दशकों तक बड़े पर्दे पर अपने अभिनय और अलग अंदाज से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले मिथुन चक्रवर्ती एक बार फिर सुर्खियों में हैं। एक ओर रजनीकांत अभिनीत फिल्म ‘जेलर 2’ बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है, तो दूसरी ओर मिथुन दा को पश्चिम बंगाल सरकार में कैबिनेट मंत्री के दर्जे के साथ सांस्कृतिक सलाहकार की जिम्मेदारी मिली है। यानी सिनेमा की दुनिया में लोकप्रियता और सार्वजनिक जीवन में नई भूमिका, दोनों वजहों से उनका नाम चर्चा में है।
- मिथुन दा का जलवा, सिनेमा से सत्ता तक
- ‘जेलर 2’ की धुआंधार कमाई, मिथुन फिर चर्चा में
- 76 की उम्र में भी महागुरु का जलवा बरकरार
- फिल्मी सफलता के साथ बंगाल सरकार में नई भूमिका
- रजनीकांत की ‘जेलर 2’ में मिथुन का दमदार अंदाज
15 अक्टूबर 2026 को रिलीज हुई ‘जेलर 2’ ने शुरुआती दिनों में बॉक्स ऑफिस पर जोरदार प्रदर्शन किया। 18 अक्टूबर तक फिल्म का दुनिया भर में सकल कारोबार 424 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया। फिल्म में रजनीकांत के साथ मिथुन चक्रवर्ती की मौजूदगी ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा है। हालांकि, फिल्म की कमाई के आंकड़े अलग-अलग व्यापारिक रिपोर्टों के अनुसार बदल सकते हैं। दूसरी बड़ी खबर पश्चिम बंगाल सरकार में उनकी नई जिम्मेदारी है। सात अक्टूबर को जारी नियुक्ति संबंधी खबरों के मुताबिक, मिथुन चक्रवर्ती को सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग में सलाहकार बनाया गया है। इस पद के साथ उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पहले ही उनकी नियुक्ति का संकेत दिया था। मिथुन चक्रवर्ती का सफर केवल एक अभिनेता की सफलता की कहानी नहीं है। हिंदी और बांग्ला सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाने के बाद उन्होंने राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई है। अब सांस्कृतिक सलाहकार के रूप में उनकी जिम्मेदारी बंगाल की कला, सिनेमा और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने से जुड़ी मानी जा रही है। 76 वर्ष की उम्र में भी मिथुन दा की सक्रियता उनके लंबे अनुभव और लोकप्रियता को रेखांकित करती है। अब देखने वाली बात होगी कि बड़े पर्दे पर उनकी सफलता और सरकार में मिली नई जिम्मेदारी, दोनों क्षेत्रों में उनका अगला अध्याय क्या रूप लेता है।
फुटपाथ से सुपरस्टारडम तक, मिथुन चक्रवर्ती ने कैसे बदली अपनी किस्मत?
जिस अभिनेता को कभी उसके रंग और रूप को लेकर आलोचना झेलनी पड़ी, उसी मिथुन चक्रवर्ती ने अपने अभिनय और डांस से भारतीय सिनेमा में अलग पहचान बनाई। गौरांग चक्रवर्ती से मिथुन बनने का उनका सफर संघर्ष, जोखिम लेने और बदलते वक्त के साथ खुद को ढालने की कहानी है।
पहली ही फिल्म में राष्ट्रीय पुरस्कार
16 जून 1950 को कोलकाता में जन्मे मिथुन चक्रवर्ती ने पुणे स्थित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से प्रशिक्षण लिया। वर्ष 1976 में मृणाल सेन की फिल्म मृगया से उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। इस फिल्म में दमदार अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।
यह उपलब्धि असाधारण थी, लेकिन पुरस्कार मिलने के बावजूद उनके लिए सफलता का रास्ता तुरंत आसान नहीं हुआ। फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाए रखने के लिए उन्हें लगातार काम और नए अवसरों की तलाश करनी पड़ी।
‘डिस्को डांसर’ ने बनाया अंतरराष्ट्रीय चेहरा
वर्ष 1982 में आई डिस्को डांसर ने मिथुन को व्यापक लोकप्रियता दिलाई। फिल्म की सफलता भारत से बाहर भी पहुंची और खास तौर पर सोवियत संघ में उनके डांस तथा गानों को बड़ी लोकप्रियता मिली।
मिथुन की खासियत यह थी कि उन्होंने पारंपरिक हीरो की छवि से अलग अपनी पहचान बनाई। उनका डांस स्टाइल, स्क्रीन प्रेजेंस और आम दर्शकों से जुड़ने की क्षमता उनकी लोकप्रियता का बड़ा आधार बना।
कम बजट की फिल्मों को कमजोरी नहीं, कारोबार बनाया
मिथुन के करियर का एक दिलचस्प अध्याय 1990 के दशक में सामने आया, जब उन्होंने कम बजट की फिल्मों में बड़ी संख्या में काम किया। कुछ समीक्षकों ने इन फिल्मों को कमतर माना, लेकिन इनका अपना दर्शक वर्ग था। मिथुन ने एक इंटरव्यू में कहा था कि अभिनेता को अपनी बाजार में वास्तविक कीमत समझनी चाहिए। उनके अनुसार, कम बजट की फिल्मों में काम करना उनके करियर को जारी रखने की व्यावहारिक रणनीति थी। उनके बेटे मिमोह चक्रवर्ती ने भी बताया कि इन फिल्मों से परिवार की आर्थिक सुरक्षा और होटल कारोबार को सहारा मिला।
होटल कारोबार में भी आजमाई किस्मत
मिथुन ने अभिनय के साथ आतिथ्य व्यवसाय में भी कदम रखा और ऊटी में होटल मोनार्क से अपना व्यावसायिक विस्तार किया। उन्होंने फिल्म निर्माण की जरूरतों और होटल कारोबार के बीच तालमेल बैठाने की कोशिश की। फिल्म यूनिट के ठहरने और शूटिंग के प्रबंधन से जुड़ा यह मॉडल उनके व्यावसायिक दृष्टिकोण का उदाहरण बना।
सफलता का अर्थ सिर्फ सुपरहिट फिल्में नहीं
मिथुन चक्रवर्ती की कहानी बताती है कि करियर में उतार-चढ़ाव आने पर रणनीति बदलना भी सफलता का हिस्सा है। मृगया से राष्ट्रीय पुरस्कार और डिस्को डांसर से अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता तक पहुंचने वाले मिथुन ने कम बजट की फिल्मों और होटल व्यवसाय के जरिए अपने करियर को नए आधार दिए। उनकी सबसे बड़ी सीख यही है—प्रतिभा आपको पहचान दिला सकती है, लेकिन परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेने की क्षमता आपको लंबे समय तक टिके रहने का अवसर देती है।