर की दीपू कंवर की कहानी महिलाओं के लिए खास संदेश

October 21, 2026

कैबिनेट मेकर और बेकरी कर्मचारी… फिर भी आरामदायक जिंदगी

Winslow के मुताबिक जिन स्विस दंपती के साथ उन्होंने समय बिताया, पति कैबिनेट बनाने का काम करते थे और पत्नी एक बेकरी में काम करती थीं। अमेरिकी संदर्भ में इन नौकरियों को कम वेतन वाली नौकरियां माना जा सकता है। लेकिन स्विट्जरलैंड में इस दंपती की जिंदगी की तस्वीर बिल्कुल अलग थी। वे एक अच्छे कॉन्डोमिनियम में रहते थे, उनके पास अच्छी कारें थीं, वे छुट्टियों पर जाते थे और अच्छे कपड़े पहनते थे। यहीं से Winslow के मन में सवाल उठा—आखिर ऐसा क्यों?  उनके अनुसार इसका एक कारण स्विट्जरलैंड की सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था है, जो नागरिकों को कई तरह की सुरक्षा प्रदान करती है।

नौकरी चली जाए तो तुरंत सड़क पर नहीं

Winslow ने अपने अनुभव में स्विट्जरलैंड की रोजगार व्यवस्था का खास तौर पर उल्लेख किया। उनके मुताबिक वहां किसी कर्मचारी को अचानक नौकरी से निकाल देना आसान नहीं है। नौकरी खत्म करने के लिए प्रक्रिया का पालन करना होता है और कर्मचारी को नोटिस देना पड़ता है। इसका मकसद यह है कि नौकरी जाने की स्थिति में व्यक्ति अचानक आय से वंचित होकर आर्थिक संकट में न फंस जाए। यानी नौकरी का मतलब केवल महीने की सैलरी नहीं, बल्कि उससे जुड़ी सामाजिक सुरक्षा और स्थिरता भी है। हालांकि स्विट्जरलैंड में रोजगार कानून परिस्थितियों और अनुबंध के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन Winslow ने जिस बात को महसूस किया, वह यह थी कि वहां सामाजिक व्यवस्था व्यक्ति को अचानक आर्थिक असुरक्षा में धकेलने से बचाने पर जोर देती दिखाई देती है।

सरकार से क्या बदलना चाहेंगे?

Winslow ने उस स्विस व्यक्ति से यह भी पूछा कि अगर सरकार के कानूनों में कोई बदलाव करने का मौका मिले तो वह क्या बदलना चाहेगा। उनका जवाब इतना अप्रत्याशित था कि Winslow को हंसी आ गई। उस व्यक्ति ने गंभीर सामाजिक या आर्थिक मुद्दे के बजाय कहा कि वह चाहता है कि हेलीकॉप्टर से बंजी जंप करना कानूनी हो। यही जवाब Winslow के लिए शायद सबसे बड़ा सांस्कृतिक अंतर बन गया।  एक अमेरिकी नागरिक के नजरिए से देखें तो सरकार से अपेक्षाएं अक्सर स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, रोजगार, टैक्स, आवास या दूसरी आर्थिक चिंताओं से जुड़ी हो सकती हैं। लेकिन जिस व्यक्ति से वह मिलीं, उसकी प्राथमिकता सरकार से कहीं ज्यादा रोजमर्रा की जिंदगी और मनोरंजन से जुड़ी थी।

अस्पताल का बिल जिंदगी नहीं बदलता?

Winslow के अनुभव का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ा था।

उन्होंने लिखा कि स्विस लोग अस्पताल के बिल और कॉलेज की फीस को उसी तरह की विनाशकारी आर्थिक चिंता के रूप में नहीं देखते, जैसी चिंता अमेरिका में कई परिवारों को हो सकती है।

यहां एक जरूरी तथ्य समझना भी महत्वपूर्ण है। स्विट्जरलैंड में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह मुफ्त नहीं है। वहां अनिवार्य स्वास्थ्य बीमा प्रणाली है और लोगों को प्रीमियम, फ्रेंचाइज़ तथा अन्य लागतों का सामना करना पड़ सकता है। इसी तरह उच्च शिक्षा भी हर मामले में मुफ्त नहीं है।

फिर भी Winslow की धारणा यह थी कि सामाजिक सुरक्षा का मजबूत ढांचा लोगों को बड़े आर्थिक झटकों से बचाने में मदद करता है।

बर्न की सड़कों पर भी नजर नहीं आया बेघरपन

Winslow ने स्विट्जरलैंड की राजधानी बर्न का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक 10 दिनों के प्रवास के दौरान उन्होंने सार्वजनिक जगहों पर वह बेघरपन नहीं देखा जिसकी उन्होंने अमेरिका में कल्पना या अनुभव किया था। यह अनुभव उनके लिए इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि किसी देश की समृद्धि केवल ऊंची इमारतों और महंगी कारों से नहीं मापी जाती। असली सवाल यह भी है कि समाज के कमजोर वर्ग किस स्थिति में रह रहे हैं। हालांकि किसी पर्यटक के व्यक्तिगत अनुभव से पूरे देश में बेघर लोगों की संख्या या स्थिति का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा, लेकिन यह जरूर दिखाता है कि Winslow पर स्विट्जरलैंड की सामाजिक व्यवस्था का प्रभाव कितना गहरा पड़ा।

सड़कें साफ, ट्रेनें साफ और जिंदगी व्यवस्थित

स्विट्जरलैंड की सबसे ज्यादा तारीफ Winslow ने उसकी सार्वजनिक व्यवस्था और जीवनशैली को लेकर की। साफ सड़कें, साफ ट्रेनें, खूबसूरत प्रकृति और लोगों की अनुशासित दिनचर्या ने उन्हें प्रभावित किया। उनके मुताबिक वहां बुजुर्ग लोग भी शाम के भोजन के बाद लंबी सैर करते नजर आते हैं। यह छोटी-सी आदत भी स्विस जीवनशैली की एक बड़ी तस्वीर पेश करती है—काम के बाद जिंदगी को जीने का समय।

रविवार का सन्नाटा भी जरूरी है

Winslow ने स्विट्जरलैंड की शांत संस्कृति का जिक्र करते हुए रविवार की एक दिलचस्प बात भी बताई। उनके अनुसार वहां रविवार को शोर-शराबे से बचने की संस्कृति इतनी मजबूत है कि कुछ स्थानीय नियमों के तहत शोर करने वाली गतिविधियों पर प्रतिबंध या सीमाएं हो सकती हैं। उन्होंने खास तौर पर रविवार को लॉन काटने पर रोक का उल्लेख किया। यह नियम सिर्फ घास काटने से जुड़ा मामला नहीं है। इसके पीछे एक व्यापक सामाजिक विचार दिखाई देता है—हर व्यक्ति को आराम और शांति का अधिकार।

खाना सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं

स्विट्जरलैंड की संस्कृति का एक और पहलू Winslow को पसंद आया—खाने को लेकर लोगों का रवैया। उनके अनुसार स्विस लोग फ्रांसीसी और स्पेनिश संस्कृति की तरह भोजन को जल्दी-जल्दी खत्म करने के बजाय उसका आनंद लेने में समय लगाते हैं। यानी डिनर केवल खाना नहीं, बल्कि परिवार, दोस्तों और बातचीत के लिए समय भी है।

तो क्या स्विट्जरलैंड ‘डिप्रेसिंग’ है?

Winslow का जवाब बिल्कुल स्पष्ट था— नहीं। उनके मुताबिक उन्होंने स्विट्जरलैंड में जिस जीवन को देखा, वह उन्हें उदास या नीरस नहीं बल्कि “सभ्य” लगा। उनकी नजर में स्विट्जरलैंड की खासियत सिर्फ उसकी प्राकृतिक सुंदरता नहीं थी। असली आकर्षण था—सुरक्षा, साफ-सफाई, सार्वजनिक अनुशासन, प्रकृति के करीब जिंदगी और काम के अलावा जीवन का आनंद लेने की संस्कृति। हालांकि यह अनुभव एक व्यक्ति का व्यक्तिगत नजरिया है और स्विट्जरलैंड में भी महंगाई, कर, आवास की लागत, स्वास्थ्य बीमा और दूसरी चुनौतियां मौजूद हैं। फिर भी यह कहानी एक बड़ा सवाल जरूर छोड़ती है— क्या किसी देश की सफलता सिर्फ उसकी GDP, ऊंची इमारतों और बड़ी कंपनियों से तय होती है?  या फिर इस बात से भी कि वहां एक सामान्य कर्मचारी कितना सुरक्षित महसूस करता है, परिवार कितना आराम से रह सकता है और काम के बाद उसके पास जिंदगी जीने के लिए कितना समय बचता है? Valentina Winslow के 10 दिनों के अनुभव में स्विट्जरलैंड का जवाब शायद यही है— “जिंदगी सिर्फ ज्यादा कमाने का नाम नहीं… जिंदगी को सुकून से जी पाने का नाम भी है।”

Tags: #Switzerland #really depressing #American woman spent 10 days
LIVE India News

लाइव इंडिया न्यूज 2016 से आप तक खबरें पंहुचा रहा है। लाइव इंडिया वेबसाइट का मकसद ब्रेकिंग, नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, बिजनेस और अर्थतंत्र से जुड़े हर अपडेट्स सही समय पर देना है। देश के हिंदी भाषी राज्यों से रोजमर्रा की खबरों से लेकर राजनीति नेशनल व इंटरनेशनल मुद्दों से जुडी खबरें और उनके पीछे छुपे सवालों को बेधड़क सामने लाना, देश-विदेश के राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों का विश्लेषण बेबाकी से करना हमारा मकसद है।

Vihan Limelite Event & Entertainment Pvt Ltd
Regd Office Flat No 1
Mig 3 E 6
Arera Colony Bhopal

Branch Office
Main Road. Tikraparaa
Raipur CG

Director Deepti Chaurasia
Mobile No 7725016291

Email id - liveindianewsandviews@gmail.com

Currently Playing

मोदी-योगी की सवा घंटे की मुलाकात, यूपी में चुनावी गणित और संगठन की अगली चाल

Modi Yogi 75 minute meeting

मोदी-योगी की सवा घंटे की मुलाकात, यूपी में चुनावी गणित और संगठन की अगली चाल

उत्तर प्रदेश
अजीत अगरकर के बाद कौन बनेगा टीम इंडिया का नया चीफ सेलेक्टर?

अजीत अगरकर के बाद कौन बनेगा टीम इंडिया का नया चीफ सेलेक्टर?

मनोरंजन
हलफनामे में 3.82 करोड़ की संपत्ति, रोल्स रॉयस की कीमत 13 करोड़, मैथिली ठाकुर पर क्यों उठे सवाल?

हलफनामे में 3.82 करोड़ की संपत्ति, रोल्स रॉयस की कीमत 13 करोड़, मैथिली ठाकुर पर क्यों उठे सवाल?

स्पेशल

RSS feed: Unknown Feed Unknown Feed

  • Contact

© Copyright 2022,LIVE INDIA NEWS. All Rights Reserved | Email: Info@liveindia.news

No Result
View All Result
  • Home
  • मुख्य समाचार
  • शहर और राज्य
  • राजनीति
  • बिजनेस
  • संपादक की पसंद
  • मनोरंजन
  • स्टार्टअप
  • धर्म
  • कृषि

© Copyright 2022,LIVE INDIA NEWS. All Rights Reserved | Email: Info@liveindia.news

Go to mobile version