20 सितंबर को पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, लेकिन कच्चे तेल की चाल ने बढ़ाई चिंता

Petrol and diesel prices

20 सितंबर 2026 को देशभर में पेट्रोल और डीजल के नए दाम जारी हो गए हैं। बड़ी बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू बाजार में आज प्रमुख शहरों में ईंधन के दाम में बड़ा बदलाव नहीं हुआ। दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर पर बना हुआ है। मुंबई में पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83, जबकि कोलकाता में पेट्रोल ₹113.47 और डीजल ₹99.82 प्रति लीटर है।

दिल्ली से लेकर हैदराबाद तक कितना भाव?

20 सितंबर के आंकड़ों में शहरों के बीच कीमतों का बड़ा अंतर साफ दिखाई देता है। चेन्नई में पेट्रोल करीब ₹107.77 और डीजल ₹99.55, बेंगलुरु में पेट्रोल ₹110.93 और डीजल ₹98.80, जयपुर में पेट्रोल ₹112.66 और डीजल ₹97.78, जबकि हैदराबाद में पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर है। यानी एक ही पेट्रोल-डीजल के लिए अलग-अलग राज्यों में उपभोक्ताओं को अलग कीमत चुकानी पड़ रही है। इसकी बड़ी वजह राज्यों के अलग-अलग कर और वैट ढांचे हैं, क्योंकि पेट्रोल-डीजल अभी जीएसटी के दायरे में नहीं हैं।

प्रमुख शहरों के रेट:

शहर पेट्रोल डीजल
दिल्ली ₹102.12 ₹95.20
मुंबई ₹111.18 ₹97.83
कोलकाता ₹113.47 ₹99.82
चेन्नई ₹107.77 ₹99.55
गुरुग्राम ₹102.77 ₹95.44
नोएडा ₹102.12 ₹95.56
बेंगलुरु ₹110.93 ₹98.80
जयपुर ₹112.66 ₹97.78
हैदराबाद ₹115.69 ₹103.82
पटना ₹113.35 ₹99.36
लखनऊ ₹102.05 ₹95.55
तिरुवनंतपुरम ₹115.49 ₹104.40

कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, फिर भी राहत क्यों?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, तो भारतीय पेट्रोल पंपों पर तत्काल उसी अनुपात में कीमत क्यों नहीं बढ़ रही? 17 सितंबर को ब्रेंट क्रूड करीब $104.82 प्रति बैरल पर बंद हुआ था। हालांकि इसके बाद कीमतों में कुछ नरमी भी आई और 20 सितंबर की रिपोर्टों में ब्रेंट 104 डॉलर से नीचे आने की बात कही गई।

यानी फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार का दबाव जरूर है, लेकिन घरेलू पंप कीमतों में उसका सीधा और तत्काल असर दिखाई नहीं दे रहा। यही वजह है कि उपभोक्ताओं को फिलहाल कीमतों में स्थिरता का फायदा मिल रहा है।

सिर्फ कच्चा तेल ही तय नहीं करता पेट्रोल का भाव

पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमत केवल कच्चे तेल की कीमत पर निर्भर नहीं करती। इसमें कच्चे तेल की खरीद लागत के साथ रिफाइनिंग, माल ढुलाई, तेल कंपनियों का मार्जिन, केंद्र का उत्पाद शुल्क और राज्य का वैट जैसे कई घटक शामिल होते हैं। साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी आयात लागत को प्रभावित करती है।

इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का मतलब यह जरूरी नहीं कि अगले ही दिन पेट्रोल पंप पर उतनी ही राशि बढ़ जाए। इसी तरह कच्चे तेल में गिरावट का पूरा लाभ भी हमेशा तुरंत उपभोक्ता तक नहीं पहुंचता।

आम आदमी के लिए असली तस्वीर क्या है?

पेट्रोल की कीमत सीधे वाहन चलाने की लागत बढ़ाती है, जबकि डीजल का असर माल ढुलाई और परिवहन लागत के जरिए कई दूसरी चीजों पर पड़ता है। इसलिए ईंधन की कीमतों में लंबी अवधि तक बदलाव रहने पर इसका असर सब्जियों, खाद्यान्न, लॉजिस्टिक्स और दूसरी वस्तुओं की लागत पर भी पड़ सकता है। 20 सितंबर की तस्वीर फिलहाल राहत वाली है—दाम स्थिर हैं। लेकिन कच्चा तेल 100 डॉलर से ऊपर रहने और वैश्विक आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के बीच नजर आगे भी अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और रुपये की चाल पर रहेगी।

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