यूपी के ईंट-भट्ठों में बंधुआ मजदूरी पर सख्त सुनवाई, NHRC 16 अप्रैल को करेगा 216 मामलों की वर्चुअल जांच
NHRC की बड़ी पहल, ऑनलाइन होगी सुनवाई
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) 16 अप्रैल 2026 को उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में ईंट-भट्ठों से जुड़े कथित बंधुआ मजदूरी के 216 मामलों की ऑनलाइन सुनवाई करेगा। यह सुनवाई नई दिल्ली स्थित आयोग के मुख्यालय से सुबह 11:30 बजे शुरू होगी। इस पहल को बंधुआ मजदूरी उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जस्टिस वी. रामासुब्रमणियन करेंगे अध्यक्षता
इस वर्चुअल सुनवाई की अध्यक्षता जस्टिस वी. रामासुब्रमणियन करेंगे। आयोग की यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि बंधुआ मजदूरी जैसे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर NHRC पूरी तरह सक्रिय और प्रतिबद्ध है।
वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य
NHRC ने निर्देश दिया है कि इस सुनवाई में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव या उनके प्रतिनिधि, श्रम आयुक्त और संबंधित जिलों के सभी जिलाधिकारी (DM) अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें। इन अधिकारियों को अपने-अपने जिलों में की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी।
रिपोर्ट में क्या-क्या होगा शामिल
सुनवाई के दौरान अधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि वे बंधुआ मजदूरों की पहचान, उन्हें मुक्त कराने, कौशल विकास (स्किलिंग) और पुनर्वास से संबंधित सभी कदमों की जानकारी दें। इसके साथ ही यह भी बताया जाएगा कि कितने मजदूरों का पंजीकरण ई-श्रम पोर्टल पर कराया गया है, ताकि उन्हें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिल सके।
कानून और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर फोकस
इस सुनवाई में बंधुआ मजदूरी प्रथा (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के प्रावधानों के पालन की समीक्षा की जाएगी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों, खासकर ‘बंधुआ मुक्ति मोर्चा’ और ‘एशियाड वर्कर्स’ मामलों में दिए गए आदेशों के अनुपालन की स्थिति भी जांची जाएगी।
पुनर्वास और आजीविका पर खास नजर
NHRC यह भी देखेगा कि मुक्त कराए गए मजदूरों को पुनर्वास पैकेज के तहत क्या सुविधाएं दी गई हैं। इसमें आर्थिक सहायता, कौशल प्रशिक्षण और वैकल्पिक रोजगार के अवसर शामिल हैं। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मजदूरों को सिर्फ मुक्त ही नहीं कराया जाए, बल्कि उन्हें सम्मानजनक जीवन भी मिल सके।
सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने की पहल
ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण को भी इस सुनवाई में अहम मुद्दा बनाया गया है। इसके जरिए मजदूरों को पेंशन, बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिल सकता है। NHRC यह जानना चाहता है कि बचाए गए मजदूरों को इन योजनाओं से कितना जोड़ा गया है।
दोबारा न हो शोषण, इसके उपाय भी जरूरी
सुनवाई में यह भी समीक्षा की जाएगी कि जिन जिलों में बंधुआ मजदूरी के मामले सामने आए हैं, वहां भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। इसमें निगरानी व्यवस्था, जागरूकता अभियान और कानूनी कार्रवाई जैसे उपाय शामिल होंगे।
स्वतः संज्ञान और शिकायतों पर कार्रवाई
यह पूरी सुनवाई NHRC द्वारा स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) और प्राप्त शिकायतों के आधार पर की जा रही है। आयोग लगातार ऐसे मामलों पर नजर बनाए हुए है और समय-समय पर हस्तक्षेप करता रहा है, ताकि मानवाधिकारों का उल्लंघन न हो।
बंधुआ मजदूरी खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम
कुल मिलाकर, यह सुनवाई उत्तर प्रदेश में बंधुआ मजदूरी के खिलाफ एक सख्त और संगठित कार्रवाई का संकेत है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की यह पहल न केवल पीड़ित मजदूरों को न्याय दिलाने की कोशिश है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करती है कि भविष्य में ऐसे मामलों पर रोक लगे और कानून का सख्ती से पालन हो।