एससीओ की 25 साल की यात्रा पर बोले विशेषज्ञ— जन कूटनीति, आपसी विश्वास और बहुपक्षीय सहयोग से बनेगा बेहतर भविष्य
बीजिंग। शांगहाई सहयोग संगठन (एससीओ) के 25 वर्षों के विकास में “शांगहाई भावना” को सदस्य देशों के बीच एकता और सहयोग की सबसे बड़ी ताकत बताया गया है। उज्बेकिस्तान में एससीओ लोक कूटनीति केंद्र के निदेशक काबुलजोन सबिरोव ने कहा है कि बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय परिदृश्य में चीन ने संगठन को मजबूत बनाने और सदस्य देशों के बीच राजनीतिक विश्वास बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ को दिए एक साक्षात्कार में सबिरोव ने कहा कि “शांगहाई भावना” केवल एक सिद्धांत नहीं, बल्कि सदस्य देशों के बीच सहयोग, पारस्परिक सम्मान और साझा विकास का मार्गदर्शक आधार बन चुकी है। उनके अनुसार, यही भावना एससीओ को आज दुनिया के सबसे प्रभावशाली क्षेत्रीय संगठनों में से एक बनाने में सहायक रही है।
25 वर्षों में कई क्षेत्रों में बढ़ा सहयोग
सबिरोव ने कहा कि स्थापना के बाद से पिछले 25 वर्षों में एससीओ ने शिक्षा, युवा, खेल, पर्यटन, मीडिया और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। संगठन ने केवल सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया है। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों की आर्थिक क्षमता, राजनीतिक व्यवस्था और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि अलग-अलग होने के बावजूद “शांगहाई भावना” ने सभी देशों को एक साझा मंच पर जोड़ने का काम किया है। यही कारण है कि संगठन लगातार विस्तार और सहयोग की नई संभावनाओं की ओर बढ़ रहा है।
जन कूटनीति को बताया सबसे प्रभावी माध्यम
उज्बेक विशेषज्ञ ने कहा कि स्थायी शांति और साझा समृद्धि के लिए केवल सरकारों के बीच सहयोग पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों के बीच विश्वास और संवाद भी उतना ही आवश्यक है। एससीओ लोक कूटनीति केंद्र के प्रमुख के रूप में उन्होंने कहा कि जन कूटनीति (People-to-People Diplomacy) विभिन्न सभ्यताओं और संस्कृतियों के बीच दूरी कम करने का प्रभावी माध्यम है। इससे अलग-अलग देशों के लोग एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझते हैं और आपसी विश्वास मजबूत होता है। उनके अनुसार, शिक्षा, सांस्कृतिक कार्यक्रम, युवा आदान-प्रदान और मीडिया सहयोग जैसी पहलें एससीओ के भीतर दीर्घकालिक संबंधों की मजबूत नींव तैयार कर रही हैं।
चीन की भूमिका की सराहना
काबुलजोन सबिरोव ने एससीओ के भीतर बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने में चीन की सक्रिय भूमिका की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि जटिल अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच चीन ने संगठन के विकास, सदस्य देशों के बीच राजनीतिक विश्वास बढ़ाने और साझा विकास की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने माना कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती अस्थिरता और देशों के बीच विश्वास संकट के दौर में संवाद, सहयोग और साझा सुरक्षा की नीति पहले से अधिक प्रासंगिक हो गई है।
साझा सुरक्षा की अवधारणा पर जोर
सबिरोव ने कहा कि वर्तमान समय में साझा, व्यापक, सहयोगात्मक और टिकाऊ सुरक्षा की अवधारणा को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है। उनका मानना है कि आतंकवाद, उग्रवाद, साइबर सुरक्षा, आर्थिक चुनौतियों और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं का समाधान केवल सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। उन्होंने कहा कि एससीओ का सहयोग मॉडल सदस्य देशों को मिलकर इन चुनौतियों का सामना करने और क्षेत्र में स्थिरता तथा विकास को बढ़ावा देने का अवसर प्रदान करता है।
क्षेत्रीय सहयोग को मिलेगी नई दिशा
विश्लेषकों का मानना है कि एससीओ आज केवल एक सुरक्षा संगठन नहीं रह गया है, बल्कि यह आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक सहयोग का भी महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। ऐसे समय में जब दुनिया कई भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है, सदस्य देशों के बीच विश्वास और सहयोग को मजबूत करना संगठन की प्राथमिकता बना हुआ है। उज्बेक विशेषज्ञ के बयान को एससीओ के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। उनका कहना है कि “शांगहाई भावना” आने वाले समय में भी सदस्य देशों के बीच एकता, आपसी सम्मान और साझा विकास की आधारशिला बनी रहेगी।
(साभार: चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)





