सेवा सेतु से सेवा संकल्प तक, संदीप रघुवंशी की जनसेवा की अलग पहचान…समाज के अंतिम व्यक्ति तक मदद पहुंचाने का प्रयास…

sausar-assembly-constituency

सेवा सेतु से सेवा संकल्प तक, संदीप रघुवंशी की जनसेवा की अलग पहचान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस को सेवा और जनकल्याण से जोड़ते हुए शुरू किया गया 76 दिवसीय सेवा संकल्प अभियान अब लगातार जनसेवा की नई मिसाल पेश कर रहा है। अभियान के तहत सौसर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित होने वाला 66वां निशुल्क नेत्र शिविर केवल स्वास्थ्य सेवा का कार्यक्रम नहीं, बल्कि जरूरतमंदों तक सीधे पहुंचने वाली उस सोच का उदाहरण है, जिसमें सेवा को राजनीति से ऊपर रखकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक मदद पहुंचाने का प्रयास दिखाई देता है।

इस अभियान में जन अधिकार सेवा समिति, चौरई विधानसभा, जिला छिंदवाड़ा के अध्यक्ष और भाजपा किसान मोर्चा मध्यप्रदेश के प्रदेश कोषाध्यक्ष संदीप रघुवंशी की भूमिका खास तौर पर सामने आती है। लगातार शिविरों के आयोजन और उन्हें जरूरतमंद लोगों से जोड़ने की कोशिश ने उनकी पहचान एक ऐसे जनसेवक के रूप में बनाने का प्रयास किया है, जो सरकारी योजनाओं और सामाजिक सेवा के बीच सेतु की भूमिका निभा रहा है।

66वां नेत्र शिविर, जरूरतमंदों के लिए बड़ी पहल

सौसर के अन्ना साठे मंगल भवन में आयोजित निशुल्क नेत्र शिविर में नेत्र रोगियों की जांच की जाएगी। जांच के दौरान मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए चिन्हित मरीजों को निशुल्क ऑपरेशन के लिए जबलपुर के सुखसागर हॉस्पिटल भेजने की व्यवस्था की गई है। यानी शिविर केवल जांच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बीमारी की पहचान से लेकर उपचार तक की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा सौसर के नवजीवन हॉस्पिटल की विशेषज्ञ टीम द्वारा सामान्य स्वास्थ्य जांच, बीपी, शुगर, ब्लड सहित अन्य जांच की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। यही वजह है कि सेवा संकल्प अभियान को केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली जनसेवा की श्रृंखला के तौर पर देखा जा सकता है।

सेवा सेतु, सरकार और जनता के बीच पुल

अभियान का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू है सेवा सेतु अभियान। इसका मकसद सरकारी सेवाओं को लोगों तक पहुंचाना और आम नागरिकों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत दिलाना है। संदीप रघुवंशी के अनुसार, सेवा सेतु के जरिए सरकार आपके द्वार पहुंचकर नागरिकों को पारदर्शी, संवेदनशील, उत्तरदायी और समयबद्ध लोक सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है। खास तौर पर किसान, ग्रामीण, श्रमिक, महिलाएं और वंचित वर्ग इस पहल के केंद्र में हैं। यही सोच संदीप रघुवंशी की राजनीतिक और सामाजिक सक्रियता को एक अलग आयाम देती है। किसान मोर्चा से जुड़े होने के कारण ग्रामीण और किसान वर्ग के मुद्दों से उनका जुड़ाव पहले से है। ऐसे में सेवा शिविरों के माध्यम से स्वास्थ्य, प्रशासन और जनकल्याण से जुड़े विषयों को जमीन पर ले जाना उनकी सार्वजनिक छवि को और मजबूत करने वाला कदम माना जा सकता है।

76 शिविर, सेवा को संकल्प बनाने की कोशिश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिवस के अवसर पर शुरू किए गए इस 76 दिवसीय अभियान को संपूर्ण छिंदवाड़ा जिले में सेवा दिवस के रूप में समर्पित करने की बात कही गई है। इसका संदेश साफ है—जन्मदिन का उत्सव केवल आयोजन तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के जरूरतमंद लोगों तक सेवा पहुंचे। संदीप रघुवंशी ने इस अभियान में सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया है। जनसेवा के इस मॉडल में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें जनप्रतिनिधियों, प्रशासन और सामाजिक कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश दिखाई देती है। सेवा सेतु अभियान के कार्यक्रम में पूर्व मंत्री नाना भाऊ मोहोड़, भाजपा के स्थानीय पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल होंगे। एसडीएम, सीएमओ, एसडीओपी, बीएमओ, सीईओ सहित प्रशासनिक तंत्र की सहभागिता इस पहल को केवल राजनीतिक कार्यक्रम के बजाय जनता और प्रशासन के संवाद के मंच के रूप में प्रस्तुत करती है।

राजनीति से आगे जनसेवा की तस्वीर

किसी भी जनप्रतिनिधि या राजनीतिक कार्यकर्ता की असली पहचान केवल भाषणों से नहीं, बल्कि जमीन पर जनता के बीच उसकी मौजूदगी से बनती है। संदीप रघुवंशी के नेतृत्व में लगातार स्वास्थ्य शिविर और सेवा आधारित कार्यक्रम आयोजित करने की पहल इसी दिशा में जाती दिखाई देती है। विशेष रूप से मोतियाबिंद जैसे मामलों में मरीज की पहचान से लेकर निशुल्क ऑपरेशन तक की व्यवस्था जरूरतमंद परिवारों के लिए महत्वपूर्ण राहत बन सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच आज भी एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर जांच और आगे उपचार की व्यवस्था लोगों के लिए व्यावहारिक मदद साबित हो सकती है।

कुल मिलाकर, 76 दिवसीय सेवा संकल्प अभियान संदीप रघुवंशी की सार्वजनिक छवि को सेवा, संवेदनशीलता और जनता से सीधे जुड़ाव के साथ जोड़ने की कोशिश करता दिखाई देता है। अगर इसी निरंतरता के साथ सेवा शिविरों और सेवा सेतु जैसी पहलों को आगे बढ़ाया जाता है, तो यह अभियान केवल 76 दिनों का कार्यक्रम न रहकर क्षेत्र में जनसेवा की स्थायी पहचान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

Exit mobile version