उद्यमिता शुरू करने के लिए उम्र की कोई तय सीमा नहीं होती। कई बार जिंदगी की जिम्मेदारियों के कारण व्यक्ति अपने पसंदीदा काम या पुराने सपने को पीछे छोड़ देता है, लेकिन सही समय आने पर वही रुचि नए अवसर का रास्ता खोल सकती है। हेमलता पाल और रिधिमा अरोड़ा की कहानियां इसी बदलाव को अलग-अलग तरीके से सामने रखती हैं। हेमलता ने करीब 35 साल बाद कढ़ाई और क्रॉस-स्टिचिंग के अपने पुराने शौक को फिर से अपनाया और लगभग 50 वर्ष की उम्र में उसे ऑनलाइन कारोबार में बदल दिया। वहीं, रिधिमा अरोड़ा ने अपने पिता की बीमारी के दौरान मिले अनुभवों और प्राकृतिक सामग्रियों से जुड़ी जानकारी को खाद्य व्यवसाय की दिशा में आगे बढ़ाया। दोनों की यात्राएं बताती हैं कि व्यक्तिगत अनुभव, रुचि और सीख को कारोबार के अवसर में बदला जा सकता है।
करीब 35 साल बाद पुराने शौक को कारोबार में बदलने की हेमलता पाल की कोशिश
हेमलता पाल ने लंबे समय तक अपने रचनात्मक शौक से दूरी बनाए रखी, लेकिन करीब 35 साल बाद उन्होंने क्रॉस-स्टिचिंग और कढ़ाई की ओर दोबारा लौटने का फैसला किया। करीब 50 वर्ष की उम्र में उन्होंने इस रुचि को सिर्फ शौक तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे ऑनलाइन बिजनेस का रूप देने की दिशा में कदम बढ़ाया। उनका ऑनलाइन स्टोर “चाची क्रॉस स्टिच” इसी प्रयास का हिस्सा है। यह स्टोर इंस्टामोजो के माध्यम से शुरू किया गया था और इसमें क्रॉस-स्टिचिंग से जुड़े उत्पादों के साथ DIY किट और अन्य क्राफ्ट सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है। इसका मकसद ग्राहकों को तैयार सामान देने के साथ इस कला को खुद सीखने और बनाने के लिए भी प्रोत्साहित करना है।
अपने पुराने जुनून को दोबारा अपनाकर हेमलता ने दिखाई नई शुरुआत की राह
हेमलता की कहानी इस बात का उदाहरण है कि वर्षों पहले छूटा हुआ शौक भी भविष्य में नए काम की नींव बन सकता है। उनके लिए क्रॉस-स्टिचिंग सिर्फ रचनात्मक गतिविधि नहीं रही, बल्कि इसी रुचि ने ऑनलाइन कारोबार का रास्ता तैयार किया। उन्होंने अपने अनुभव और पसंद के काम को दूसरे लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया। उनके स्टोर में DIY से जुड़े उत्पादों की मौजूदगी यह भी दिखाती है कि कारोबार केवल तैयार सामान बेचने तक सीमित नहीं होना चाहिए। अपने पसंदीदा काम से जुड़ी जानकारी और सामग्री को दूसरे लोगों तक पहुंचाकर भी एक छोटा व्यवसाय खड़ा किया जा सकता है।
पिता की बीमारी के अनुभव ने रिधिमा अरोड़ा को पोषण आधारित कारोबार की ओर बढ़ाया
रिधिमा अरोड़ा की उद्यमिता की शुरुआत पारिवारिक अनुभव से हुई। उन्होंने अपने पिता को गंभीर बीमारी से गुजरते देखा और इसी दौरान भोजन, पोषण तथा प्राकृतिक सामग्रियों की भूमिका को समझने में उनकी रुचि बढ़ी। रिधिमा पहले कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम करती थीं, लेकिन बाद में उन्होंने अपने अनुभव और रुचि को कारोबार में बदलने का रास्ता चुना। इसी सोच से नामह्या फूड्स की शुरुआत हुई। रिधिमा ने बीमारी के दौरान जड़ी-बूटियों और प्राकृतिक तत्वों से जुड़े विकल्पों के बारे में जानकारी हासिल की थी। उनके अनुसार, इन चीजों से मिलने वाली जानकारी को दूसरे लोगों तक पहुंचाना भी जरूरी था।
कॉर्पोरेट नौकरी के अनुभव को पीछे छोड़कर रिधिमा ने बनाया अपना कारोबारी रास्ता
एक स्थिर नौकरी से अलग होकर अपना कारोबार शुरू करना आसान फैसला नहीं माना जाता। रिधिमा ने भी कॉर्पोरेट नौकरी के अनुभव के बाद अपने लिए अलग दिशा चुनी और भोजन तथा पोषण से जुड़े क्षेत्र में काम शुरू किया। उनके कारोबार की नींव परिवार में मिले अनुभव और प्राकृतिक सामग्रियों से जुड़ी उनकी रुचि पर बनी। दोनों महिलाओं की कहानियां अलग परिस्थितियों से शुरू हुईं, लेकिन इनमें एक समान बात दिखाई देती है—अपने अनुभव और पसंद के काम को नए अवसर में बदलने की कोशिश। यही वजह है कि उनकी यात्राएं यह संदेश देती हैं कि नया काम शुरू करने के लिए उम्र से ज्यादा जरूरी अपनी रुचि और अनुभव को पहचानना है।





