शिवा शर्मा हत्याकांड: गिरफ्तारी को मां ने बताया न्याय की पहली सीढ़ी..मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति जताया आभार

Shiva Sharma murder case Mother

शिवा शर्मा हत्याकांड: गिरफ्तारी को मां ने बताया न्याय की पहली सीढ़ी

शिवा शर्मा हत्याकांड में फरार चल रहे तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। विजयादशमी के दिन हुई इस कार्रवाई को शिवा की मां रंजना शर्मा ने न्याय की दिशा में पहला कदम बताया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस, विशेष कार्यबल, प्रशासन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उन्हें कानून की प्रक्रिया और न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है।

उत्तर प्रदेश के विशेष कार्यबल और लखनऊ पुलिस ने नागपुर पुलिस की मदद से मुख्य संदिग्ध श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और चालक दानिश को नागपुर से गिरफ्तार किया। तीनों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित था।

शिवा हत्याकांड में तीन गिरफ्तारियां

मां बोलीं, न्याय की पहली सीढ़ी

भेष बदलकर पुलिस से बचने की कोशिश

उत्तर प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक अमिताभ यश के मुताबिक, गिरफ्तारी से बचने के लिए श्रद्धा दुबे लगातार बुर्का पहनती थी, संचार उपकरणों का सीमित इस्तेमाल करती थी और लोगों से संपर्क कम रखती थी। वह कम निगरानी वाले छोटे होटलों में ठहर रही थी। पुलिस को उसके नेपाल जाने की सूचना भी मिली थी, लेकिन बाद में वह वापस लौट आई।

पुलिस के अनुसार, फरारी के दौरान उसकी बहन और चालक भी उसके साथ थे। अब श्रद्धा दुबे को ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाया जाएगा, जहां पुलिस उससे पूछताछ कर जांच को आगे बढ़ाएगी।

नौ अक्टूबर को दर्ज हुआ था मामला

रंजना शर्मा की शिकायत पर नौ अक्टूबर को लखनऊ के हजरतगंज थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत हत्या का मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने शुरुआत में आरोपियों की गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया गया।

शिवा की मां ने यह भी कहा कि कथित उत्पीड़न से जुड़े कुछ अन्य वीडियो लोगों के पास मौजूद हैं। इन वीडियो और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद ही उनकी प्रासंगिकता स्पष्ट होगी। तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी जांच की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन न्याय की प्रक्रिया अभी बाकी है। पुलिस पूछताछ, साक्ष्यों की पुष्टि और अदालत में आरोपों का साबित होना आगे की कार्रवाई के अहम चरण होंगे। गिरफ्तारी अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है।

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