सुनहरी चमक वाला ‘शरबती गेहूं’ बना मध्य प्रदेश की पहचान, देश-दुनिया में बढ़ी डिमांड
सीहोर मंडी में रिकॉर्ड आवक, बेहतर दाम से खुश किसान; GI टैग और प्रोसेसिंग निवेश से खुल रहे निर्यात के नए रास्ते
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले का शरबती गेहूं आज अपनी खास पहचान के साथ राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी धूम मचा रहा है। अपनी सुनहरी चमक, प्राकृतिक मिठास और उच्च गुणवत्ता के कारण इसे ‘गोल्डन ग्रेन’ के नाम से जाना जाता है। यही वजह है कि इन दिनों सीहोर की कृषि उपज मंडी शरबती गेहूं की खुशबू से महक रही है और किसानों के चेहरों पर संतोष की मुस्कान साफ नजर आ रही है।
मंडी में रिकॉर्ड आवक, क्षमता से ज्यादा भरा प्रांगण
सीहोर की ए-क्लास मंडी में इस समय हालात यह हैं कि जगह कम पड़ रही है। जहां तक नजर जाती है, वहां सिर्फ गेहूं के ढेर दिखाई देते हैं। स्थानीय किसानों के अलावा आसपास के जिलों—देवास, शाजापुर, रायसेन, भोपाल और राजगढ़—से भी बड़ी संख्या में किसान यहां अपनी उपज लेकर पहुंच रहे हैं। किसानों का कहना है कि यहां मिलने वाले दाम अन्य मंडियों की तुलना में बेहतर हैं। शाजापुर के कालापीपल से आए किसान नेमसिंह ठाकुर बताते हैं कि उन्हें यहां 4800 से 5200 रुपये प्रति क्विंटल तक कीमत मिल रही है, जिससे घरेलू जरूरतें और आर्थिक जिम्मेदारियां आसानी से पूरी हो रही हैं।
क्यों खास है सीहोर का शरबती गेहूं?
विशेषज्ञों के अनुसार, सीहोर की मिट्टी और जलवायु इस गेहूं के लिए बेहद अनुकूल है। इसे ‘दो पानी का गेहूं’ कहा जाता है, यानी कम सिंचाई में भी यह बेहतर गुणवत्ता देता है। इसकी खासियत है—दाने की चमक, मिठास और उच्च पोषण स्तर, जो इसे सामान्य गेहूं से अलग बनाते हैं। मंडी के व्यापारियों का मानना है कि देशभर में ‘सीहोरी गेहूं’ के नाम पर कई जगह उत्पाद बेचे जाते हैं, लेकिन असली शरबती गेहूं केवल सीहोर की माटी में ही पैदा होता है।
GI टैग से मिली वैश्विक पहचान
सीहोर के शरबती गेहूं को मिला GI टैग इसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है। इस टैग ने इसे एक ब्रांड पहचान दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। कृषि विभाग के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में इसके उत्पादन क्षेत्र में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2021-22 में जहां इसका रकबा करीब 35 हजार हेक्टेयर था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 40 हजार हेक्टेयर से अधिक हो गया है। ‘एक जिला-एक उत्पाद’ योजना के तहत इसे विशेष प्रोत्साहन भी मिल रहा है।
प्रोसेसिंग और निवेश से खुलेंगे नए रास्ते
शरबती गेहूं अब केवल कच्चे रूप में नहीं, बल्कि प्रोसेसिंग के जरिए वैल्यू एडिशन की ओर बढ़ रहा है। जिले में 28 खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को मंजूरी मिल चुकी है। वहीं आईटीसी लिमिटेड द्वारा 54 एकड़ जमीन पर फूड प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने की योजना है, जिसमें करीब 651 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इससे भविष्य में शरबती गेहूं से बने आटा और अन्य उत्पादों का निर्यात आसान होगा और किसानों को और बेहतर दाम मिल सकेंगे।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रहा बढ़ावा
मंडी में बढ़ती आवक का असर सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं है। परिवहन, हम्माली, पैकिंग और छोटे व्यापारियों के कामकाज में भी तेजी आई है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है। हालांकि वैश्विक स्तर पर ईरान-इजराइल तनाव के कारण निर्यात में कुछ बाधाएं जरूर आई हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि शरबती गेहूं की गुणवत्ता इतनी मजबूत है कि इसकी मांग लंबे समय तक बनी रहेगी।
उत्पादन और कीमत की खास बातें
शरबती गेहूं की औसत उत्पादकता 2700-2800 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। इसकी उन्नत किस्मों में सुजाता, सी-306, एचआई-1544, एचआई-1634 और एचआई-1640 शामिल हैं। जहां सामान्य गेहूं 2000 से 3200 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकता है, वहीं शरबती गेहूं 3500 से 6000 रुपये प्रति क्विंटल तक की कीमत हासिल कर रहा है। कुल मिलाकर, सीहोर का शरबती गेहूं आज सिर्फ एक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की पहचान बन चुका है। बेहतर गुणवत्ता, बढ़ती मांग और सरकारी प्रोत्साहन के चलते यह ‘सुनहरा दाना’ किसानों के लिए समृद्धि का नया रास्ता खोल रहा है।