भारतीय शेयर बाजार ने लगातार तीन कारोबारी सत्रों की कमजोरी के बाद आखिरकार राहत की सांस ली है। सप्ताह के शुरुआती दिनों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण बाजार दबाव में था, लेकिन बुधवार को तस्वीर बदलती नजर आई। कारोबार शुरू होते ही निवेशकों ने चुनिंदा शेयरों में खरीदारी दिखाई, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों मजबूती के साथ कारोबार करते दिखाई दिए।
शुरुआती कारोबार में बाजार ने दिखाया दम, सेंसेक्स 75 हजार के पार पहुंचा
बीएसई सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र में 74,775.74 अंक पर बंद हुआ था, जबकि नए सत्र की शुरुआत 75,203.02 अंक पर हुई। सुबह के कारोबार में सेंसेक्स 331.15 अंक यानी 0.44 प्रतिशत की बढ़त के साथ 75,106.89 अंक पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी 50 इंडेक्स भी 86.75 अंक की तेजी के साथ 23,634.50 अंक के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार में यह तेजी ऐसे समय आई है जब पिछले तीन दिनों से लगातार गिरावट दर्ज की जा रही थी।
आईटी और एविएशन सेक्टर के शेयरों में निवेशकों ने दिखाई सबसे ज्यादा दिलचस्पी
बाजार में तेजी की अगुवाई इंडिगो, इन्फोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, एशियन पेंट्स और बजाज फिनसर्व जैसे शेयरों ने की। सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 26 शेयर हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। इंडिगो के शेयरों में करीब 4.88 प्रतिशत की जोरदार बढ़त दर्ज की गई। दूसरी ओर बैंकिंग और कुछ चुनिंदा सेक्टरों में दबाव देखने को मिला, जहां कोटक महिंद्रा बैंक, एक्सिस बैंक, एनटीपीसी और ट्रेंट के शेयर गिरावट के साथ कारोबार करते रहे।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी, बाजार का दायरा हुआ मजबूत
सिर्फ बड़ी कंपनियों के शेयर ही नहीं बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप वर्ग में भी निवेशकों का रुझान सकारात्मक रहा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.52 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.68 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। सेक्टोरल प्रदर्शन पर नजर डालें तो आईटी और मीडिया शेयरों में मजबूती देखने को मिली, जबकि एफएमसीजी, ऑटोमोबाइल और हेल्थकेयर सेक्टर में सीमित दबाव बना रहा।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और ईरान मुद्दा निवेशकों के लिए चिंता का विषय
वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों ने फिर रफ्तार पकड़ी है। ब्रेंट क्रूड 2 प्रतिशत से अधिक उछलकर 93.18 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। पिछले सप्ताह इसमें करीब 11 प्रतिशत की गिरावट देखी गई थी। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनका देश ईरान के साथ ऐसा समझौता चाहता है जिससे वह भविष्य में परमाणु हथियार हासिल न कर सके। पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक परिस्थितियां आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
रुपये की स्थिरता और घरेलू संकेतकों ने निवेशकों को दिया भरोसा
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 94.97 के स्तर पर लगभग स्थिर खुला, जबकि पिछले सत्र में यह 95 पर बंद हुआ था। रुपये में स्थिरता और घरेलू निवेशकों की सक्रियता ने बाजार को सहारा दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम होती है और वैश्विक हालात स्थिर रहते हैं तो आने वाले दिनों में बाजार में और मजबूती देखने को मिल सकती है।





