सऊदी को परमाणु बिजली, दुनिया को डर
अमेरिका और सऊदी ने 22 जुलाई को परमाणु समझौता किया। इसके तहत अमेरिकी कंपनियां सऊदी में परमाणु बिजलीघर बनाएं। लेकिन पेंच ये है: समझौते में शुरुआत में 5% और बाद में 20% तक यूरेनियम एनरिचमेंट की इजाजत है। और सबसे बड़ा खतरा – *समझौते में सऊदी के परमाणु प्रोग्राम पर नजर रखने का कोई प्रावधान ही नहीं है। इसी वजह से अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने संसद को भेजी गोपनीय रिपोर्ट में कहा: `सऊदी अरब एटमी बम बना सकता है`। डेमोक्रेट सांसद अब 90 दिन में इस डील की समीक्षा और इसे रोकने का प्रस्ताव ला सकते हैं।
सऊदी ने एटमी हथियार का विकल्प नहीं छोड़ा – ट्रंप डील के बाद मिडिल ईस्ट में नया परमाणु खेल शुरू?
अमेरिका-सऊदी परमाणु डील – 20% तक यूरेनियम एनरिचमेंट की छूट
खुफिया रिपोर्ट – सऊदी “एटम बम” बना सकता है, निगरानी का कोई प्रावधान नहीं
ट्रंप का नया नक्शा – होर्मुज स्ट्रेट का नाम “ट्रम्प स्ट्रेट” रखा
ईरान पर फिर हमले का प्लान? मिडटर्म के बाद बमबारी का आदेश संभव
हूती हमलों के बीच सऊदी-पाक-तुर्की की सीक्रेट मीटिंग – “एक पर हमला = तीनों पर हमला
2. “ट्रम्प स्ट्रेट” – होर्मुज पर नया नाम, नया तनाव
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर होर्मुज स्ट्रेट का नक्शा पोस्ट करके उसे `ट्रम्प स्ट्रेट` बता दिया। होर्मुज दुनिया के 20% तेल का रास्ता है। ईरान के ठीक सामने। सूत्रों के मुताबिक ट्रंप मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर हमले का प्लान बनाने का आदेश दे चुके हैं। इससे पहले ईरान ने UN में 12 अरब डॉलर रकम, तेल प्रतिबंध हटाने के बदले होर्मुज खोलने का प्रस्ताव दिया था, जिसे ट्रंप ने ठुकरा दिया।
सऊदी + पाकिस्तान + तुर्की = नया इस्लामिक सैन्य ब्लॉक?
सबसे अहम खबर कटिंग के नीचे है। यमन के हूती हमलों के बीच रियाद में सऊदी, पाकिस्तान और तुर्की के सैन्य प्रमुख मिले।
पाकिस्तानी सेना के मुताबिक बैठक में 2 बातें हुईं:
1. खुफिया जानकारी साझा करना
2. सैन्य तालमेल बढ़ाना
और बीते महीने तीनों देशों में एक डील हुई थी: `किसी एक देश पर हमला = तीनों पर हमला माना जाएगा`। इसका सीधा मतलब है – ईरान या हूती अगर सऊदी पर हमला करें तो पाकिस्तान और तुर्की भी जवाब देंगे।
क्या बन रहा है नया न्यूक्लियर ट्रायंगल?
एक तरफ अमेरिका सऊदी को “शांतिपूर्ण परमाणु” दे रहा है, लेकिन निगरानी नहीं।
दूसरी तरफ सऊदी, पाकिस्तान – जो पहले से परमाणु ताकत है – और तुर्की मिलकर नया सैन्य गठबंधन बना रहे हैं।
तीसरी तरफ ट्रंप ईरान को फिर टारगेट कर रहे हैं।
अगले 90 दिन में अगर अमेरिकी संसद ये डील रोकती है तो ठीक, वरना मिडिल ईस्ट में 1970 के बाद पहली बार खुलकर “सुन्नी परमाणु ब्लॉक” बनने का रास्ता साफ हो जाएगा। और उसका सीधा असर भारत के तेल, सुरक्षा और खाड़ी में बसे 80 लाख भारतीयों पर पड़ेगा।