Indian Cricket News Update: टीम इंडिया में बढ़ती चोटों ने बढ़ाई चिंता, आखिर क्यों बार-बार फिटनेस टेस्ट में पिछड़ रहे हैं भारतीय तेज गेंदबाज?

भारतीय क्रिकेट टीम पिछले कुछ महीनों से खिलाड़ियों की लगातार चोटों की समस्या से जूझ रही है। सबसे अधिक असर तेज गेंदबाजों पर देखने को मिला है, जिससे टीम चयन और प्रदर्शन दोनों प्रभावित हुए हैं। कई खिलाड़ी फिटनेस क्लियरेंस मिलने के बाद भी अगली ही सीरीज में चोटिल हो रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आधुनिक फिटनेस सिस्टम और अत्याधुनिक मेडिकल सुविधाओं के बावजूद भारतीय खिलाड़ी बार-बार मैदान से बाहर क्यों हो रहे हैं। इस विषय पर पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज विवेक राजदान ने अपनी राय रखते हुए मौजूदा क्रिकेट कैलेंडर और ट्रेनिंग सिस्टम को बड़ी वजह बताया।

लगातार क्रिकेट खेलने से खिलाड़ियों को तकनीक सुधारने का समय ही नहीं मिल रहा

विवेक राजदान का मानना है कि आज के क्रिकेट में खिलाड़ियों के पास आराम और अपनी गेंदबाजी तकनीक सुधारने का पर्याप्त समय नहीं बचा है। पहले घरेलू और अंतरराष्ट्रीय सीजन के बीच कई सप्ताह का ब्रेक मिलता था, जिसमें गेंदबाज अपनी कमियों पर काम करते थे। लेकिन अब सालभर क्रिकेट खेलने के कारण खिलाड़ियों को रिकवरी और तकनीकी सुधार का अवसर नहीं मिल पाता। यही वजह है कि शरीर पर लगातार दबाव बढ़ता है और चोट का खतरा भी बढ़ जाता है।

केवल जिम नहीं, शरीर की लचक और संतुलन पर भी देना होगा बराबर ध्यान

पूर्व तेज गेंदबाज का कहना है कि फिटनेस का मतलब सिर्फ जिम में भारी वर्कआउट करना नहीं है। तेज गेंदबाजों के लिए शरीर की फ्लेक्सिबिलिटी और संतुलन भी उतना ही जरूरी है। हर खिलाड़ी की शारीरिक क्षमता अलग होती है, इसलिए सभी के लिए एक जैसी फिटनेस योजना कारगर नहीं हो सकती। खिलाड़ियों को अपनी बॉडी को समझकर उसी हिसाब से ट्रेनिंग और रिकवरी प्लान तैयार करना चाहिए, तभी लंबे समय तक फिट रहा जा सकता है।

बुमराह की वापसी बताती है कि सही फिटनेस प्लान कितना महत्वपूर्ण होता है

राजदान ने उदाहरण देते हुए कहा कि जब जसप्रीत बुमराह ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था, तब कई विशेषज्ञों ने उनके गेंदबाजी एक्शन पर सवाल उठाए थे। हालांकि चोटों से जूझने के बावजूद बुमराह हर बार मजबूत वापसी करने में सफल रहे। इसकी सबसे बड़ी वजह यह रही कि उन्होंने अपनी शारीरिक जरूरतों को समझते हुए उसी अनुसार फिटनेस पर लगातार काम किया। यही कारण है कि वह लगभग एक दशक से तीनों प्रारूपों में प्रभावशाली प्रदर्शन कर रहे हैं।

तेज गेंदबाजों के लिए मजबूत पैर और संतुलित ट्रेनिंग सबसे बड़ा हथियार

विवेक राजदान के अनुसार तेज गेंदबाज की असली ताकत उसके पैरों में होती है, क्योंकि गेंदबाजी के दौरान सबसे अधिक दबाव पैरों पर पड़ता है। उनके दौर में लंबी दौड़, स्प्रिंट और हल्के वजन के साथ अधिक रिपीटेशन वाली ट्रेनिंग पर जोर दिया जाता था। उनका मानना है कि आज भी गेंदबाजों को केवल मांसपेशियां मजबूत करने पर नहीं, बल्कि रनिंग, सहनशक्ति, तकनीक और रिकवरी पर बराबर ध्यान देना चाहिए। यदि इन सभी पहलुओं पर संतुलित तरीके से काम किया जाए तो चोटों की संख्या काफी हद तक कम की जा सकती है।

 

 

 

 

 

 

 

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