महिला स्व-सहायता समूहों के लिए खास योजना, सशक्तिकरण को मिलेगा बढ़ावा

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महिला स्व-सहायता समूहों के लिए खास योजना, सशक्तिकरण को मिलेगा बढ़ावा

महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा महिला स्व-सहायता समूहों के गठन और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। इस योजना के तहत महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक सहायता के रूप में ऋण उपलब्ध कराया जाता है, ताकि वे अपने छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें।

2003 से चल रही है ऋण योजना
यह योजना 15 अगस्त 2003 से संचालित की जा रही है, जिसके अंतर्गत छत्तीसगढ़ महिला कोष द्वारा महिला स्व-सहायता समूहों को ऋण प्रदान किया जाता है। योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को समूह के रूप में संगठित कर उनकी आय बढ़ाना और सामाजिक स्थिति को मजबूत करना है।

पात्रता के लिए जरूरी शर्तें
इस योजना का लाभ उन्हीं महिला समूहों को मिलता है जो निर्धारित मानकों को पूरा करते हैं। समूह का कम से कम एक वर्ष से सक्रिय होना जरूरी है और उसमें 10 से 20 सदस्य होने चाहिए। साथ ही, किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में समूह का सक्रिय खाता होना अनिवार्य है, जिसे कम से कम दो सदस्य संचालित करते हों। समूह में आपसी लेन-देन और ऋण चुकाने की प्रवृत्ति भी देखी जाती है।

2 लाख से 6 लाख तक का मिलेगा ऋण
योजना के तहत पहली बार में अधिकतम 2 लाख रुपये तक का ऋण दिया जाता है। यदि समूह समय पर ऋण चुका देता है, तो एक माह बाद उसे दूसरी बार अधिकतम 6 लाख रुपये तक का ऋण मिल सकता है। इससे समूह अपने कार्यों का विस्तार कर सकता है और बड़े स्तर पर आर्थिक गतिविधियां शुरू कर सकता है।

 बेहद कम ब्याज दर पर ऋण सुविधा
इस योजना की खास बात यह है कि ऋण केवल 3 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज दर पर दिया जाता है। हालांकि, यदि समय पर किश्त जमा नहीं की जाती है, तो बकाया राशि पर 2 प्रतिशत अतिरिक्त दंड ब्याज लगाया जाता है। यह व्यवस्था समूहों को समय पर भुगतान के लिए प्रेरित करती है।

आसान किस्तों में ऋण वापसी
ऋण की वसूली ऋण वितरण के तीन महीने बाद शुरू होती है। एक लाख रुपये तक का ऋण 24 किश्तों में, दो लाख तक का 36 किश्तों में, चार लाख तक का 48 किश्तों में और उससे अधिक राशि 60 किश्तों में चुकानी होती है। इससे समूहों पर आर्थिक दबाव कम रहता ।चरणबद्ध प्रक्रिया से मिलता है ऋण
ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया भी सुव्यवस्थित है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा आवेदन तैयार किया जाता है, जिसे पर्यवेक्षक और परियोजना अधिकारी की अनुशंसा के बाद जिला कार्यक्रम अधिकारी को भेजा जाता है। अंत में कलेक्टर की मंजूरी के बाद राशि सीधे समूह के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है।

हजारों समूहों को मिला ऋण माफी का लाभ
वित्तीय वर्ष 2021-22 में सरकार ने बड़ी राहत देते हुए हजारों महिला स्व-सहायता समूहों का ऋण माफ किया। लगभग 5845 समूहों के 11 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण को माफ किया गया, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर समूहों को बड़ी राहत मिली।

पारदर्शी वसूली प्रक्रिया
ऋण वसूली की प्रक्रिया भी पारदर्शी रखी गई है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता या स्वयं समूह द्वारा बैंक खाते में किश्त जमा की जाती है और उसकी रसीद संबंधित अधिकारियों को दी जाती है। इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहती है। महिला स्व-सहायता समूह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। कम ब्याज दर, आसान प्रक्रिया और सरकारी सहयोग के चलते यह योजना महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है।

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